Navratri Special Story : रायसेन। मध्यप्रदेश के रायसेन जिले में स्थित मां कंकाली मंदिर (Maa Kankali Temple, Raisen) श्रद्धा और चमत्कार का अनोखा संगम माना जाता है। करीब 250 साल पुराने इस मंदिर में पिछले 111 वर्षों से अखंड ज्योत लगातार जल रही है, जो भक्तों की आस्था का प्रमुख केंद्र बन चुकी है। यह मंदिर जिला मुख्यालय से लगभग 28 किलोमीटर दूर भोजपुर विधानसभा क्षेत्र के ग्राम गुदावल में स्थित है, जहां दूर-दूर से श्रद्धालु माता के दर्शन के लिए पहुंचते हैं।
दशहरे पर होता है अनोखा चमत्कार
मां कंकाली मंदिर से जुड़ा एक बेहद अनोखा और रहस्यमयी विश्वास भक्तों के बीच काफी प्रसिद्ध है। सामान्य दिनों में माता की प्रतिमा की गर्दन थोड़ी टेढ़ी दिखाई देती है, लेकिन दशहरा (Dussehra) के दिन हवन के बाद कुछ क्षणों के लिए यह गर्दन सीधी हो जाती है। इस घटना को देखने के लिए हर साल बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं और इसे माता का चमत्कार मानते हैं।
सपने के संकेत से हुई मंदिर की स्थापना
स्थानीय लोगों के अनुसार इस मंदिर की स्थापना भी एक चमत्कारी घटना से जुड़ी हुई है। गांव के पटेल हरलाल मीणा को मां ने सपने में दर्शन देकर इस स्थान पर खुदाई करने का निर्देश दिया था।
इसके बाद सन 1731 में खुदाई कराई गई, जिसमें मां कंकाली के साथ ब्रह्मा, विष्णु और महेश की मूर्तियां भी प्राप्त हुईं। तभी से इस स्थान पर मंदिर स्थापित कर पूजा-अर्चना शुरू हुई।
चोरी करने वालों के साथ हुआ चमत्कार
मंदिर से जुड़ी एक और कहानी भक्तों के बीच काफी प्रचलित है। कहा जाता है कि एक बार कुछ चोर मंदिर में चोरी करने पहुंचे, लेकिन अचानक उनकी आंखों की रोशनी चली गई।
बाद में जब उन्होंने मंदिर में आकर अपनी गलती स्वीकार की और मां कंकाली से माफी मांगी, तब उनकी दृष्टि वापस आ गई। इस घटना को लोग माता की शक्ति का प्रमाण मानते हैं।
अखंड ज्योत और भक्तों की अटूट आस्था
मंदिर के पुजारियों के अनुसार यहां लगभग 111 साल से अखंड ज्योत जल रही है, जो इस स्थान की पवित्रता का प्रतीक है। मान्यता है कि मां कंकाली के दरबार में आने वाले भक्तों की हर मनोकामना पूरी होती है।
खासकर संतान प्राप्ति की इच्छा रखने वाली महिलाएं यहां श्रद्धा के साथ प्रार्थना करती हैं। यही वजह है कि यह मंदिर न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि चमत्कारी घटनाओं और अटूट विश्वास के कारण भी दूर-दूर तक प्रसिद्ध हो चुका है।



