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MP Employees Promotion : MP कर्मचारियों को फिर झटका ! 2016 से अटका प्रमोशन का इंतजार हो सकता है और लंबा

MP Employees Promotion

MP Employees Promotion : भोपाल। मध्य प्रदेश के लाखों सरकारी कर्मचारियों और नई भर्ती का इंतजार कर रहे युवाओं के लिए यह निराश करने वाली खबर है। 2016 से अटका प्रमोशन मामला एक बार फिर लंबा खिंचता दिख रहा है। हाई कोर्ट में फैसला आने से पहले ही नया कानूनी पेच फंस गया है, जिसके चलते अब मामले की दोबारा सुनवाई हो सकती है।

फैसला आने से पहले ही बदल गया पूरा समीकरण

पदोन्नति के नए नियमों को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर हाई कोर्ट में सुनवाई पूरी हो चुकी थी और फैसला सुरक्षित रख लिया गया था। कर्मचारियों को उम्मीद थी कि जल्द निर्णय आ जाएगा, लेकिन सुनवाई करने वाले मुख्य न्यायाधीश संजीव सचदेवा के सुप्रीम कोर्ट जाने के बाद मामला अटक गया।

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अब नई बेंच करेगी सुनवाई

मुख्य न्यायाधीश के स्थानांतरण के बाद अब पहले नई बेंच का गठन होगा। इसके बाद मामले पर फिर से सुनवाई की प्रक्रिया शुरू होगी। ऐसे में प्रमोशन का इंतजार कर रहे कर्मचारियों को अभी और इंतजार करना पड़ सकता है।

सामान्य वर्ग की याचिकाओं से फंसा मामला

सरकार ने पदोन्नति शुरू करने के लिए नए नियम बनाए थे, लेकिन सामान्य वर्ग के कर्मचारियों ने उन पर आपत्ति जताते हुए हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कोर्ट ने 17 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था।

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10 साल से रुकी हैं पदोन्नतियां

प्रदेश में मई 2016 से नियमित पदोन्नतियां बंद हैं। पुराने प्रमोशन नियम निरस्त होने के बाद सरकार ने कई अधिकारियों-कर्मचारियों को उच्च पदों का प्रभार तो दिया, लेकिन उन्हें पदोन्नति से मिलने वाले वित्तीय लाभ नहीं मिल सके।

भर्तियों पर भी पड़ सकता है असर

प्रमोशन रुकने का असर नई भर्तियों पर भी पड़ रहा है। जब तक उच्च पद खाली नहीं होंगे, तब तक नीचे के पदों पर भर्ती प्रक्रिया पूरी रफ्तार नहीं पकड़ पाएगी। सरकार ने 2028 तक ढाई लाख भर्तियों का लक्ष्य रखा है, लेकिन प्रमोशन विवाद इस राह में बड़ी बाधा बन सकता है।

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कर्मचारियों की बढ़ी चिंता

फैसला आने की उम्मीद लगाए बैठे कर्मचारियों को अब फिर नई सुनवाई का इंतजार करना होगा। ऐसे में प्रमोशन और भर्ती दोनों से जुड़े मामलों पर अनिश्चितता बनी हुई है।

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