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Sabarimala Case Hearing : सबरीमाला भेदभाव केस में 9 जजों की संविधान पीठ गठित, क्या बदलेगा 2018 का फैसला?

Supreme Court

हाइलाइट्स

  • 7 अप्रैल से सुप्रीम कोर्ट की 9 जजों की संविधान पीठ करेगी सुनवाई।
  • 2018 के सबरीमाला फैसले की समीक्षा पर रहेगा मुख्य फोकस।
  • सभी पक्षों को 14 मार्च तक लिखित दलीलें दाखिल करने का निर्देश।

Sabarimala Case SC Hearing : नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट की 9 न्यायाधीशों की संविधान पीठ 7 अप्रैल से धार्मिक स्थलों पर महिलाओं के प्रवेश से जुड़े मामलों की सुनवाई शुरू करेगी। इस सुनवाई का मुख्य फोकस केरल के सबरीमाला मंदिर से जुड़े विवाद पर रहेगा और सभी पक्षों को 14 मार्च तक अपनी लिखित दलीलें दाखिल करने को कहा गया है।

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बेंच में कौन-कौन जज शामिल

इस अहम मामले की सुनवाई करने वाली बेंच में मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत के साथ जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम पंचोली सहित कुल 9 जज शामिल हैं। कोर्ट ने सुनवाई को 22 अप्रैल तक पूरा करने का लक्ष्य तय किया है।

एमिकस क्यूरी और नोडल काउंसल की नियुक्ति

सुनवाई के दौरान कोर्ट की मदद के लिए वरिष्ठ वकील परमेश्वर और शिवम सिंह को एमिकस क्यूरी बनाया गया है। सबरीमाला फैसले की समीक्षा का समर्थन करने वालों के लिए कृष्ण कुमार सिंह को नोडल काउंसल और विरोध करने वालों के लिए शश्वती परी को नोडल काउंसल नियुक्त किया गया है।

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2018 के फैसले की होगी समीक्षा

यह मामला 2018 के उस फैसले से जुड़ा है जिसमें सभी उम्र की महिलाओं को मंदिर में प्रवेश की अनुमति दी गई थी। 11 मई 2020 को सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि कानून से जुड़े बड़े सवालों को बड़ी बेंच के पास भेजा जा सकता है। अब संविधान के अनुच्छेद 25 और 26 के तहत धार्मिक स्वतंत्रता की सीमा पर भी विचार होगा।

सबरीमाला के अलावा धार्मिक स्थल भी दायरे में

इस सुनवाई में मस्जिदों और दरगाहों में मुस्लिम महिलाओं के प्रवेश और पारसी समुदाय की अगियारी में महिलाओं के प्रवेश जैसे मुद्दों पर भी विचार किया जाएगा। साथ ही यह भी तय किया जाएगा कि किसी धार्मिक परंपरा को पीआईएल के जरिए चुनौती दी जा सकती है या नहीं।

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केंद्र सरकार का रुख

केंद्र की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सबरीमाला फैसले की समीक्षा का समर्थन किया है, जिससे इस मामले को और संवैधानिक महत्व मिल गया है।

सुनवाई से पहले सियासी बयानबाजी तेज

केरल में इस मुद्दे को लेकर राजनीतिक माहौल भी गरमा गया है। विपक्षी कांग्रेस ने सरकार से अदालत में अपना रुख साफ करने की मांग की है, जबकि सत्तारूढ़ सीपीआई (एम) ने कहा है कि सरकार अपना पक्ष कोर्ट में ही रखेगी।

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सरकार बनाम विपक्ष आमने-सामने

नेता प्रतिपक्ष वी डी सतीशन और कांग्रेस नेता केसी वेणुगोपाल ने सरकार से स्पष्ट रुख की मांग की है। वहीं सीपीआई (एम) का कहना है कि यह मामला बेहद जटिल है और भक्तों की भावनाओं के साथ लोकतांत्रिक मूल्यों का भी सम्मान किया जाएगा।

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