Aayudh

Categories

Right To Die : हरीश राणा की ‘इच्छामृत्यु’ को सुप्रीम कोर्ट ने दी मंजूरी, देश का पहला मामला

Right To Die

Right To Die : नई दिल्ली। देश की सर्वोच्च अदालत सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया (Supreme Court) ने 31 वर्षीय हरीश राणा को पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छा मृत्यु की अनुमति दे दी है। हरीश पिछले करीब 13 साल से कोमा में हैं और लाइफ सपोर्ट सिस्टम के सहारे ही जीवित हैं। अदालत के इस फैसले के बाद अब उनके इलाज से जुड़े लाइफ सपोर्ट को एक तय प्रक्रिया के तहत धीरे-धीरे हटाया जा सकेगा।

यह फैसला सुप्रीम कोर्ट की दो जजों की बेंच ने सुनाया, जिसमें जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस केवी विश्वनाथन शामिल थे। अदालत ने निर्देश दिया कि हरीश राणा को ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (एम्स) के पैलियेटिव केयर विभाग में भर्ती कराया जाए, ताकि डॉक्टरों की निगरानी में मेडिकल ट्रीटमेंट को वापस लेने की प्रक्रिया पूरी की जा सके।

Share Market Today : शेयर बाजार में गिरावट, सेंसेक्स 500 अंक लुढ़का, निफ्टी 24,100 के आसपास

क्या होता है पैसिव यूथेनेशिया

पैसिव यूथेनेशिया का मतलब है कि किसी गंभीर और असाध्य बीमारी से जूझ रहे मरीज को जिंदा रखने के लिए जो कृत्रिम लाइफ सपोर्ट या इलाज दिया जा रहा है, उसे रोक दिया जाए या हटा लिया जाए।

इसके बाद मरीज प्राकृतिक रूप से मृत्यु को प्राप्त होता है। इस पूरी प्रक्रिया में मरीज की गरिमा और सम्मान का विशेष ध्यान रखा जाता है।

2013 की दुर्घटना के बाद से कोमा में

हरीश राणा मूल रूप से गाजियाबाद के रहने वाले हैं। साल 2013 में वे चंडीगढ़ में पढ़ाई कर रहे थे। इसी दौरान हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने से उनके सिर में गंभीर चोट लग गई थी।

हादसे के बाद से ही वे कोमा में हैं और तब से बिस्तर पर अचेत अवस्था में पड़े हुए हैं। लंबे समय तक बिस्तर पर रहने के कारण उनके शरीर पर कई घाव भी बन गए हैं।

Iran Israel War : युद्ध में अमेरिका के 7 सैनिकों की मौत 140 घायल, ईरान में अब तक 8000 घरों पर हमला

डॉक्टरों ने जताई ठीक होने की बेहद कम उम्मीद

एम्स की मेडिकल रिपोर्ट के अनुसार हरीश के ठीक होने की संभावना लगभग न के बराबर है। इसी वजह से उनके माता-पिता ने अदालत से पैसिव यूथेनेशिया की अनुमति देने की अपील की थी। परिवार का कहना था कि उनका बेटा 100 प्रतिशत दिव्यांग हो चुका है और इतने लंबे समय से अचेत अवस्था में है।

सुप्रीम कोर्ट की अहम टिप्पणियां

सुनवाई के दौरान अदालत ने इस मामले को बेहद संवेदनशील बताते हुए कुछ महत्वपूर्ण बातें कही-

  • हरीश राणा की मेडिकल रिपोर्ट बेहद दुखद है।
  • लाइफ सपोर्ट को धीरे-धीरे और तय योजना के तहत हटाया जाए।
  • पूरी प्रक्रिया के दौरान मरीज की गरिमा और सम्मान का पूरा ध्यान रखा जाए।

Maulana on CM Yogi Mother : कौन है मौलाना अब्दुल्ला सलीम, 83 थानों में FIR, CM योगी की मां पर की थी टिप्पणी

सुनवाई के दौरान जस्टिस पारदीवाला ने कहा कि यह अदालत के लिए बेहद कठिन फैसला है, लेकिन किसी व्यक्ति को अनंत पीड़ा में रखना भी उचित नहीं है। इसलिए अब समय आ गया है कि अंतिम निर्णय लिया जाए।

इस फैसले के साथ ही अदालत ने स्पष्ट किया कि पूरी प्रक्रिया मेडिकल विशेषज्ञों की निगरानी में और पूरी संवेदनशीलता के साथ पूरी की जाएगी, ताकि मरीज की गरिमा बनी रहे।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *