Amit Shah in Lok Sabha : नई दिल्ली। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह (Amit Shah) ने बुधवार को लोकसभा में स्पीकर ओम बिरला को हटाने की मांग वाले अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान विपक्ष पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि भारतीय लोकतंत्र के 75 साल के इतिहास में विपक्ष ने कभी स्पीकर की निष्पक्षता पर इस तरह सवाल नहीं उठाए थे। यह आम नहीं है। लगभग 4 दशकों के बाद, लोकसभा स्पीकर के खिलाफ नो-कॉन्फिडेंस मोशन लाया गया है। यह पार्लियामेंट्री पॉलिटिक्स और इस सदन के लिए दुर्भाग्यपूर्ण है।
यह अविश्वास प्रस्ताव मोहम्मद जावेद ने पेश किया था, जिसे 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिला। विपक्ष के कुल 118 सांसदों ने इस प्रस्ताव पर हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि लोकसभा स्पीकर ने कई मामलों में पक्षपातपूर्ण रवैया अपनाया और पद की अपेक्षित निष्पक्षता नहीं दिखाई।
10 घंटे की बहस के लिए तय हुआ समय
सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे भाजपा सांसद जगदंबिका पाल ने इस प्रस्ताव को चर्चा के लिए स्वीकार करते हुए बहस के लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया है। उन्होंने सभी सांसदों से अपील की कि वे चर्चा के दौरान सिर्फ प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।
इस प्रस्ताव पर चर्चा मंगलवार से शुरू हुई थी और बुधवार को इसका दूसरा दिन है। बहस के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के नेताओं के बीच तीखी नोकझोंक भी देखने को मिली।
अमित शाह का विपक्ष पर हमला
बहस में हिस्सा लेते हुए गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि जब भाजपा और एनडीए विपक्ष में थे, तब भी उन्होंने कभी लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव नहीं लाया। उन्होंने कहा कि भाजपा ने हमेशा रचनात्मक विपक्ष की भूमिका निभाई और स्पीकर के पद की गरिमा बनाए रखी।
अमित शाह ने कहा कि संविधान ने स्पीकर को मध्यस्थ यानी ‘मीडिएटर’ की भूमिका दी है। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष इस पद की गरिमा पर सवाल उठाकर संसद की मजबूत लोकतांत्रिक परंपराओं को कमजोर करने की कोशिश कर रहा है।
चार दशक बाद आया ऐसा प्रस्ताव
गृह मंत्री ने कहा कि लगभग चार दशक बाद लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया गया है। उनके अनुसार यह संसदीय राजनीति और सदन की परंपराओं के लिए दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति है।
विपक्ष का पक्ष
इससे पहले कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्ति को निशाना बनाने के लिए नहीं लाया गया है, बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता को बनाए रखने के उद्देश्य से पेश किया गया है।
वहीं संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने स्पीकर ओम बिरला का बचाव करते हुए विपक्ष के आरोपों को बेबुनियाद बताया। इस दौरान विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच कई मुद्दों पर तीखी बहस भी देखने को मिली। अब सभी की नजर इस बात पर है कि लंबी बहस के बाद इस प्रस्ताव पर सदन में क्या फैसला होता है।