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Yuva Vidhayak Sammelan 2026 : MP- CG विभाजन पर फूट- फूटकर रोये थे कांग्रेस – बीजेपी विधायक

Yuva Vidhayak Sammelan 2026

Yuva Vidhayak Sammelan 2026 : मध्य प्रदेश। राजधानी भोपाल में आयोजित मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान के युवा विधायकों का दो दिवसीय प्रशिक्षण सम्मेलन भले ही विकास और नीतियों पर चर्चा के लिए था, लेकिन समापन सत्र में एक ऐसा भावुक पल सामने आया, जिसने सभी को पुराने दिनों की याद दिला दी।

मध्य प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर (Narendra Singh Tomar) ने अपने संबोधन में उस समय को याद किया, जब छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश से अलग हुआ था। उन्होंने बताया कि उस दौरान कांग्रेस और बीजेपी दोनों ही दलों के विधायक फूट-फूटकर रो पड़े थे।

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तोमर ने कहा कि बंटवारे के उस दिन सदन का माहौल बेहद भावुक था और लगभग सभी विधायकों की आंखों में आंसू थे। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ एक प्रशासनिक फैसला नहीं था, बल्कि भावनाओं से जुड़ा हुआ पल था, जिसे आज भी भुलाया नहीं जा सकता।

उन्होंने यह भी कहा कि भले ही आज मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ अलग-अलग राज्य हैं, लेकिन दोनों के बीच का जुड़ाव और आत्मीयता आज भी पहले जैसा ही मजबूत है।

दो दिन चला मंथन

इस सम्मेलन में विधायकों ने कई अहम मुद्दों पर खुलकर चर्चा की। इसमें टेक्नोलॉजी का उपयोग, स्वच्छता अभियान को आगे बढ़ाना, सोलर एनर्जी को बढ़ावा देना, शिक्षा की गुणवत्ता सुधारना और बुनियादी ढांचे के विकास जैसे विषय शामिल रहे।

विकसित भारत पर चर्चा

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश नारायण सिंह (Harivansh Narayan Singh) भी शामिल हुए। उन्होंने मध्य प्रदेश विधानसभा की त्रैमासिक पत्रिका का विमोचन किया।

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अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि विकसित भारत का सपना साकार करने में समय लगा है, लेकिन आज देश दुनिया की तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में शामिल हो चुका है। उन्होंने कहा कि सीमित संसाधनों के बावजूद भारत ने मजबूत नीतियों और संकल्प के दम पर बड़ी उपलब्धियां हासिल की हैं।

ऊर्जा संकट के बीच भारत मजबूत

हरिवंश नारायण सिंह ने बताया कि भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है, जिसमें कच्चा तेल, गैस और उर्वरक शामिल हैं। देश लगभग 60 प्रतिशत एलपीजी भी बाहर से मंगाता है।

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इसके बावजूद भारत ने ऊर्जा स्रोतों में विविधता लाकर और भंडारण क्षमता बढ़ाकर खुद को मजबूत बनाया है। उन्होंने कहा कि पहले जहां एलपीजी की आपूर्ति 27 देशों से होती थी, अब यह बढ़कर 41 देशों से होने लगी है। इससे देश की ऊर्जा सुरक्षा और ज्यादा मजबूत हुई है।

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