War Effects on Pakistan : इस्लामाबाद। मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल का असर अब पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था और आम लोगों की जिंदगी पर साफ दिखाई देने लगा है। बढ़ती तेल कीमतों के बीच पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ (PM Shehbaz Sharif) ने सरकारी खर्चों में कटौती और ईंधन बचाने के लिए कई सख्त कदमों की घोषणा की है।
सरकारी दफ्तर सप्ताह में सिर्फ चार दिन खुलेंगे
सरकार के नए फैसले के अनुसार अब सरकारी कार्यालय सप्ताह में केवल चार दिन ही खुलेंगे। बैंकों को छोड़कर बाकी विभागों में आधे कर्मचारियों को वर्क फ्रॉम होम करने का निर्देश दिया गया है। इसके साथ ही सरकारी विभागों को अपने खर्चों में कम से कम 20 प्रतिशत की कटौती करने को कहा गया है।
सरकार ने यह भी फैसला किया है कि अगले दो महीनों तक मंत्रियों और सलाहकारों के विदेश दौरे पूरी तरह रोक दिए जाएंगे। मंत्री दो महीने तक वेतन नहीं लेंगे, जबकि सांसदों की सैलरी में 25 प्रतिशत तक कटौती की जाएगी।
स्कूल दो हफ्ते बंद, पढ़ाई होगी ऑनलाइन
ऊर्जा बचत के लिए सरकार ने शिक्षा क्षेत्र में भी बड़ा फैसला लिया है। देशभर के स्कूलों को दो सप्ताह के लिए बंद किया जा रहा है। इसके बाद कॉलेज और विश्वविद्यालयों की उच्च कक्षाओं की पढ़ाई ऑनलाइन कराई जाएगी, ताकि लोगों की आवाजाही कम हो और ईंधन की बचत हो सके।
सरकारी वाहनों पर भी सख्ती
सरकार ने सरकारी गाड़ियों के उपयोग पर भी सख्त नियम लागू किए हैं। अगले दो महीनों तक सरकारी वाहनों को मिलने वाला ईंधन 50 प्रतिशत तक कम कर दिया गया है। इसके अलावा करीब 60 प्रतिशत सरकारी वाहन नहीं चलाए जाएंगे।
पेट्रोल-डीजल की कीमतों में भारी बढ़ोतरी
बढ़ती अंतरराष्ट्रीय कीमतों के कारण पाकिस्तान ने पेट्रोल और डीजल के दामों में करीब 20 प्रतिशत की बढ़ोतरी कर दी है। इसके तहत पेट्रोल और डीजल की कीमतों में करीब 55 पाकिस्तानी रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी हुई है।
नई कीमतों के बाद पाकिस्तान में पेट्रोल लगभग 335.86 पाकिस्तानी रुपये प्रति लीटर और डीजल करीब 321.17 रुपये प्रति लीटर के स्तर पर पहुंच गया है। कीमतें बढ़ने की खबर के बाद लाहौर और कराची जैसे बड़े शहरों में पेट्रोल पंपों पर लंबी कतारें देखने को मिलीं।
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रमजान में बढ़ी महंगाई
इस बीच रमजान के दौरान पाकिस्तान में फल और सब्जियों के दाम भी तेजी से बढ़ रहे हैं। बाजार में कई चीजें सरकारी रेट से ज्यादा कीमत पर बिक रही हैं। उदाहरण के तौर पर केले, अनार, सेब और अदरक जैसी रोजमर्रा की चीजों की कीमतों में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जिससे आम लोगों की परेशानियां और बढ़ गई हैं।
तेल संकट की वजह
विशेषज्ञों के मुताबिक मिडिल ईस्ट में जारी ईरान-इजरायल संघर्ष (Iran–Israel Conflict) और खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते तनाव के कारण वैश्विक तेल बाजार प्रभावित हुआ है। खास तौर पर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) से गुजरने वाली तेल आपूर्ति में अनिश्चितता बढ़ने से कीमतों में उछाल आया है। इसी कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गई है।
पड़ोसी देशों पर भी असर
तेल संकट का असर सिर्फ पाकिस्तान तक सीमित नहीं है। बांग्लादेश में भी सरकार को ईंधन की बिक्री पर लिमिट लगानी पड़ी है। वहां मोटरसाइकिल के लिए दिन में सिर्फ 2 लीटर और निजी कारों के लिए अधिकतम 10 लीटर पेट्रोल की सीमा तय की गई है।
भारत में फिलहाल राहत
हालांकि भारत में फिलहाल पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी की संभावना कम बताई जा रही है। सरकारी सूत्रों के मुताबिक जब तक अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत 130 डॉलर प्रति बैरल के पार नहीं जाती, तब तक घरेलू बाजार में कीमतें स्थिर रहने की उम्मीद है।
कुल मिलाकर मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और तेल की महंगी कीमतों ने पाकिस्तान की पहले से कमजोर अर्थव्यवस्था पर नया दबाव डाल दिया है। आने वाले दिनों में हालात और चुनौतीपूर्ण हो सकते हैं।