हाइलाइट्स
- बीमार बुजुर्गों को अस्पताल जाने की जरूरत नहीं।
- 6 शहरों में शुरू ‘होप एप’ का पायलट प्रोजेक्ट शुरू।
- 346 बुजुर्गों की प्रारंभिक स्क्रीनिंग को जा चुकी है।
MP Hope App : भोपाल। बीमार और चलने-फिरने में असमर्थ बुजुर्गों को अब इलाज के लिए अस्पतालों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। मध्य प्रदेश सरकार की एक नई पहल के तहत बुजुर्गों को उनके घर पर ही स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। इसके लिए भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर, उज्जैन और रीवा में पायलट प्रोजेक्ट शुरू करने की तैयारी की जा रही है। यह योजना इन जिलों के शहरी क्षेत्रों में लागू की जाएगी।
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अब तक 1214 बुजुर्गों का रजिस्ट्रेशन
इस पायलट प्रोजेक्ट के तहत अब तक 1214 बुजुर्गों का पंजीकरण ‘होप एप’ में किया जा चुका है। इनमें से 346 बुजुर्गों की प्रारंभिक स्वास्थ्य जांच भी पूरी कर ली गई है। सरकार का लक्ष्य है कि इस योजना के जरिए उन बुजुर्गों तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाई जाएं, जो बीमारी या कमजोरी के कारण घर से बाहर नहीं निकल पाते।
आशा कार्यकर्ता करेंगी घर-घर सर्वे
योजना के तहत घर-घर सर्वे का काम आशा कार्यकर्ताओं द्वारा किया जाएगा। सर्वे के दौरान जिन बुजुर्गों को नियमित देखभाल और इलाज की जरूरत होगी, उनकी जानकारी स्वास्थ्य केंद्र में कार्यरत नर्सिंग ऑफिसर को दी जाएगी। नर्सिंग ऑफिसर ऐसे बुजुर्गों का चयन कर उनका विवरण ‘होप एप’ में दर्ज करेंगी।
नर्सिंग ऑफिसर जाएंगी बुजुर्ग के घर
इसके बाद नर्सिंग ऑफिसर ‘होप किट’ लेकर बुजुर्ग के घर जाएंगी। घर पर ही बुजुर्गों की ब्लड प्रेशर, शुगर, वजन और अन्य जरूरी जांच की जाएगी। जांच के आधार पर उनके लिए फॉलोअप प्लान भी तैयार किया जाएगा, ताकि समय-समय पर उनकी सेहत पर नजर रखी जा सके।
तुरंत मिल सके डॉक्टर की सलाह
अगर किसी बुजुर्ग को डॉक्टर की सलाह की जरूरत पड़ेगी, तो उन्हें ऑनलाइन डॉक्टर से भी जोड़ा जाएगा। इससे गंभीर मामलों में तुरंत विशेषज्ञ की राय मिल सकेगी और समय पर इलाज संभव हो पाएगा।
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सफलता के बाद अन्य जिलों में करेंगे लागू
सरकार का लक्ष्य है कि इस योजना के जरिए प्रदेशभर में करीब एक लाख ऐसे बुजुर्गों को जोड़ा जाए, जो चलने-फिरने में असमर्थ हैं और नियमित इलाज से वंचित रह जाते हैं। पायलट प्रोजेक्ट के सफल होने के बाद इसे अन्य जिलों में भी लागू किया जा सकता है।