US- Iran War : अमेरिका ने ईरान पर फिर एयरस्ट्राइक की, बहरीन-कुवैत में मिसाइल अटैक
US- Iran War : अमेरिका और ईरान के बीच लगातार बढ़ रही सैन्य गतिविधियों ने पूरे मिडिल ईस्ट में चिंता बढ़ा दी है। दोनों देशों की ओर से लगातार बयान और कार्रवाई के दावे सामने आ रहे हैं।
US- Iran War : तेहरान। मिडिल ईस्ट में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ गया है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने गुरुवार को ईरान के कई सैन्य ठिकानों पर एयरस्ट्राइक करने की जानकारी दी। अमेरिकी सेना के अनुसार, इन हमलों में मिसाइल लॉन्च साइट, रक्षा प्रतिष्ठान और सिस्तान-बलूचिस्तान क्षेत्र में स्थित 388वीं ब्रिगेड की बैरक को निशाना बनाया गया। दूसरी ओर, ईरान ने दावा किया है कि उसने बहरीन, कुवैत और जॉर्डन में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए हैं। दोनों देशों के दावों के बीच पूरे क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है।
CENTCOM ने कई सैन्य ठिकानों पर हमले का दावा किया
अमेरिकी सेंट्रल कमांड के अनुसार, हालिया अभियान में ईरान के कई सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया। इसमें कमांड सेंटर, एयर डिफेंस सिस्टम, मिसाइल और ड्रोन से जुड़ी क्षमताओं तथा तटीय निगरानी ठिकानों पर कार्रवाई की गई।
अमेरिकी सेना ने यह भी दावा किया कि ग्रेटर तुंब द्वीप पर करीब 90 मिनट तक चले एक अलग सैन्य अभियान में तटीय रक्षा प्रणाली और क्रूज मिसाइल ठिकानों पर भी सटीक हमले किए गए। वहीं, अमेरिका ने यह भी कहा कि ईरान की ओर बढ़ रहे एक टैंकर को चेतावनी के बाद मिसाइल से रोककर निष्क्रिय किया गया।
ईरान ने जवाबी कार्रवाई का किया दावा
ईरान की सेना और रिवोल्यूशनरी गार्ड (IRGC) ने दावा किया है कि ऑपरेशन के तहत कुवैत और बहरीन में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर ड्रोन और मिसाइल हमले किए गए। ईरानी पक्ष के अनुसार, कुवैत के अली अल-सलेम एयरबेस पर रडार, एयर डिफेंस सिस्टम और अन्य सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया।
हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। इस बीच ईरान की संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने कहा कि यदि अमेरिका पीछे नहीं हटता है तो ईरान बड़े सैन्य टकराव के लिए तैयार है।
जॉर्डन और इराक में भी बढ़ी सुरक्षा
जॉर्डन की सेना ने दावा किया है कि उसने ईरान की ओर से दागी गई आठ मिसाइलों को हवा में ही मार गिराया। सरकारी एजेंसी के अनुसार, इस कार्रवाई में किसी प्रकार का नुकसान नहीं हुआ। वहीं, इराक के एरबिल शहर में पांच ड्रोन हमलों की सूचना मिली है।
स्थानीय प्रशासन के मुताबिक, एक ड्रोन अमेरिकी वाणिज्य दूतावास के पास गिराया गया, जबकि अन्य ड्रोन अमेरिकी सैन्य ठिकाने के आसपास पाए गए। इन घटनाओं के बाद पूरे क्षेत्र में सुरक्षा एजेंसियों को हाई अलर्ट पर रखा गया है।
होर्मुज जलडमरूमध्य और तेल आपूर्ति को लेकर बढ़ी चिंता
क्षेत्र में बढ़ते तनाव का असर वैश्विक समुद्री व्यापार पर भी दिखाई देने लगा है। रिपोर्टों के अनुसार, कुछ शिपिंग कंपनियां होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाज भेजने में अतिरिक्त सावधानी बरत रही हैं।
वहीं, ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड ने चेतावनी दी है कि जरूरत पड़ने पर मिडिल ईस्ट से तेल और गैस के निर्यात को प्रभावित करने जैसे कदम भी उठाए जा सकते हैं। यदि ऐसा होता है तो इसका असर अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार पर पड़ सकता है।
अन्य महत्वपूर्ण घटनाक्रम भी आए सामने
ईरान के स्वास्थ्य मंत्रालय ने दावा किया है कि हाल के अमेरिकी हवाई हमलों में 35 से अधिक लोगों की मौत हुई है। दूसरी ओर, ओमान के तट के पास हमले के बाद लापता हुए एक भारतीय नाविक की मृत्यु की पुष्टि की गई है। इसी बीच ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची कतर पहुंचे हैं।
वहीं, अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने अगले वित्त वर्ष के लिए रक्षा बजट बढ़ाकर 1.5 ट्रिलियन डॉलर करने की घोषणा की। ट्रम्प ने यह भी दावा किया कि ईरान ने हिरासत में मौजूद एक अमेरिकी नागरिक को रिहा कर दिया है। हालांकि, इस संबंध में विस्तृत जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है।
तनाव के बीच हालात पर दुनिया की नजर
अमेरिका और ईरान के बीच लगातार बढ़ रही सैन्य गतिविधियों ने पूरे मिडिल ईस्ट में चिंता बढ़ा दी है। दोनों देशों की ओर से लगातार बयान और कार्रवाई के दावे सामने आ रहे हैं। हालांकि, कई घटनाओं की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।
ऐसे में अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर अब आने वाले कूटनीतिक और सैन्य घटनाक्रम पर बनी हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखने के लिए तनाव कम करना सभी पक्षों के हित में होगा।