हाइलाइट्स
- महाशिवरात्रि को दुर्लभ ग्रह योग से विशेष फलदायी।
- प्रदोष से ब्रह्म मुहूर्त तक अभिषेक और जप शुभ।
- महाकाल मंदिर में 6 फरवरी से उत्सव।
Maha Shivaratri 2026 : मध्य प्रदेश। शिव भक्तों के लिए सबसे बड़ा पर्व महाशिवरात्रि इस साल खास रहने वाला है। पंचांग के अनुसार फाल्गुन मास की कृष्ण पक्ष त्रयोदशी और चतुर्दशी की संधि में यह पर्व मनाया जाता है। 15 फरवरी 2026 को रविवार के दिन महाशिवरात्रि आएगी।
इस दिन ग्रहों की स्थिति बहुत दुर्लभ बन रही है। सूर्य, बुध, शुक्र और राहु कुंभ राशि में, केतु सिंह राशि में और चंद्रमा मकर में गोचर करेंगे। इससे त्रिकोण योग और सर्वार्थ सिद्धि योग का शुभ संयोग बनेगा।
ज्योतिष पंडित के अनुसार ऐसा योग 2007 के बाद 19 साल बाद बन रहा है। यह संयोग पूजा को विशेष फलदायी बनाएगा। पूरे साल की 12 शिवरात्रियों में फाल्गुन वाली को महाशिवरात्रि कहा जाता है। शिव महापुराण के अनुसार चार प्रहर की पूजा से सिद्धि और सफलता मिलती है।
महाशिवरात्रि का महत्व:
यह पर्व भगवान शिव की उत्पत्ति और सृष्टि चक्र की शुरुआत से जुड़ा है। ब्रह्मा-विष्णु के अहंकार को समाप्त करने का प्रतीक है। शिव-पार्वती विवाह अलग समय पर हुआ था।
चार प्रहर पूजा मुहूर्त:
पहला प्रहर शाम 6:19 बजे से (प्रदोष काल) – गन्ने के रस से अभिषेक।
दूसरा प्रहर रात 9:40 बजे से – दही से अभिषेक।
तीसरा प्रहर मध्य रात्रि 12:41 बजे से – दूध से अभिषेक।
चौथा प्रहर सुबह 3:18 बजे से ब्रह्म मुहूर्त तक – विधि-विधान पूजा।
पूजा विधि और नियम:
स्नान के बाद उत्तर दिशा में मुख करके पूजन करें। पंचोपचार या षोडशोपचार विधि अपनाएं। व्रत में अन्न न लें। क्रोध, काम, नशा से दूर रहें। “ॐ नमः शिवाय” जप करें। माथे पर चंदन या भस्म का त्रिपुंड लगाएं। बिल्वपत्र धोकर उपयोग करें।
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महाकाल मंदिर तैयारियां:
उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में तैयारियां जोरों पर हैं। 6 फरवरी से शिवनवरात्रि उत्सव शुरू होगा। मंदिर की सफाई, रंग-रोगन और कोटितीर्थ कुंड की सफाई चल रही है। 40 छोटे मंदिरों की पुताई अंतिम चरण में है। कलेक्टर और मंदिर प्रशासक बैठक कर दर्शन व्यवस्था फाइनल करेंगे।