Jahangir Khan Wife Arrested : कोलकता। पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) के विवादित नेता जहांगीर खान की पत्नी शारिका बीबी को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। उन पर पुलिस थाने पर हमला कराने और अपने पति को पुलिस हिरासत से छुड़ाने की साजिश रचने का आरोप है। इस कार्रवाई के साथ ही राज्य में TMC नेताओं से जुड़े विवाद और ‘कट मनी’ जैसे पुराने मुद्दे फिर से चर्चा में आ गए हैं।
थाने पर हमले के मामले में हुई गिरफ्तारी
पश्चिम बंगाल पुलिस ने शनिवार सुबह दक्षिण 24 परगना जिले के जुलपिया इलाके से शारिका बीबी को गिरफ्तार किया। पुलिस के अनुसार, 17 जून को फालता पुलिस स्टेशन पर बड़ी संख्या में समर्थकों ने हमला किया था। आरोप है कि इस हमले का उद्देश्य जहांगीर खान को पुलिस हिरासत से छुड़ाना था।
भीड़ ने थाने के बाहर जमकर हंगामा किया और पुलिस पर पत्थरबाजी भी की। इस मामले में शारिका बीबी के अलावा 26 अन्य लोगों को भी गिरफ्तार किया गया है। पुलिस अब पूरे घटनाक्रम की जांच कर रही है और हमले के पीछे की साजिश का पता लगाने की कोशिश कर रही है।
जहांगीर खान पर पहले से गंभीर आरोप
जहांगीर खान पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में फालता सीट से TMC उम्मीदवार रहे थे। उन्हें 8 जून को नेपाल सीमा के पास से गिरफ्तार किया गया था। उन पर अवैध वसूली, दबाव बनाकर धन उगाही और महिलाओं को गैंगरेप की धमकी देने जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं।
गिरफ्तारी के बाद उनके दो वीडियो भी सामने आए थे। इन वीडियो में पुलिस उन्हें शहर में घुमाती हुई दिखाई दी थी। वीडियो में वह लोगों से कान पकड़कर और हाथ जोड़कर माफी मांगते नजर आए थे। इन तस्वीरों और वीडियो ने पूरे राज्य में राजनीतिक बहस को जन्म दिया था।
‘पुष्पा’ स्टाइल छवि बनाकर चर्चा में आए थे जहांगीर
फालता क्षेत्र में जहांगीर खान का लंबे समय तक प्रभाव माना जाता रहा है। चुनाव प्रचार के दौरान उन्होंने खुद को फिल्म ‘पुष्पा’ के किरदार की तरह पेश किया था। वह अक्सर फिल्म का चर्चित संवाद बोलते थे और खुद को ऐसे नेता के रूप में दिखाते थे जो किसी दबाव के सामने झुकता नहीं है। हालांकि विधानसभा चुनाव के दौरान हालात बदल गए।
चुनाव में गड़बड़ियों की शिकायतों के बाद यहां दोबारा मतदान कराया गया था। मतदान से ठीक पहले जहांगीर ने चुनावी मैदान से हटने की घोषणा कर दी थी। इसके बावजूद चुनाव परिणाम में उन्हें हार का सामना करना पड़ा और इसके बाद वह सार्वजनिक रूप से कम दिखाई दिए।
गिरफ्तारी से पहले कानूनी राहत की कोशिश
जहांगीर खान ने अपने खिलाफ दर्ज मामलों को लेकर कलकत्ता हाईकोर्ट का भी दरवाजा खटखटाया था। उन्होंने अदालत में याचिका दायर कर अपने खिलाफ दर्ज मामलों की जानकारी और गिरफ्तारी से राहत की मांग की थी। उनका कहना था कि उनके खिलाफ लगातार नए आपराधिक मामले दर्ज किए जा रहे हैं। हालांकि कानूनी प्रक्रिया के बीच पुलिस ने उन्हें नेपाल बॉर्डर के पास से गिरफ्तार कर लिया। पुलिस को आशंका थी कि वह राज्य से बाहर निकलने की कोशिश कर रहे थे।
पिछले दिनों TMC नेताओं पर जनता का गुस्सा
पश्चिम बंगाल में हाल के दिनों में कई TMC नेताओं के खिलाफ लोगों का आक्रोश देखने को मिला है। कोलकाता में गिरफ्तार एक TMC पार्षद की गाड़ी पर लोगों ने अंडे फेंके थे। वहीं कुछ वायरल वीडियो में नेताओं को लोगों के गुस्से का सामना करते हुए देखा गया। एक वीडियो में एक स्थानीय नेता कथित रूप से पुलिस और भीड़ से बचने के लिए छिपता हुआ नजर आया। दूसरे मामले में लोगों ने एक नेता का सिर मुंडवाकर उसकी सार्वजनिक परेड निकाली। इन घटनाओं ने राज्य की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है।
कूचबिहार में बिस्तर के नीचे छिपा मिला नेता
कूचबिहार जिले में भी एक TMC नेता का वीडियो काफी चर्चा में रहा। आरोप था कि उसने सरकारी आवास योजना में लाभ दिलाने के नाम पर लोगों से कमीशन लिया था। जब ग्रामीणों ने जवाब मांगा तो बड़ी संख्या में लोग उसके घर पहुंच गए। भीड़ बढ़ने पर नेता कथित रूप से घर के कमरे में जाकर बिस्तर के नीचे छिप गया। बाद में पुलिस मौके पर पहुंची और उसे सुरक्षित बाहर निकालकर थाने ले गई। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ था।
‘कट मनी’ विवाद फिर बना बड़ा मुद्दा
पश्चिम बंगाल की राजनीति में ‘कट मनी’ लंबे समय से विवाद का विषय रहा है। इसका मतलब सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने के बदले कथित तौर पर कमीशन लेना माना जाता है। भाजपा लगातार इस मुद्दे को उठाती रही है। वर्ष 2019 में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी पार्टी कार्यकर्ताओं से कहा था कि यदि किसी ने लोगों से पैसे लिए हैं तो उन्हें वापस कर देना चाहिए।
इसके बाद कई इलाकों में लोगों ने स्थानीय नेताओं से पैसे लौटाने की मांग शुरू कर दी थी। हाल ही में भी कुछ वीडियो सामने आए, जिनमें स्थानीय नेताओं पर लोगों को कथित तौर पर पैसे लौटाने का दबाव दिखाई दिया। इसी वजह से ‘कट मनी’ का मुद्दा एक बार फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गया है।