Strait of Hormuz : तेहरान। मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। ईरान ने पाकिस्तान के एक जहाज को होर्मुज स्ट्रेट पार करने से रोक दिया है। यह घटना ऐसे समय में हुई है, जब अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच जारी जंग का आज 26वां दिन है।
पाकिस्तानी जहाज को क्यों रोका गया?
ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के नेवी कमांडर अलीरेजा तंगसीरी के अनुसार, “सेलेन” नाम के जहाज के पास होर्मुज पार करने की अनुमति नहीं थी। उन्होंने साफ किया कि अब इस रास्ते से गुजरने वाले हर जहाज को पहले ईरानी अधिकारियों से परमिशन लेनी होगी।
भारत के जहाज सुरक्षित पार
तनाव के बीच राहत की खबर यह है कि अब तक भारत के 5 तेल और LPG टैंकर होर्मुज स्ट्रेट पार कर चुके हैं। इनमें जग वसंत, पाइन गैस, शिवालिक, नंदा देवी और जग लाडकी जैसे जहाज शामिल हैं।
दुनिया के लिए क्यों अहम है होर्मुज स्ट्रेट?
होर्मुज स्ट्रेट दुनिया का सबसे अहम समुद्री रास्ता है, जहां से करीब 20% तेल और गैस की सप्लाई होती है।
- पहले रोजाना करीब 120 जहाज गुजरते थे
- अब सिर्फ 4-5 जहाज ही निकल पा रहे हैं
इससे वैश्विक ऊर्जा संकट का खतरा बढ़ गया है और तेल की कीमतें 150-200 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंचने की आशंका जताई जा रही है।
ईरान में हालात बेहद खराब
जंग का असर ईरान के अंदर भी साफ दिख रहा है।
- महंगाई करीब 70% तक पहुंच गई है
- खाने-पीने की चीजें 100% तक महंगी हो चुकी हैं
- 26 दिनों से इंटरनेट बंद है, लोग दुनिया से कटे हुए हैं
नवरोज जैसे बड़े त्योहार के दौरान भी बाजार सूने पड़े हैं और कारोबारियों को भारी नुकसान हो रहा है।
सीजफायर की कोशिशें जारी
रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका ने ईरान को 15 पॉइंट वाला सीजफायर प्रस्ताव भेजा है। इसमें प्रतिबंधों में राहत, परमाणु कार्यक्रम पर नियंत्रण और होर्मुज स्ट्रेट से सुरक्षित आवाजाही जैसे मुद्दे शामिल हैं।
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दुनिया भर में असर
इस जंग का असर कई देशों पर दिख रहा है-
- पाकिस्तान में ईंधन संकट गहराया
- बांग्लादेश और श्रीलंका में भी तेल की कमी
- मिस्र में पेट्रोल-डीजल महंगे और मॉल जल्दी बंद
UN की चेतावनी
United Nations के मानवाधिकार प्रमुख ने चेतावनी दी है कि यह संघर्ष पूरी दुनिया को अपनी चपेट में ले सकता है। कुल मिलाकर, होर्मुज स्ट्रेट पर बढ़ता तनाव सिर्फ क्षेत्रीय नहीं, बल्कि वैश्विक संकट बनता जा रहा है। अगर हालात जल्द नहीं संभले, तो इसका असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।