Hantavirus Update : नई दिल्ली। दुनिया में हंता वायरस संक्रमण के मामलों को लेकर स्वास्थ्य एजेंसियां सतर्क हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार अब तक 13 मामलों की पुष्टि हुई है, जिनमें 3 लोगों की मौत हो चुकी है। हालांकि राहत की बात यह है कि पिछले एक महीने से अधिक समय में किसी नई मौत की सूचना सामने नहीं आई है। स्वास्थ्य अधिकारियों का कहना है कि संक्रमित मरीजों के इलाज और संपर्क में आए लोगों की निगरानी लगातार की जा रही है। प्रभावित क्षेत्रों में क्वारंटीन और स्वास्थ्य जांच की प्रक्रिया भी जारी है।
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क्या है हंता वायरस?
हंता वायरस एक ऐसा वायरस समूह है जो मुख्य रूप से चूहों और अन्य कृंतक जीवों के मूत्र, मल या लार के संपर्क से फैलता है। संक्रमित जानवरों द्वारा दूषित वातावरण में मौजूद कणों के संपर्क में आने पर मनुष्य संक्रमित हो सकते हैं।
अलग-अलग प्रकार के हंता वायरस अलग-अलग बीमारियों का कारण बनते हैं। कुछ स्ट्रेन गंभीर श्वसन रोग पैदा कर सकते हैं, जिन्हें हंता वायरस पल्मोनरी सिंड्रोम (HPS) कहा जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार यह बीमारी गंभीर हो सकती है, लेकिन इसका फैलाव कोविड-19 की तरह तेज नहीं होता।
विशेषज्ञ क्यों नहीं मान रहे अगला कोविड?
स्वास्थ्य विशेषज्ञों और वायरोलॉजिस्टों का कहना है कि हंता वायरस और कोविड-19 की प्रकृति पूरी तरह अलग है। कोविड-19 हवा के माध्यम से तेजी से एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति तक फैलता था, जबकि हंता वायरस मुख्य रूप से पशुओं से मनुष्यों में फैलने वाला संक्रमण है।
दक्षिण अमेरिका में पाए जाने वाले एंडीज स्ट्रेन में सीमित परिस्थितियों में व्यक्ति से व्यक्ति संक्रमण की संभावना बताई गई है, लेकिन इसके लिए लंबे और निकट संपर्क की आवश्यकता होती है।
धीमा संक्रमण और आसान ट्रेसिंग
विशेषज्ञों के अनुसार हंता वायरस की संक्रमण श्रृंखला अपेक्षाकृत धीमी होती है। यह वायरस कोविड-19 की तुलना में कम तेजी से रूप बदलता है, जिससे इसके अचानक अत्यधिक संक्रामक बनने की संभावना कम मानी जाती है।
इसके अलावा अधिकांश मामलों में संक्रमण का स्रोत और संपर्क इतिहास स्पष्ट रहता है, जिससे संक्रमित व्यक्तियों की पहचान और संपर्क ट्रेसिंग करना अपेक्षाकृत आसान हो जाता है।
दशकों से सीमित रहे हैं प्रकोप
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिका और दक्षिण अमेरिका में हंता वायरस की निगरानी कई दशकों से की जा रही है। अब तक इसके प्रकोप स्थानीय स्तर तक ही सीमित रहे हैं और वैश्विक महामारी जैसी स्थिति देखने को नहीं मिली है। हालांकि विशेषज्ञ सतर्कता बनाए रखने और कृंतकों से बचाव के उपाय अपनाने की सलाह दे रहे हैं।
