Monalisa Marriage Controversy : भोपाल। वायरल गर्ल मोनालिसा भोंसले को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है, जिसने पूरे मामले को नया मोड़ दे दिया है। नाबालिग होने के दावों की जांच के बाद राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग (NCST) ने पाया कि मोनालिसा वास्तव में नाबालिग है। इस खुलासे के बाद उससे शादी करने वाले फरमान खान के खिलाफ मध्य प्रदेश के खरगोन जिले के महेश्वर थाने में POCSO एक्ट के तहत एफआईआर दर्ज की गई है।
जांच में मोनालिसा के नाबालिग होने का खुलासा
यह जांच आयोग के अध्यक्ष अंतर सिंह आर्य के नेतृत्व में की गई, जिसमें अधिवक्ता प्रथम दुबे ने कानूनी पैरवी की। उन्होंने 17 मार्च 2026 को इस मामले को आयोग के सामने उठाया था। जांच में यह साबित हुआ कि जिस लड़की को बालिग बताकर विवाह कराया गया था, वह पारधी जनजाति समुदाय की नाबालिग है।
राजनीतिक और संगठनों की भूमिका पर भी सवाल
अधिवक्ता प्रथम दुबे ने इस मामले में राजनीतिक और संगठनों की भूमिका पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि इस विवाह में केरल के CPI-M नेताओं और PFI जैसे संगठनों की संलिप्तता हो सकती है। शिकायत में यह भी कहा गया कि यह केवल निजी मामला नहीं था, बल्कि एक सुनियोजित रणनीति के तहत गलत नैरेटिव बनाने की कोशिश थी।
72 घंटे के अंदर सच्चाई सामने
जांच के दौरान टीम ने केरल से लेकर मध्य प्रदेश के महेश्वर तक सभी दस्तावेजों और तथ्यों की गहन पड़ताल की। जांच दल ने 72 घंटे के भीतर पूरे मामले की कड़ियां जोड़ते हुए सच्चाई सामने रखी।
आयोग के सलाहकार प्रकाश और निदेशक पी. कल्याण रेड्डी की जांच में महेश्वर के सरकारी अस्पताल के रिकॉर्ड में मोनालिसा की उम्र नाबालिग पाई गई।
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नयनार देवा मंदिर से शुरू हुई जांच
जांच की शुरुआत केरल के नयनार देवा मंदिर से हुई, जहां शादी संपन्न हुई थी। मंदिर प्रशासन ने बताया कि विवाह आधार कार्ड में दर्ज आयु के आधार पर कराया गया था। इसके बाद केरल के पुअर गांव के ग्राम पंचायत कार्यालय में शादी का पंजीकरण भी किया गया, जिसमें गलत जन्म प्रमाण पत्र का उपयोग किया गया था।
साल 2009 में जन्मी मोनालिसा
जांच में सामने आया कि यह गलत जन्म प्रमाण पत्र महेश्वर नगर परिषद से जारी किया गया था। जब जांच दल ने महेश्वर के सरकारी अस्पताल के रिकॉर्ड की जांच की, तो पता चला कि मोनालिसा का वास्तविक जन्म 30 दिसंबर 2009 को शाम 5:50 बजे हुआ था। इस आधार पर 11 मार्च 2026 को शादी के समय उसकी उम्र 16 साल 2 महीने और 12 दिन थी।
गलत प्रमाण पत्र को निरस्त करने के निर्देश
जांच टीम ने गलत जन्म तिथि के आधार पर जारी प्रमाण पत्र को निरस्त करने के लिए स्थानीय प्रशासन को निर्देश भी दिए। इस दस्तावेजी प्रमाण ने पूरे मामले में साजिश की आशंका को और मजबूत कर दिया। इसके साथ ही मोनालिसा के माता-पिता द्वारा प्रस्तुत जाति प्रमाण पत्रों से यह भी पुष्टि हुई कि वे अनुसूचित जनजाति समुदाय से संबंधित हैं।
फरमान पर पॉक्सो एक्ट
इस मामले में मध्य प्रदेश पुलिस ने फरमान खान के खिलाफ पॉक्सो एक्ट, भारतीय न्याय संहिता (BNS) और एससी-एसटी अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया है। पुलिस ने जांच शुरू कर दी है और आरोपी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा रही है।
मामले की डिटेल्स रिपोर्ट केंद्र को भेजी
इस खुलासे के बाद राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग ने भी सख्त रुख अपनाया है। आयोग ने 22 अप्रैल 2026 को केरल और मध्य प्रदेश के डीजीपी को नई दिल्ली स्थित मुख्यालय में तलब किया है। साथ ही इस पूरे मामले की विस्तृत रिपोर्ट केंद्र सरकार को भेजी जा रही है।
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आयोग ने स्पष्ट किया है कि वह इस मामले की जांच और कार्रवाई पर लगातार नजर रखेगा। तीन दिन के भीतर दोनों राज्यों के डीजीपी से प्रगति रिपोर्ट भी मांगी गई है। इस घटना ने केरल पुलिस और स्थानीय प्रशासन की भूमिका पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। आयोग ने कहा है कि दोषियों को सजा मिलने तक वह इस मामले की निगरानी करता रहेगा।