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NCERT Chapter Controversy : सुप्रीम कोर्ट ने विवादित किताब पर लगाया बैन, NCERT को भी भेजा नोटिस

NCERT Chapter Controversy

हाइलाइट्स

  • सुप्रीम कोर्ट ने NCERT किताब विवाद मामले पर लिया स्वत: संज्ञान।
  • CJI की सख्त टिप्पणी, न्यायपालिका की गरिमा से समझौता नहीं।
  • किताब में भ्रष्टाचार, लंबित मामले और जजों की कमी का जिक्र।

NCERT Chapter Controversy : नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने कक्षा 8 की NCERT की किताब में शामिल ‘न्यायपालिका में भ्रष्टाचार’ चैप्टर को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। कोर्ट ने शिक्षा मंत्रालय के सचिव और NCERT के डायरेक्टर डॉ. दिनेश प्रसाद सकलानी को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। उनसे पूछा गया है कि इस चैप्टर को तैयार करने वालों के खिलाफ अवमानना या किसी अन्य कानून के तहत कार्रवाई क्यों न की जाए। कोर्ट ने साफ कहा कि मामले में जिम्मेदारी तय करना जरूरी है।

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किताब पर पूरी तरह रोक लगाने का आदेश

चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम. पंचोली की बेंच ने इस किताब पर पूरी तरह से रोक लगा दी है। कोर्ट ने कहा कि इस आदेश को दरकिनार करने की कोई भी कोशिश न्याय के प्रशासन में दखल मानी जाएगी और इसे कोर्ट की अवमानना माना जाएगा।

साथ ही NCERT को निर्देश दिया गया है कि विवादित चैप्टर को मंजूरी देने वाली कमेटी के सभी सदस्यों के नाम, योग्यता और क्रेडेंशियल्स कोर्ट में पेश किए जाएं।

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माफी पर भी कोर्ट की नाराजगी

सुनवाई के दौरान शिक्षा मंत्रालय की ओर से बिना शर्त माफी मांगी गई, लेकिन कोर्ट ने इसे पर्याप्त नहीं माना। बेंच ने कहा कि NCERT के आधिकारिक संचार में माफी का कोई स्पष्ट उल्लेख नहीं है, बल्कि विवादित सामग्री को सही ठहराने की कोशिश की गई है। कोर्ट ने जिम्मेदार लोगों की पहचान कर उनके खिलाफ कार्रवाई की बात कही।

कोर्ट की टिप्पणी – न्यायपालिका को बदनाम करने की साजिश

चीफ जस्टिस ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि यह कदम न्यायपालिका को भ्रष्ट दिखाने की सोची-समझी साजिश जैसा लगता है। उन्होंने कहा कि इस तरह की सामग्री से समाज में गलत संदेश जाता है और पूरी टीचिंग कम्युनिटी को प्रभावित किया जाता है। कोर्ट ने कहा कि दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा।

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सरकार और बार काउंसिल की आपत्ति

सरकारी सूत्रों के मुताबिक अगर भ्रष्टाचार का मुद्दा शामिल करना था तो शासन के तीनों अंग- कार्यपालिका, न्यायपालिका और विधायिका- को साथ में दिखाना चाहिए था।

बार काउंसिल ऑफ इंडिया के चेयरमैन मनन कुमार मिश्रा ने भी इस मामले को गंभीर बताते हुए कहा कि जिम्मेदार लोगों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए और किताबों को वापस लिया जाना चाहिए।

स्वत: संज्ञान लेकर शुरू हुई थी सुनवाई

इस पूरे विवाद पर सुप्रीम कोर्ट ने स्वत: संज्ञान लिया था। वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल और अभिषेक सिंघवी ने तत्काल सुनवाई की मांग की थी। कोर्ट की सख्ती के बाद NCERT ने अपनी वेबसाइट से किताब हटा ली है और विवादित चैप्टर हटाने की संभावना जताई जा रही है।

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नई किताब में क्या था विवादित कंटेंट

NCERT की नई किताब ‘एक्सप्लोरिंग सोसायटी: इंडिया एंड बियॉन्ड पार्ट-2’ 23 फरवरी को जारी हुई थी। इसमें ‘द रोल ऑफ द ज्यूडिशियरी इन अवर सोसायटी’ चैप्टर के तहत न्यायपालिका में भ्रष्टाचार, जजों की कमी और लंबित मामलों को बड़ी चुनौती बताया गया था। साथ ही “Justice delayed is justice denied” जैसी टिप्पणी और लंबित मामलों के आंकड़े भी दिए गए थे, जिस पर विवाद खड़ा हो गया।

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