Petrol Diesel Price Hike : नई दिल्ली। मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव का असर अब वैश्विक ऊर्जा बाजार पर साफ दिखाई देने लगा है। कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) की कीमतें बढ़कर करीब 84 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गई हैं, जो लगभग एक साल के उच्च स्तर के आसपास है। पिछले 5 दिनों में क्रूड करीब 20% महंगा हुआ है, जबकि 3 महीनों में इसकी कीमत 34% तक बढ़ चुकी है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर हालात ऐसे ही बने रहे तो इसका असर भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर भी पड़ सकता है।
90 से 100 डॉलर तक जा सकता है क्रूड
ब्रोकरेज फर्म Citigroup का मानना है कि कच्चे तेल की कीमतें आगे 90 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती हैं। अगर ईरान से जुड़ा तनाव लंबा चलता है या क्षेत्र में अस्थिरता बनी रहती है तो तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंची रह सकती हैं। हालांकि यदि हालात जल्द सामान्य होते हैं तो कीमतें फिर से 70 डॉलर प्रति बैरल के आसपास आ सकती हैं।
वहीं निवेश बैंक Goldman Sachs ने चेतावनी दी है कि अगर Strait of Hormuz से तेल की सप्लाई अगले पांच हफ्तों तक प्रभावित रहती है तो ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकता है।
यह समुद्री रास्ता बेहद अहम है क्योंकि दुनिया के करीब 20% तेल की सप्लाई इसी रास्ते से गुजरती है। भारत भी अपने कुल कच्चे तेल आयात का 40% से ज्यादा हिस्सा इसी मार्ग से मंगाता है।
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पेट्रोल-डीजल महंगे होने की आशंका
कमोडिटी विशेषज्ञ अजय केडिया के अनुसार आने वाले दिनों में पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढ़ने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। इसकी कई वजहें बताई जा रही हैं।
पहली वजह मिडिल ईस्ट में बढ़ता तनाव है, जिसके कारण कच्चे तेल की कीमतें लगातार ऊपर जा रही हैं। दूसरी वजह डॉलर की मजबूती और रुपये की कमजोरी है। डॉलर इंडेक्स करीब 99 के स्तर पर पहुंच गया है, जबकि रुपया लगभग 92.50 प्रति डॉलर के स्तर तक गिर गया है।
तीसरी वजह यह है कि भारत को अब ईरान और रूस के अलावा Venezuela जैसे देशों से भी तेल खरीदना पड़ रहा है, जिसका खर्च ज्यादा पड़ता है। इसके साथ ही वहां से आने वाले तेल का इंश्योरेंस प्रीमियम भी ज्यादा है।
LNG सप्लाई में कटौती, CNG-PNG महंगे हो सकते हैं
ऊर्जा बाजार में संकट सिर्फ कच्चे तेल तक सीमित नहीं है। गैस सप्लाई पर भी असर पड़ रहा है। भारत को गैस देने वाला बड़ा देश Qatar फिलहाल अपने LNG प्लांट का उत्पादन रोक चुका है। इसके कारण भारत आने वाली गैस की सप्लाई में करीब 40% तक कटौती की गई है।
भारत अपनी जरूरत की लगभग 40% LNG कतर से आयात करता है। विदेश से आने वाली LNG को गैस में बदलकर ही CNG और PNG की सप्लाई की जाती है। सप्लाई कम होने की स्थिति में सिटी गैस कंपनियों ने चेतावनी दी है कि आने वाले समय में इनकी कीमतें भी बढ़ सकती हैं।
होर्मुज जलडमरूमध्य बना बड़ी चुनौती
भारत के लिए सबसे बड़ी चिंता स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का असुरक्षित होना है। यह संकरा समुद्री रास्ता है जिससे होकर कतर और यूएई जैसे देश तेल और गैस निर्यात करते हैं। हालात का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि 28 फरवरी को जहां इस रास्ते से 91 जहाज गुजरे थे, वहीं अब यह संख्या घटकर 26 जहाज रह गई है।
बिजली और खाद उत्पादन पर भी असर
LNG का इस्तेमाल सिर्फ वाहनों और घरों में ही नहीं होता, बल्कि इससे बिजली उत्पादन और खाद बनाने का काम भी होता है। अगर गैस की सप्लाई लंबे समय तक प्रभावित रहती है तो गैस आधारित पावर प्लांट्स की बिजली महंगी हो सकती है। वहीं उर्वरक उद्योग में भी गैस की कमी से खाद उत्पादन प्रभावित होने की आशंका है।
विशेषज्ञों का कहना है कि अगर मिडिल ईस्ट में तनाव जल्दी खत्म नहीं हुआ, तो इसका असर आने वाले महीनों में भारत के ऊर्जा बाजार और आम लोगों की जेब पर भी दिखाई दे सकता है।