Stock Market Crash : मिडिल ईस्ट में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और अमेरिका-इजरायल व ईरान के बीच जारी युद्ध का असर सोमवार को भारतीय शेयर बाजार पर साफ दिखाई दिया। सप्ताह के पहले कारोबारी दिन बाजार बड़ी गिरावट के साथ लाल निशान में खुला। शुरुआती कारोबार में 30 शेयरों वाला बीएसई सेंसेक्स करीब 1000 अंक लुढ़क गया, जबकि एनएसई निफ्टी भी 300 अंकों से ज्यादा टूटकर खुला।
सुबह लगभग 9:25 बजे सेंसेक्स 1043.10 अंक यानी 1.28 प्रतिशत गिरकर 80,244.09 पर ट्रेड कर रहा था। वहीं निफ्टी 309.70 अंक यानी 1.23 प्रतिशत की गिरावट के साथ 24,868.95 के स्तर पर पहुंच गया।
निफ्टी के सभी सेक्टोरल इंडेक्स लाल निशान में कारोबार करते दिखे। सेंसेक्स के 30 शेयरों में से केवल भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL) हरे निशान में रहा, बाकी सभी शेयरों में गिरावट दर्ज की गई।
मिडकैप-स्मॉलकैप में ज्यादा दबाव
व्यापक बाजार का प्रदर्शन बेंचमार्क से भी कमजोर रहा। निफ्टी मिडकैप 1.36 प्रतिशत और निफ्टी स्मॉलकैप 1.86 प्रतिशत तक टूट गए। सेक्टर के लिहाज से निफ्टी रियल्टी सबसे ज्यादा दबाव में रहा और इसमें 2 प्रतिशत से अधिक की गिरावट आई।
निफ्टी मीडिया भी नुकसान झेलने वाले प्रमुख सेक्टरों में शामिल रहा। हालांकि निफ्टी मेटल में अपेक्षाकृत कम गिरावट दर्ज की गई और यह सबसे बेहतर प्रदर्शन करने वाला इंडेक्स रहा।
युद्ध और वैश्विक अनिश्चितता का असर
अमेरिका-इजरायल के संयुक्त सैन्य अभियान में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के सख्त रुख से हालात और तनावपूर्ण हो गए हैं।
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संघर्ष जारी रहने की आशंका से वैश्विक बाजारों में भी दबाव बना हुआ है। इक्विटी मार्केट में गिरावट के बीच सुरक्षित निवेश माने जाने वाले सोने-चांदी की कीमतों में तेजी देखने को मिल रही है।
FII की बिकवाली, DII का सहारा
मार्केट एक्सपर्ट्स के मुताबिक पिछले कारोबारी सत्र में विदेशी संस्थागत निवेशक (FII) 3,465 करोड़ रुपए की बिकवाली करते हुए नेट सेलर रहे, जबकि घरेलू संस्थागत निवेशक (DII) ने 5,000 करोड़ रुपए से ज्यादा की खरीदारी की और बाजार को कुछ सहारा दिया।
निफ्टी के अहम स्तर
चॉइस इक्विटी ब्रोकिंग प्राइवेट लिमिटेड के रिसर्च एनालिस्ट हितेश टेलर के अनुसार निफ्टी के लिए 25,600-25,650 का स्तर तात्कालिक रेजिस्टेंस है, जबकि 25,300-25,350 सपोर्ट जोन रहेगा। आरएसआई 47.11 पर है, जो फिलहाल न्यूट्रल मोमेंटम का संकेत देता है।
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निवेशकों के लिए सलाह
विशेषज्ञों का कहना है कि वैश्विक अनिश्चितता और बढ़ी अस्थिरता के बीच ट्रेडर्स को सोच-समझकर रणनीति बनानी चाहिए। गिरावट के दौरान मजबूत फंडामेंटल वाले शेयरों पर फोकस करना बेहतर रहेगा। निफ्टी में 25,800 के ऊपर टिकाऊ ब्रेकआउट के बाद ही नई लंबी पोजीशन लेना सुरक्षित माना जा रहा है।
कुल मिलाकर, मिडिल ईस्ट के हालात का असर भारतीय बाजार पर साफ दिख रहा है और आने वाले दिनों में भी उतार-चढ़ाव बने रहने की संभावना है।