Indus Water Treaty : पाक PM की धमकी! पानी रोका तो मुंहतोड़ जवाब देंगे, कश्मीर पर रुख कभी नहीं बदलेंगे
Indus Water Treaty : पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने कार्यक्रम में भारत को पानी के मुद्दे पर कड़ी चेतावनी दी।
Indus Water Treaty : पाकिस्तान। इस्लामाबाद में भारत-पाकिस्तान के बीच सिंधु जल संधि को लेकर तनाव एक बार फिर बढ़ गया है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने 14 अगस्त से पहले आयोजित एक कार्यक्रम में भारत को पानी के मुद्दे पर कड़ी चेतावनी दी। उन्होंने सिंधु जल संधि को पाकिस्तान की ‘रेड लाइन’ बताया और कहा कि पानी के मामले में किसी भी कदम का जवाब दिया जाएगा। दूसरी ओर, पाकिस्तान खुद आतंकवाद, बलूचिस्तान में असंतोष, पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर में राजनीतिक हिंसा और इमरान खान से जुड़े राजनीतिक संकट जैसी चुनौतियों से जूझ रहा है।
सिंधु जल संधि पर फिर बढ़ा तनाव
भारत और पाकिस्तान के बीच पानी का मुद्दा एक बार फिर चर्चा में है। शहबाज शरीफ ने भारत से अपने रुख पर दोबारा विचार करने को कहा है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के पानी की हर बूंद उसके लिए बेहद महत्वपूर्ण है। पाकिस्तानी प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि पानी के मुद्दे पर कोई समझौता नहीं किया जाएगा।
PM के बयान से साफ है कि सिंधु जल संधि को लेकर दोनों देशों के बीच तनाव अभी खत्म नहीं हुआ है। भारत ने अप्रैल 2025 में पहलगाम आतंकी हमले के बाद संधि को स्थगित करने का फैसला किया था। उस हमले में 26 लोगों की मौत हुई थी।
शहबाज शरीफ ने भारत पर लगाए गंभीर आरोप
पाकिस्तानी प्रधानमंत्री ने भारत की नीति को शांति के खिलाफ बताया। शरीफ ने आरोप लगाया कि भारत ने सिंधु जल संधि को एकतरफा तरीके से रोककर खुद को शांति का दुश्मन साबित किया है।
उन्होंने कहा कि पाकिस्तान की शांति की इच्छा को उसकी कमजोरी नहीं समझा जाना चाहिए। साथ ही उन्होंने पानी को देश की राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा मुद्दा बताया। उनके बयान ऐसे समय आए हैं, जब दोनों देशों के बीच पिछले कुछ समय से रिश्ते बेहद तनावपूर्ण हैं।
पहलगाम हमले के बाद भारत ने बदला रुख
सिंधु जल संधि को लेकर भारत का फैसला सुरक्षा कारणों से जुड़ा है। 22 अप्रैल 2025 को पहलगाम में आतंकवादी हमले के बाद भारत ने 23 अप्रैल को सुरक्षा मामलों की कैबिनेट समिति की बैठक की थी। इसके बाद सिंधु जल संधि को स्थगित करने का फैसला लिया गया।
भारत का कहना है कि जिस माहौल में 1960 में यह समझौता हुआ था, वह अब बदल चुका है। नई दिल्ली ने सीमा पार आतंकवाद के खिलाफ प्रभावी और विश्वसनीय कार्रवाई को महत्वपूर्ण शर्त बताया है। इसी वजह से पानी का मुद्दा अब भारत-पाकिस्तान संबंधों में सुरक्षा और आतंकवाद के मुद्दे से भी जुड़ गया है।
बलूचिस्तान में स्वतंत्रता दिवस पर ‘ब्लैक डे’ की अपील
भारत को चेतावनी देने के बीच पाकिस्तान को बलूचिस्तान में भी विरोध का सामना करना पड़ रहा है। बलूच राष्ट्रवादी समूहों और कार्यकर्ताओं ने 14 अगस्त को पाकिस्तान के स्वतंत्रता दिवस के बजाय ‘ब्लैक डे’ के रूप में मनाने की अपील की है।
विरोध करने वालों ने लोगों से सरकारी समारोहों के बहिष्कार और काले झंडे या काली पट्टी के जरिए विरोध जताने को कहा है। बलूचिस्तान लंबे समय से अलगाववादी हिंसा और राजनीतिक असंतोष से प्रभावित रहा है। हाल के दिनों में भी यहां सुरक्षा बलों और विद्रोही समूहों के बीच संघर्ष की खबरें सामने आई हैं।
बलूचिस्तान में हिंसा बनी बड़ी चुनौती
सुरक्षा अभियान और नागरिकों को लेकर दावों ने तनाव बढ़ाया है। 12 अगस्त को बलूचिस्तान में पाकिस्तानी सुरक्षा बलों ने एक अभियान में 10 आतंकवादियों के मारे जाने की जानकारी दी। उसी दिन सुराब इलाके में एक कार बम समय से पहले फट गया। इस घटना में तीन नागरिकों और आठ हथियारबंद लोगों की मौत की जानकारी सामने आई।
पाकिस्तानी सेना ने बलूच अलगाववादी समूहों पर कार्रवाई की बात कही है। वहीं, बलूचिस्तान में मानवाधिकार और सैन्य कार्रवाई को लेकर अलग-अलग आरोप भी लगाए जाते रहे हैं। इन घटनाओं ने केंद्र सरकार और स्थानीय आबादी के बीच तनाव को फिर चर्चा में ला दिया है।
खैबर पख्तूनख्वा में आतंकवाद का दबाव
पाकिस्तान के सामने आतंकवाद भी बड़ी आंतरिक चुनौती बना हुआ है। खैबर पख्तूनख्वा के स्वात इलाके में 2 अगस्त को काबल पुलिस स्टेशन के पास आत्मघाती हमला हुआ था। इस हमले में कम से कम 17 लोगों की मौत और 34 लोगों के घायल होने की जानकारी सामने आई।
मृतकों में पुलिसकर्मी और आम नागरिक दोनों शामिल थे। यह हमला एक ऐसे प्रदर्शन के दौरान हुआ, जिसमें लोग इलाके में बढ़ती आतंकी गतिविधियों के खिलाफ आवाज उठा रहे थे। घटना ने पाकिस्तान की आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े किए हैं।
PoJK में हिंसक विरोध से सरकार की मुश्किलें बढ़ीं
पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर में भी राजनीतिक तनाव गंभीर है। क्षेत्र में Joint Awami Action Committee यानी JAAC के नेतृत्व में विरोध प्रदर्शन हुए हैं। प्रदर्शनकारियों ने राजनीतिक प्रतिनिधित्व, चुनावी व्यवस्था और स्थानीय अधिकारों से जुड़े मुद्दे उठाए हैं।
जुलाई के अंत में हुई हिंसा में सुरक्षा बलों और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़पों की खबरें सामने आई थीं। इसके बाद क्षेत्र में सुरक्षा बढ़ाई गई और कई जगह इंटरनेट तथा आवाजाही पर भी असर पड़ा। अगस्त में चुनाव के अंतिम चरण को भी सुरक्षा कारणों से कुछ क्षेत्रों में टालना पड़ा।
PoJK में चुनाव और विरोध का मुद्दा
पाकिस्तान के प्रशासन के लिए यह मामला राजनीतिक रूप से भी संवेदनशील है। रिपोर्टों के अनुसार PoJK में चुनावी प्रक्रिया को लेकर भी विवाद सामने आया। JAAC और पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ से जुड़े समूहों ने चुनावी प्रक्रिया को लेकर आपत्ति जताई और कुछ चरणों के बहिष्कार का आह्वान किया। पाकिस्तान सरकार पर विरोध को दबाने के आरोप भी लगाए गए हैं। दूसरी ओर, पाकिस्तान के अधिकारी कानून-व्यवस्था बनाए रखने की जरूरत पर जोर देते रहे हैं। इस पूरे घटनाक्रम ने पाकिस्तान के कब्जे वाले क्षेत्र में राजनीतिक असंतोष को उजागर किया है।
इमरान खान की जेल से जारी राजनीतिक खींचतान
पाकिस्तान का राजनीतिक संकट भी खत्म होता नजर नहीं आ रहा है। पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की जेल में मौजूदगी उनके समर्थकों और सरकार के बीच तनाव का बड़ा कारण बनी हुई है। पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ यानी PTI से जुड़े नेताओं और समर्थकों ने उनके खिलाफ चल रहे मामलों को राजनीतिक कार्रवाई बताया है। इमरान खान की गिरफ्तारी और उसके बाद पार्टी पर हुई कार्रवाई ने पाकिस्तान की राजनीति को लंबे समय से प्रभावित किया है। उनकी राजनीतिक स्थिति का असर सरकार और विपक्ष के संबंधों पर भी दिखाई देता है।
भारत को चेतावनी और घरेलू संकट का विरोधाभास
शहबाज शरीफ का ताजा बयान ऐसे समय आया है, जब पाकिस्तान को कई आंतरिक समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। एक तरफ सरकार भारत के साथ पानी के मुद्दे पर कड़ा रुख अपना रही है। दूसरी तरफ बलूचिस्तान में हिंसा, खैबर पख्तूनख्वा में आतंकी हमले और PoJK में राजनीतिक असंतोष सरकार के सामने बड़ी चुनौती हैं। ऐसे में शरीफ की भारत पर आक्रामक बयानबाजी के साथ पाकिस्तान की घरेलू स्थिति भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन रही है। आने वाले दिनों में सिंधु जल संधि और पाकिस्तान की आंतरिक सुरक्षा दोनों पर नजर रहेगी।