HIGHLIGHTS:
- पति-पत्नी दोनों को घरेलू काम में हाथ बंटाना जरूरी
- खाना न बनाना या घर का काम न करना तलाक का कारण नहीं
- फैमिली कोर्ट ने तलाक दिया था, हाई कोर्ट ने रद्द किया
- सुप्रीम कोर्ट ने आधुनिक विवाह में समान जिम्मेदारी पर जोर दिया
- अगली सुनवाई में दोनों पक्षों को व्यक्तिगत रूप से पेश होना होगा
SUPREME COURT ORDER : नाई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने एक वैवाहिक विवाद में कहा कि पति-पत्नी दोनों को घरेलू कामों में सहयोग करना चाहिए। जस्टिस संदीप मेहता ने कहा, आप किसी नौकरानी से शादी नहीं कर रहे, आप जीवनसाथी से शादी कर रहे हैं।
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क्रूरता के आधार पर तलाक नहीं
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि पत्नी द्वारा खाना न बनाना या घर का काम ठीक से न करना तलाक का कारण नहीं बन सकता। जस्टिस विक्रम नाथ ने भी कहा कि आज का समय बदल गया है और पति को भी घरेलू कामों में मदद करनी चाहिए।
क्या है पूरा मामला
दरअसल याचिकाकर्ता-पति ने दावा किया कि शादी के सिर्फ एक हफ्ते बाद पत्नी का व्यवहार बदल गया और उसने गंदी भाषा का इस्तेमाल करना शुरू कर दिया। पति का कहना है कि उसने खाना बनाने से मना किया और बच्चे की पालना रस्म में हिस्सा नहीं लिया।
फैमिली कोर्ट और हाई कोर्ट का फैसला
फैमिली कोर्ट ने पति की याचिका स्वीकार कर तलाक दे दिया, लेकिन हाई कोर्ट ने आदेश रद्द कर दिया। इसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा।
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आधुनिक विवाह में समान जिम्मेदारी
सुप्रीम कोर्ट ने दोनों पक्षों को अगली सुनवाई में व्यक्तिगत रूप से पेश होने का आदेश दिया और आधुनिक वैवाहिक रिश्तों पर अहम संदेश दिया: घर के कामों में पति-पत्नी दोनों का योगदान जरूरी है।