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Speaker Chamber Video : लोकसभा में प्रश्नकाल स्थगित, स्पीकर चेंबर का VIDEO वायरल, रिजिजू बोले- विपक्षी सांसदों ने दीं गालियां

Speaker Chamber Video

Speaker Chamber Video : नई दिल्ली। बजट पर चर्चा के दौरान गुरुवार को लोकसभा में प्रश्नकाल हंगामे की भेंट चढ़ गया। सुबह 11 बजे सदन की कार्यवाही शुरू होते ही विपक्षी सांसद प्लेकार्ड और पोस्टर लेकर वेल में पहुंच गए और नारेबाजी करने लगे। स्थिति को नियंत्रित न होता देख स्पीकर की चेयर पर मौजूद केपी तेन्नेटी ने मात्र सात मिनट के भीतर ही सदन की कार्यवाही स्थगित कर दी। दोपहर 12 बजे लोकसभा की कार्यवाही दोबारा शुरू हुई। इस बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी राज्यसभा पहुंचे।

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स्पीकर चेंबर में हंगामे का आरोप

संसदीय कार्यमंत्री किरेन रिजिजू ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक वीडियो पोस्ट करते हुए दावा किया कि 4 फरवरी को लोकसभा स्पीकर के चेंबर में विपक्षी सांसदों ने हंगामा किया। उनके अनुसार 20-25 कांग्रेस सांसद स्पीकर के चेंबर में घुसे, गालियां दीं और प्रधानमंत्री को धमकाया।

रिजिजू ने लिखा कि यह एक “गैर-कानूनी वीडियो क्लिप” है जिसे कांग्रेस के एक सांसद ने रिकॉर्ड किया। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी बहस और चर्चा में विश्वास करती है और किसी भी प्रकार की मारपीट या अनुचित व्यवहार को प्रोत्साहित नहीं करती।

 

हालांकि कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि गालियां देने की बात पूरी तरह झूठी है। उनका कहना है कि उन्होंने किसी को उकसाया नहीं और अंत में शांतिपूर्वक अपनी बात रखी थी।

राहुल गांधी पर विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव की चर्चा

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक सरकार राहुल गांधी के खिलाफ विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव ला सकती है। संसदीय कार्यमंत्री किरेन रिजिजू ने संकेत दिया है कि राहुल गांधी द्वारा सरकार पर लगाए गए आरोपों के खिलाफ प्रिविलेज मोशन लाने पर विचार किया जा रहा है।

क्या होता है विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव

विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव के माध्यम से संसद या विधानसभा का कोई सदस्य यह मुद्दा उठा सकता है कि किसी सदस्य, मंत्री या अधिकारी ने सदन के विशेषाधिकारों का उल्लंघन किया है।

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संविधान के अनुच्छेद 105 में संसद सदस्यों के विशेषाधिकारों का उल्लेख है, ताकि वे बिना किसी दबाव के अपने कर्तव्यों का निर्वहन कर सकें। इन अधिकारों में सदन में बोलने की स्वतंत्रता, सदन में दिए गए वक्तव्य पर अदालत में मुकदमा न चलना और सही व पूर्ण जानकारी पाने का अधिकार शामिल है।

यदि किसी सदस्य को लगता है कि इन अधिकारों का उल्लंघन हुआ है, तो वह संबंधित सदन के अध्यक्ष को नोटिस देता है। स्पीकर या सभापति यह तय करते हैं कि मामला विचारणीय है या नहीं।

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अनुमति मिलने पर इसे विशेषाधिकार समिति के पास भेजा जाता है, जो जांच कर अपनी रिपोर्ट देती है। इसके आधार पर सदन आगे की कार्रवाई तय करता है। दोषी पाए जाने पर संबंधित सदस्य को फटकार, चेतावनी, निलंबन या दुर्लभ मामलों में हिरासत जैसी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है।

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