Surya Grahan 2026 : सूर्य ग्रहण हमेशा अमावस्या तिथि पर लगता है। 17 फरवरी 2026 को फाल्गुन माह की अमावस्या के दिन साल का पहला सूर्य ग्रहण लगेगा। यह ग्रहण कुंभ राशि और धनिष्ठा नक्षत्र में होगा। यह वलयाकार सूर्य ग्रहण है, जिसे विज्ञान की भाषा में ‘रिंग ऑफ फायर’ कहा जाता है। हालांकि यह ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा और इसका सूतक काल भी भारत में मान्य नहीं होगा, फिर भी इसे लेकर लोगों में जिज्ञासा बनी हुई है।
क्या है ‘रिंग ऑफ फायर’?
NASA के अनुसार, जब चंद्रमा पृथ्वी से अपनी अधिकतम दूरी पर होता है और उसी समय सूर्य ग्रहण लगता है, तो चंद्रमा सूर्य को पूरी तरह ढक नहीं पाता। इस स्थिति में सूर्य का बीच का भाग ढका हुआ दिखाई देता है, जबकि चारों ओर रोशनी की चमकदार पतली रिंग नजर आती है।
यह दृश्य आग की अंगूठी जैसा प्रतीत होता है, इसलिए इसे ‘रिंग ऑफ फायर’ कहा जाता है। वलयाकार ग्रहण के दौरान सूर्य, चंद्रमा और पृथ्वी एक सीध में होते हैं।
Rajpal Yadav Bail : राजपाल यादव को दिल्ली हाईकोर्ट से राहत,18 मार्च तक मिली अंतरिम जमानत
ज्योतिष के अनुसार क्यों है विशेष?
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार यह ग्रहण इसलिए विशेष माना जा रहा है क्योंकि यह शनि देव की राशि कुंभ में लग रहा है। इस दौरान सूर्य के साथ राहु, बुध, शुक्र और चंद्रमा भी इसी राशि में रहेंगे।
सूर्य और राहु की युति को ग्रहण योग कहा जाता है, जिसे पारंपरिक रूप से अशुभ माना जाता है। इसलिए इस ग्रहण को ज्योतिषीय दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
सूर्य ग्रहण का समय (भारत के अनुसार)
भारतीय समयानुसार सूर्य ग्रहण 17 फरवरी को दोपहर 3 बजकर 26 मिनट पर शुरू होगा और शाम 7 बजकर 57 मिनट पर समाप्त होगा। यह ग्रहण कुल 4 घंटे 32 मिनट तक रहेगा। हालांकि यह भारत में दिखाई नहीं देगा, इसलिए यहां सूतक काल प्रभावी नहीं माना जाएगा।
सूर्य ग्रहण के दौरान क्या न करें?
गर्भवती महिलाएं रखें विशेष सावधानी
मान्यता है कि ग्रहण काल में गर्भवती महिलाओं को विशेष सतर्कता बरतनी चाहिए। इस दौरान बाहर निकलने, सुई-धागा, कैंची या नुकीली वस्तुओं के उपयोग से बचने की सलाह दी जाती है। साथ ही ग्रहण की छाया से दूर रहने की भी परंपरागत मान्यता है।
पूजा स्थल को न छुएं
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार ग्रहण के समय मंदिर या पूजा घर की मूर्तियों को स्पर्श नहीं करना चाहिए और मंदिर को बंद रखना चाहिए। ऐसा करने से नकारात्मक प्रभाव से बचाव माना जाता है।
Rajasthan Chemical Factory Fire : राजस्थान में केमिकल फैक्ट्री में भयंकर आग, 7 कर्मचारी जिंदा जले
सुनसान जगहों पर न जाएं
मान्यता है कि ग्रहण काल में नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव बढ़ जाता है। इसलिए श्मशान या सुनसान स्थानों पर अकेले जाने से बचना चाहिए और घर पर रहकर ईश्वर का ध्यान करना चाहिए।
शुभ कार्य से बचें
ग्रहण के दौरान सिलाई, कढ़ाई, बाल और नाखून काटना वर्जित माना गया है। साथ ही कोई भी शुभ कार्य इस अवधि में नहीं करना चाहिए।
मान्यता है कि ग्रहण के समय किसी गरीब या असहाय व्यक्ति का अपमान नहीं करना चाहिए। इस दौरान घर में शांति बनाए रखना शुभ माना गया है।
Bhullar Bail Rejected : रिश्वतखोर DIG भुल्लर जेल में ही रहेंगे, हाई कोर्ट से बड़ा झटका
सूर्य ग्रहण में क्या करें?
गर्भवती महिलाएं रखें नारियल पास
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार गर्भवती महिलाओं को ग्रहण काल में अपने पास नारियल रखना चाहिए और घर के अंदर ही रहना चाहिए।
मंत्र जाप और ध्यान करें
ग्रहण काल में मानसिक रूप से पूजा, ध्यान और मंत्र जाप करना शुभ माना गया है। इससे सकारात्मक ऊर्जा और मानसिक शांति मिलती है।
Mahesh Babu Film 2026 : महेश बाबू ने ‘नागबंधम’ का भव्य टीजर किया लॉन्च
ग्रहण के बाद क्या करें?
स्नान और शुद्धिकरण
ग्रहण समाप्त होने के बाद स्नान करना चाहिए और घर में गंगाजल का छिड़काव करना चाहिए। इसके बाद भगवान की पूजा और दान-पुण्य करना शुभ माना गया है।
भोजन में तुलसी का प्रयोग
मान्यता है कि ग्रहण के दौरान भोजन दूषित हो सकता है। इसलिए ग्रहण शुरू होने से पहले पके हुए भोजन में तुलसी के पत्ते रखने की परंपरा है, जिससे भोजन शुद्ध माना जाता है।