Aayudh

Categories

Supreme Court Decision : पायजामे का नाड़ा ढीला करना रेप की कोशिश… SC ने हाई कोर्ट का विवादित फैसला पलटा

Supreme Court Decision

Supreme Court Decision : नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के उस विवादित फैसले को रद्द कर दिया है, जिसमें कहा गया था कि महिला के पायजामे का नाड़ा ढीला करना रेप की कोशिश नहीं बल्कि रेप की तैयारी माना जाएगा।

शीर्ष अदालत ने साफ किया कि किसी महिला को गलत तरीके से छूना और उसके कपड़े खोलने की कोशिश करना रेप के प्रयास की श्रेणी में आएगा। कोर्ट के इस फैसले को महिलाओं की सुरक्षा और न्याय की दिशा में अहम माना जा रहा है।

HC के फैसले पर मचा था देशभर में विवाद

17 मार्च 2025 को आए इलाहाबाद हाई कोर्ट के फैसले के बाद देशभर में तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली थी। इस मामले में एनजीओ ‘We The Women of India’ की फाउंडर और वरिष्ठ अधिवक्ता शोभा गुप्ता ने पत्र लिखकर सुप्रीम कोर्ट से हस्तक्षेप की मांग की थी, जिसके बाद शीर्ष अदालत ने स्वतः संज्ञान लिया।

MP Budget 2026 : वित्तमंत्री की बजट में बड़ी घोषणाएं, विपक्ष बोला- वित्तीय घाटे के बाद कैसे होंगी पूरी?

तीन जजों की पीठ ने सुनाया फैसला

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस एन वी अंजारिया की पीठ ने हाई कोर्ट के फैसले को निरस्त करते हुए POCSO एक्ट के तहत सजा का रास्ता साफ किया।

जजों में संवेदनशीलता जरूरी – SC

पीठ ने अपने फैसले में कहा कि यौन अपराधों से जुड़े मामलों की सुनवाई के दौरान न्यायाधीशों में संवेदनशीलता बेहद जरूरी है। वरिष्ठ अधिवक्ता एच एस फुल्का और शोभा गुप्ता की अपीलों का उल्लेख करते हुए कोर्ट ने कहा कि अगर न्याय व्यवस्था पीड़ित की वास्तविक स्थिति और अदालत तक पहुंचने में आने वाली कठिनाइयों को नजरअंदाज करती है तो न्याय की उम्मीद अधूरी रह जाती है।

MP Budget 2026 : बजट में लाड़ली बहनों को 23,882 करोड़ तो लाड़ली लक्ष्मी के लिए 1,852 करोड़ का प्रावधान

फैसलों में दिखनी चाहिए दया, इंसानियत और समझ

फैसला लिखते हुए मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि न्याय केवल कानूनी सिद्धांतों के सही इस्तेमाल तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि उसमें दया, इंसानियत और समझ की भावना भी झलकनी चाहिए।

कोर्ट ने यह भी कहा कि न्यायिक प्रक्रिया के हर चरण में आम नागरिकों के अनुभव को ध्यान में रखना जरूरी है, तभी न्यायिक संस्थाएं अपनी जिम्मेदारी सही तरीके से निभा पाएंगी। इस फैसले को यौन अपराधों से जुड़े मामलों में पीड़ितों के अधिकारों को मजबूत करने और न्यायिक संवेदनशीलता को नई दिशा देने वाला माना जा रहा है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *