BRICS Summit 2026 : 6 साल बाद भारत आ सकते हैं शी जिनपिंग, गलवान के बाद पहली संभावित यात्रा पर सबकी नजर
BRICS Summit 2026 : सूत्रों के अनुसार, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग इस सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए भारत आ सकते हैं।
BRICS Summit 2026 : नई दिल्ली। सितंबर में दिल्ली में होने वाले BRICS शिखर सम्मेलन से पहले भारत और चीन के संबंधों को लेकर नई चर्चा शुरू हो गई है। सूत्रों के अनुसार, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग इस सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए भारत आ सकते हैं। यदि यह दौरा होता है, तो यह जून 2020 की गलवान घाटी झड़प के बाद उनकी पहली भारत यात्रा होगी। हालांकि, अभी तक नई दिल्ली और बीजिंग की ओर से इस दौरे की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। ऐसे में इस संभावित यात्रा पर दोनों देशों और अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर बनी हुई है।
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गलवान के बाद पहली संभावित भारत यात्रा
यदि शी जिनपिंग भारत आते हैं, तो यह लगभग छह वर्षों बाद उनकी पहली भारत यात्रा होगी। उनकी पिछली भारत यात्रा अक्टूबर 2019 में हुई थी। इसके कुछ महीनों बाद पूर्वी लद्दाख के गलवान क्षेत्र में भारत और चीन के सैनिकों के बीच हिंसक झड़प हुई थी।
इस घटना के बाद दोनों देशों के संबंधों में तनाव काफी बढ़ गया था। लंबे समय तक सीमा पर सैन्य गतिरोध बना रहा और दोनों देशों के बीच कई दौर की सैन्य एवं कूटनीतिक वार्ताएं हुईं। अब संभावित यात्रा को संबंधों में सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है।
BRICS समिट से पहले तेज हो सकती है कूटनीतिक गतिविधियां
सूत्रों के मुताबिक, संभावित यात्रा से पहले भारत और चीन के बीच उच्चस्तरीय कूटनीतिक बातचीत तेज हो सकती है। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल के भी उच्चस्तरीय वार्ता के लिए चीन जाने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि, इस दौरे की तारीखों की आधिकारिक घोषणा अभी नहीं हुई है।
इसके अलावा दोनों देशों के बीच सीमा मामलों पर कार्यरत 'वर्किंग मैकेनिज्म फॉर कंसल्टेशन एंड कोऑर्डिनेशन' (WMCC) की बैठक भी आने वाले समय में आयोजित हो सकती है। इन बैठकों का उद्देश्य सीमा से जुड़े लंबित मुद्दों पर संवाद जारी रखना है।
सीमा विवाद पर नए तंत्र से बढ़ सकती है बातचीत
भारत और चीन ने सीमा विवाद पर बातचीत को आगे बढ़ाने के लिए WMCC ढांचे के तहत नया विशेषज्ञ समूह और वर्किंग ग्रुप बनाने पर सहमति जताई है। यह पहल तकनीकी और कूटनीतिक स्तर पर संवाद को मजबूत करने की दिशा में अहम मानी जा रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि दोनों पक्ष नियमित बातचीत जारी रखते हैं, तो सीमा प्रबंधन से जुड़े कई मुद्दों पर प्रगति संभव हो सकती है। साथ ही भविष्य में व्यापक राजनीतिक संवाद के लिए भी सकारात्मक माहौल तैयार हो सकता है।
द्विपक्षीय बैठक पर भी रहेगी नजर
यदि शी जिनपिंग BRICS सम्मेलन में शामिल होते हैं, तो शिखर सम्मेलन के दौरान भारतीय और चीनी नेतृत्व के बीच द्विपक्षीय बैठक भी हो सकती है। ऐसी बैठक में सीमा विवाद, क्षेत्रीय सुरक्षा, व्यापार, आर्थिक सहयोग और द्विपक्षीय संबंधों को बेहतर बनाने जैसे मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है।
इसके अलावा बदलते वैश्विक हालात, अंतरराष्ट्रीय व्यापार और क्षेत्रीय स्थिरता से जुड़े विषय भी बातचीत का हिस्सा बन सकते हैं। हालांकि, इन सभी संभावित बैठकों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।
आधिकारिक घोषणा का इंतजार
फिलहाल शी जिनपिंग की भारत यात्रा को लेकर नई दिल्ली और बीजिंग की ओर से कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। इसलिए इस दौरे को अभी संभावित कार्यक्रम के रूप में ही देखा जा रहा है।
आने वाले दिनों में दोनों देशों की ओर से जारी होने वाले आधिकारिक कार्यक्रम और घोषणाएं इस यात्रा की स्थिति स्पष्ट करेंगी। यदि यह दौरा तय होता है, तो इसे भारत-चीन संबंधों में लंबे समय बाद एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक घटनाक्रम माना जाएगा।
