हाइलाइट्स
- चुराचंदपुर में डिप्टी सीएम के शपथ के विरोध में भड़की हिंसा।
- कुकी समुदाय में नेम्चा किपगेन को डिप्टी सीएम बनाने से असंतोष।
- विधायकों पर विश्वासघात का आरोप, सामाजिक बहिष्कार की चेतावनी।
Manipur Violence : इंफाल। पूर्वोत्तर भारत के मणिपुर राज्य में एक बार फिर हिंसा भड़क उठी है। राज्य के चुराचंदपुर जिले में डिप्टी सीएम नेम्चा किपगेन और लोसी दिखो के शपथ ग्रहण समारोह के दौरान हालात बिगड़ गए। सुरक्षा बलों और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प हुई, जिसके बाद मणिपुर पुलिस को स्थिति संभालने के लिए आंसू गैस का इस्तेमाल करना पड़ा। नई सरकार के गठन के महज 24 घंटे बाद हुई इस हिंसा से पूरे इलाके में तनाव फैल गया है।
मणिपुर में नए डिप्टी सीएम के विरोध में हिंसा
नई सरकार में कुकी समुदाय की विधायक नेम्चा किपगेन को डिप्टी सीएम बनाए जाने से कुकी समुदाय के एक बड़े वर्ग में नाराजगी देखी जा रही है। उनके साथ एलएम खौटे और न्गुर्संगलुर भी सरकार में शामिल हुए हैं।
कुछ कुकी संगठनों ने इन विधायकों पर समुदाय के साथ विश्वासघात करने का आरोप लगाया है और सामाजिक बहिष्कार की चेतावनी दी है। वहीं, समर्थक गुटों का कहना है कि विधायक समुदाय की सुरक्षा और विकास के लिए सरकार का हिस्सा बने हैं।
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सड़क पर टायर जलाए और पत्थरबाजी
हिंसा के दौरान चुराचंदपुर के तुइबोंग इलाके में प्रदर्शनकारियों ने सड़क पर टायर जलाए और पत्थरबाजी की। कुछ समूहों की ओर से सरकार में शामिल कुकी विधायकों को जान से मारने की धमकियां और इनाम की घोषणाएं भी सामने आई हैं। दिनभर हालात तनावपूर्ण बने रहे और कई जगह सुरक्षा बलों को सख्ती करनी पड़ी।
हिंसा के ये तीन बड़े कारण
विशेषज्ञों के मुताबिक, मणिपुर में कुकी और मैतेई समुदायों के बीच जारी हिंसा के तीन बड़े कारण हैं।
- पहला कारण मैतेई समुदाय को अनुसूचित जनजाति का दर्जा देने की मांग है। अप्रैल 2023 में हाईकोर्ट के निर्देश के बाद कुकी समुदाय को डर है कि इससे उनकी जमीन और अधिकारों पर असर पड़ेगा।
- दूसरा कारण कुकी समुदाय की अलग प्रशासन या कुकीलैंड की मांग है, जिसे राज्य सरकार और मैतेई समुदाय राज्य की एकता के लिए खतरा मानते हैं।
- तीसरा कारण ड्रग्स तस्करी और अवैध अफीम की खेती को लेकर लगे आरोप हैं, जिससे आपसी अविश्वास और बढ़ा है।
इंफाल और चुराचंदपुर में भारी नुकसान
हालिया हिंसा में इंफाल और चुराचंदपुर में भारी नुकसान हुआ है। कई चर्च और मंदिरों को आग के हवाले कर दिया गया, सैकड़ों घर और संपत्तियां जला दी गईं।
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इस दौरान बड़ी संख्या में लोग घायल हुए और करीब 70 हजार से ज्यादा लोग अपने घर छोड़ने को मजबूर हुए। हिंसा के दौरान भीड़ द्वारा हजारों हथियार लूटे जाने की घटनाएं भी सामने आईं।
असम राइफल्स की तैनाती
स्थिति को काबू में करने के लिए असम राइफल्स और अन्य सुरक्षा बलों की तैनाती की गई है। संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त फोर्स लगाई गई है और प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस का इस्तेमाल किया जा रहा है। सरकार की ओर से प्रभावित समुदायों से बातचीत कर हालात शांत करने की कोशिशें भी की जा रही हैं।
कुकी समुदाय के 10 विधायक
गौरतलब है कि, भाजपा नेता युमनाम खेमचंद सिंह मणिपुर के 13वें मुख्यमंत्री बने। खेमचंद मैतेई समुदाय से आते हैं। उनके साथ ही नगा समुदाय से आने वाले लोसी दिखो ने डिप्टी सीएम की शपथ ली। वे नगा पीपुल्स फ्रंट के विधायक हैं।
वहीं, कुकी समुदाय से आने वालीं नेम्चा किप्गेन राज्य की पहली डिप्टी सीएम बनीं। भाजपा नेता नेम्चा ने दिल्ली के मणिपुर भवन से वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए शपथ लीं। बता दें कि, मणिपुर विधानसभा की 60 सीटों में कुकी समुदाय के 10 विधायक हैं, जिनमें से 7 भाजपा से जुड़े हैं।
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मणिपुर में जातीय हिंसा का इतिहास पुराना है। पिछले करीब 10 महीनों में सैकड़ों लोगों की जान जा चुकी है, हजारों घायल हुए हैं और बड़ी संख्या में लोग विस्थापित हुए हैं।
लंबे समय तक इंटरनेट बंद रहने से भी हालात बिगड़े। कुकी और मैतेई समुदायों के बीच बढ़ता अविश्वास और पुराने विवाद राज्य में शांति बहाल करने की राह में बड़ी चुनौती बने हुए हैं।
#WATCH | Manipur | Violence broke out between security forces and the mob in Churachandpur against Nemcha Kipgen and Losii Dikho, taking oath as the Deputy Chief Ministers of Manipur
Police use tear gas to disperse the protestors (05.02) pic.twitter.com/SQI9vpnjho
— ANI (@ANI) February 6, 2026