Trump Tariff Dispute : नई दिल्ली। भारत और अमेरिका के अधिकारियों के बीच इस हफ्ते होने वाली अंतरिम ट्रेड डील पर चर्चा की तीन दिन की बैठक फिलहाल टाल दी गई है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक यह फैसला अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के उस आदेश के बाद लिया गया है, जिसमें पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा टैरिफ लगाने के लिए इमरजेंसी पावर के इस्तेमाल को रद्द कर दिया गया। इस फैसले के बाद अमेरिकी प्रशासन को नए कानूनी विकल्प तलाशने पड़े हैं।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले से बढ़ी कानूनी उलझन
अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद टैरिफ दरों को लेकर अनिश्चितता की स्थिति बन गई है। फिलहाल अमेरिकी प्रशासन 1974 के ट्रेड एक्ट के सेक्शन 122 का इस्तेमाल कर रहा है, लेकिन साथ ही सेक्शन 338 जैसे अन्य कानूनी प्रावधानों पर भी विचार किया जा रहा है। इससे भविष्य की व्यापार वार्ता पर असर पड़ सकता है और दोनों देशों के बीच बातचीत और जटिल हो सकती है।
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मार्च में होने वाली साइनिंग की योजना पर असर
आने वाले दिनों में होने वाली यह बैठक अंतरिम द्विपक्षीय व्यापार समझौते के कानूनी मसौदे को अंतिम रूप देने के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही थी। इसी के आधार पर मार्च में अमेरिकी ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव जैमीसन ग्रीर के भारत दौरे और समझौते पर हस्ताक्षर की उम्मीद थी। बैठक टलने से अब पूरा कार्यक्रम अनिश्चित हो गया है।
आपसी सहमति से आगे तय होगी नई तारीख
सूत्रों के मुताबिक दोनों देशों का मानना है कि नई परिस्थितियों और उनके प्रभाव को समझने के बाद ही भारतीय मुख्य वार्ताकार और उनकी टीम का दौरा तय किया जाए। इसलिए बैठक को आपसी सहमति से आगे की तारीख पर आयोजित किया जाएगा।
टैरिफ दरों में लगातार बदलाव
भारतीय सामान पर पहले टैरिफ 50 प्रतिशत तक पहुंच गया था, जो बाद में घटकर 25 प्रतिशत और फिर 18 प्रतिशत करने का वादा किया गया। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद यह दर 10 प्रतिशत तक आ गई थी, लेकिन नए आदेश के तहत इसे बढ़ाकर 15 प्रतिशत कर दिया गया है। भारत के लिए यह दर पहले घोषित 18 प्रतिशत से कम और 26 प्रतिशत के पुराने स्तर से काफी नीचे है।
अमेरिका के अगले कदमों के संकेत
अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने संकेत दिया है कि टैरिफ नीति को जारी रखने के लिए प्रशासन सेक्शन 232, 301 और 122 जैसे अन्य कानूनी रास्तों का इस्तेमाल करेगा। रिपोर्ट्स में यह भी कहा जा रहा है कि सेक्शन 338 के तहत टैरिफ को 50 प्रतिशत तक बढ़ाने का विकल्प भी खुला है।
भारत सरकार कर रही असर का अध्ययन
भारत के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय ने कहा है कि वह अमेरिकी फैसले और उसके बाद उठाए गए कदमों के असर का बारीकी से अध्ययन कर रहा है। सरकार का कहना है कि सभी घटनाक्रमों को समझने के बाद ही आगे की रणनीति तय की जाएगी।
कुल मिलाकर, अमेरिकी कानूनी फैसलों और बदलती टैरिफ नीति के चलते भारत-अमेरिका के बीच प्रस्तावित अंतरिम ट्रेड डील की प्रक्रिया फिलहाल धीमी पड़ गई है और नई तारीख का इंतजार किया जा रहा है।