Weight Loss Tips : आजकल कई लोग बिना ज्यादा खाना खाए भी तेजी से वजन बढ़ने या हर समय थकान महसूस होने की शिकायत करते हैं। अक्सर लोग इसे सामान्य कमजोरी समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन इसके पीछे एक बड़ी वजह स्लो मेटाबॉलिज्म (slow metabolism) हो सकती है। मेडिकल भाषा में मेटाबॉलिज्म वह प्रक्रिया है, जिसके जरिए हमारा शरीर भोजन और पेय पदार्थों को ऊर्जा में बदलता है। जब यह प्रक्रिया धीमी हो जाती है, तो शरीर कैलोरी को जलाने की बजाय उसे फैट के रूप में जमा करने लगता है।
मेदांता हॉस्पिटल के इमरजेंसी हेड डॉ. लोकेंद्र गुप्ता के अनुसार मेटाबॉलिज्म का सीधा असर हमारे पूरे शरीर पर पड़ता है। यदि किसी व्यक्ति का मेटाबॉलिक रेट धीमा हो जाए, तो यह केवल वजन बढ़ने तक सीमित नहीं रहता बल्कि शरीर के कई महत्वपूर्ण कार्यों को प्रभावित करने लगता है।
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स्लो मेटाबॉलिज्म के प्रमुख लक्षण
विशेषज्ञों के अनुसार इसके लक्षण अक्सर स्पष्ट होते हैं, लेकिन लोग उन्हें सामान्य समस्या समझकर टाल देते हैं। सबसे बड़ा संकेत है बिना किसी खास वजह के वजन का तेजी से बढ़ना या जिम और डाइटिंग के बावजूद वजन कम न होना।
इसके अलावा शरीर भोजन से पर्याप्त ऊर्जा नहीं बना पाता, जिससे व्यक्ति हमेशा थका हुआ और कमजोर महसूस करता है। त्वचा का रूखा होना, बालों का ज्यादा झड़ना और पाचन संबंधी समस्याएं जैसे कब्ज भी इसके संकेत हो सकते हैं।
धीमा मेटाबॉलिज्म शरीर की आंतरिक गर्मी बनाने की क्षमता को भी कम कर देता है। ऐसे में सामान्य तापमान में भी व्यक्ति को दूसरों की तुलना में ज्यादा ठंड महसूस होती है। मानसिक रूप से भी इसका असर दिखाई देता है, जिसे “ब्रेन फॉग” कहा जाता है। इसमें ध्यान लगाने में कठिनाई, भूलने की आदत और चिड़चिड़ापन बढ़ सकता है।
अगर इस स्थिति पर समय रहते ध्यान न दिया जाए तो यह आगे चलकर इंसुलिन रेजिस्टेंस का कारण बन सकती है, जिससे डायबिटीज (Diabetes) और थायरॉइड (Thyroid) जैसी समस्याओं का खतरा बढ़ जाता है।
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मेटाबॉलिज्म तेज करने के आसान तरीके
हेल्थ एक्सपर्ट्स के मुताबिक मेटाबॉलिज्म को बेहतर बनाने के लिए जीवनशैली में कुछ जरूरी बदलाव करना बेहद जरूरी है।
सबसे पहले संतुलित आहार और पर्याप्त पानी पीना जरूरी है। शरीर में पानी की कमी होने से मेटाबॉलिज्म धीमा पड़ सकता है। इसके अलावा नियमित व्यायाम भी बेहद जरूरी है।
विशेष रूप से स्ट्रेंथ ट्रेनिंग और हाई-इंटेंसिटी एक्सरसाइज शरीर की मांसपेशियों को मजबूत बनाती है, जो आराम की स्थिति में भी अधिक कैलोरी जलाने में मदद करती हैं।
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नींद भी मेटाबॉलिज्म को प्रभावित करने वाला एक अहम कारक है। कम या अधूरी नींद शरीर के हार्मोन संतुलन को बिगाड़ देती है, जिससे भूख नियंत्रित करने वाले हार्मोन प्रभावित होते हैं और वजन बढ़ने लगता है।
विशेषज्ञों के अनुसार हर व्यक्ति को रोजाना कम से कम 7 से 8 घंटे की गहरी नींद लेना जरूरी है। संतुलित आहार, नियमित व्यायाम, पर्याप्त पानी और अच्छी नींद जैसी आदतों को अपनाकर मेटाबॉलिज्म को बेहतर बनाया जा सकता है। इससे न सिर्फ वजन नियंत्रित रहता है बल्कि शरीर भी लंबे समय तक स्वस्थ और ऊर्जावान बना रहता है।