MP Politics : भोपाल। मध्य प्रदेश की सियासत में इन दिनों ‘शह और मात’ का खेल चरम पर है। राज्यसभा चुनाव अब महज एक प्रक्रिया नहीं, बल्कि एक सियासी शतरंज बन चुका है… जहाँ हर चाल के साथ कांग्रेस की मुश्किलें कम होने के बजाय बढ़ती जा रही हैं। एक तरफ विधायकों का घटता कुनबा है, तो दूसरी तरफ पार्टी के दिग्गज चेहरों का मैदान छोड़ना। दिग्विजय सिंह, जीतू पटवारी और अजय सिंह जैसे कद्दावर नेताओं ने राज्यसभा की दौड़ से दूरी बना ली है।
साफ है कि कांग्रेस के भीतर भरोसे का संकट गहरा है। उधर, बीजेपी पूरी तरह आक्रामक है। नरोत्तम मिश्रा के बयानों ने सियासी पारा बढ़ा दिया है और बीजेपी अब तीनों सीटों पर जीत की रणनीति बना रही है। क्या कांग्रेस अपनी इकलौती साख बचा पाएगी या बीजेपी हरियाणा और बिहार की तर्ज पर यहाँ भी ‘क्लीन स्वीप’ कर जाएगी?
62 विधायकों पर सिमटती दिख रही कांग्रेस
मध्य प्रदेश में राज्यसभा की 3 सीटों के लिए बिसात बिछ चुकी है, लेकिन कांग्रेस के लिए समीकरण ‘पहाड़’ चढ़ने जैसा हो गया है। कभी 65 विधायकों का दम भरने वाली कांग्रेस अब 62 पर सिमटती दिख रही है। संकट सिर्फ संख्या का नहीं, निष्ठा का भी है।
निर्मला सप्रे ने पाला बदला तो कांग्रेस हाई कोर्ट पहुँच गई, लेकिन कानूनी दांवपेच में फंसी कांग्रेस अब न उन्हें निकाल पा रही है और न अपना मान पा रही है। रही-सही कसर दतिया विधायक राजेंद्र भारती पर मंडरा रहे सजा के खतरे ने पूरी कर दी है। अगर सजा 2 साल से ऊपर हुई, तो कांग्रेस का एक और हाथ साथ छोड़ देगा।
एमपी में ‘खेला’ दोहराएगी बीजेपी
बीजेपी की नज़र कांग्रेस के इसी कमजोर गणित पर है। एक सीट के लिए 58 वोट चाहिए और कांग्रेस के पास अब मार्जिन बेहद कम है। मुकेश मल्होत्रा के वोट न देने के ऐलान ने खतरे की घंटी बजा दी है। क्या बीजेपी तीसरे उम्मीदवार को उतारकर बिहार, ओडिशा और हरियाणा जैसा ‘खेला’ एमपी में भी दोहराने वाली है?
राज्यसभा चुनाव – बिगड़ता गणित
- कुल सीटें: 3
- जीत के लिए जरूरी वोट: 58 (प्रति सीट)
- कांग्रेस की मौजूदा हालत: 65 से घटकर 62 पर पहुँची।
- जोखिम: बहुमत से महज 4 वोट ज्यादा, क्रॉस वोटिंग का हाई रिस्क।
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क्यों मुश्किल में है कांग्रेस?
- निर्मला सप्रे: बीजेपी में शामिल, तकनीकी रूप से फंसा मामला।
- मुकेश मल्होत्रा: वोटिंग से दूरी बनाने के संकेत।
- राजेंद्र भारती: भ्रष्टाचार केस में सजा का डर, विधायकी पर तलवार।
- दिग्गजों का इनकार: दिग्विजय, जीतू पटवारी ने दावेदारी छोड़ी।
बीजेपी का ‘मिशन क्लीन स्वीप’
- बीजेपी 3 उम्मीदवारों को उतारने की तैयारी में।
- भाजपा के बड़े नेता का दावा “तीसरी सीट पर भी हो सकता है सरप्राइज”।
- विपक्ष के असंतुष्ट विधायकों पर बीजेपी की पैनी नजर।
अन्य राज्यों में NDA का ‘खेला’ (ट्रैक रिकॉर्ड)
- बिहार: कांग्रेस के 3 विधायकों की क्रॉस वोटिंग, NDA को सीधा लाभ।
- ओडिशा: BJD और कांग्रेस में सेंधमारी, 4 में से 3 सीटें बीजेपी के नाम।
- हरियाणा: कांग्रेस के 5 विधायकों ने बिगाड़ा अपनी ही पार्टी का खेल।
कांग्रेस के लिए ‘खतरे का सिग्नल’
अब सवाल ये नहीं है कि बीजेपी कितनी सीटें जीतेगी, सवाल ये है कि क्या कांग्रेस अपने कुनबे को एकजुट रख पाएगी? अगर राजेंद्र भारती की सदस्यता पर आंच आती है या क्रॉस वोटिंग होती है, तो मध्य प्रदेश का ये राज्यसभा चुनाव कांग्रेस के लिए ऐतिहासिक हार साबित हो सकता है।
फिलहाल, नरोत्तम मिश्रा की मुस्कुराहट कांग्रेस के लिए ‘खतरे का सिग्नल’ बनी हुई है। देखना दिलचस्प होगा कि दिल्ली से भोपाल तक चल रही इस सियासी हलचल का नतीजा क्या निकलता है।