Bangladesh PM Tariq Rahman : ढाका। बांग्लादेश में 13वें संसदीय चुनाव के बाद नई सरकार का गठन हो गया है। BNP नेता तारिक रहमान ने प्रधानमंत्री पद की शपथ ले ली है। उनकी कैबिनेट में 25 मंत्रियों को शामिल किया गया है। खास बात यह है कि इस मंत्रिमंडल में दो अल्पसंख्यक समुदाय के नेताओं, निताई रॉय चौधरी (हिंदू नेता) और दीपेन दीवान (अल्पसंख्यक) को भी जगह दी गई है।
ढाका में हुआ शपथ ग्रहण समारोह
नवनिर्वाचित सांसदों ने मंगलवार को ढाका स्थित नेशनल पार्लियामेंट के साउथ प्लाजा में शपथ ली। 12वीं संसद के स्पीकर और डिप्टी स्पीकर का पद खाली होने की वजह से चीफ इलेक्शन कमिश्नर ने सभी को शपथ दिलाई। यह पूरा कार्यक्रम संसद सचिवालय के सेक्रेटरी कनीज मौला की मौजूदगी में संपन्न हुआ।
अल्पसंख्यक चेहरों को कैबिनेट में जगह
कैबिनेट में शामिल निताई रॉय चौधरी हिंदू समुदाय से आते हैं। वे मगुरा-2 सीट से 1,47,896 वोट हासिल कर सांसद बने और जमात-ए-इस्लामी के उम्मीदवार को 30,838 वोटों से हराया। निताई रॉय चौधरी बांग्लादेश की राजनीति में वरिष्ठ रणनीतिकार माने जाते हैं और पहले भी मंत्री रह चुके हैं।
वहीं दीपेन दीवान दक्षिण-पूर्व के रंगमती जिले से चुनाव जीतकर संसद पहुंचे हैं। वे चकमा जातीय अल्पसंख्यक समूह से जुड़े हैं, जो बौद्ध बहुल समुदाय माना जाता है।
गोयेश्वर रॉय को लेकर थी चर्चा
पहले कैबिनेट में अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय के वरिष्ठ नेता गोयेश्वर चंद्र रॉय को शामिल किए जाने की चर्चा थी। वे खालिदा जिया सरकार (1991-96) में राज्य मंत्री रह चुके हैं, लेकिन इस बार उन्हें मंत्रिमंडल में जगह नहीं मिली।
नई सरकार को सत्ता हस्तांतरण
अंतरिम नेता मुहम्मद यूनुस ने सोमवार को अपने पद से इस्तीफा देकर सत्ता नई निर्वाचित सरकार को सौंप दी। पद छोड़ते समय उन्होंने लोकतंत्र, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और मौलिक अधिकारों की प्रक्रिया जारी रखने की अपील की।
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चुनाव में BNP की बड़ी जीत
हालिया चुनाव में बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 297 में से 209 सीटें जीतीं और सरकार बनाने का स्पष्ट बहुमत हासिल किया। वहीं जमात-ए-इस्लामी को 68 सीटें मिलीं। पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की अवामी लीग को चुनाव लड़ने की अनुमति नहीं मिली थी।
लंबे राजनीतिक संकट के बाद बनी सरकार
साल 2024 में शेख हसीना सरकार के पतन के बाद देश राजनीतिक अस्थिरता के दौर से गुजर रहा था। इस बीच अंतरिम सरकार के रूप में मुहम्मद यूनुस ने नेतृत्व संभाला था।
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अब चुनाव के बाद नई सरकार के गठन के साथ बांग्लादेश में स्थिरता की उम्मीद बढ़ गई है। नई कैबिनेट में अल्पसंख्यक समुदाय को प्रतिनिधित्व दिए जाने को राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।