LPG Crisis India : नई दिल्ली। केंद्र सरकार कुकिंग गैस की खपत कम करने के लिए अब इंडक्शन हीटर और उससे जुड़े उपकरणों के घरेलू उत्पादन को बढ़ाने की दिशा में तेजी से काम कर रही है। इसी कड़ी में शुक्रवार को उद्योग संवर्धन और आंतरिक व्यापार विभाग के सचिव, विद्युत सचिव और विदेश व्यापार महानिदेशालय के महानिदेशक सहित शीर्ष अधिकारियों की एक उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई।
बैठक में पश्चिम एशिया में चल रहे ईरान युद्ध के कारण वैश्विक सप्लाई चेन में आई बाधाओं को ध्यान में रखते हुए इंडक्शन हीटर और अन्य इलेक्ट्रिक कुकिंग उपकरणों के उत्पादन को बढ़ाने के उपायों पर चर्चा की गई। सरकार का मानना है कि इससे घरेलू स्तर पर कुकिंग गैस की खपत कम की जा सकती है।
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इलेक्ट्रिक कुकिंग उपकरणों की मांग में तेज
अधिकारियों के अनुसार, पश्चिम एशिया संकट शुरू होने के बाद से इंडक्शन हीटर और इलेक्ट्रिक उपकरणों की मांग में तेजी से वृद्धि देखी गई है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि यदि यह संघर्ष लंबे समय तक चलता है, तो भारत को संभावित चुनौतियों से निपटने के लिए पहले से तैयार रहना होगा।
यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब सरकार लंबे समय तक चलने वाले संघर्ष की आशंका को देखते हुए आयात पर पड़ने वाले प्रभाव का आकलन कर रही है। खासतौर पर तेल, गैस और पेट्रोकेमिकल उत्पादों की सप्लाई में बाधा को लेकर चिंता जताई जा रही है।
सरकार का मुख्य फोकस जरूरी वस्तुओं पर
सरकार पहले ही कई पेट्रोकेमिकल उत्पादों पर आयात शुल्क कम कर चुकी है, ताकि बाजार में सप्लाई बनी रहे और लागत का दबाव कम किया जा सके।
सूत्रों के मुताबिक, सरकार का मुख्य फोकस जरूरी वस्तुओं की उपलब्धता सुनिश्चित करना और वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच आयात पर निर्भरता को कम करना है।
इस बीच, कतर में एक बड़े एलएनजी प्लांट को नुकसान पहुंचने के बाद मध्य पूर्व से तेल और गैस की सप्लाई को लेकर अनिश्चितता और बढ़ गई है। साथ ही होर्मुज जलडमरूमध्य लगभग बंद होने की स्थिति में है, जहां से दुनिया की करीब 20 प्रतिशत ऊर्जा सप्लाई गुजरती है।
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अब भारत अफ्रीकी देशों से खरीदेगा कच्चा तेल
भारत ने इस स्थिति से निपटने के लिए अपने तेल आयात स्रोतों में विविधता लाई है। अब भारत रूस के साथ-साथ नाइजीरिया और अंगोला जैसे अफ्रीकी देशों से अधिक कच्चा तेल खरीद रहा है। इसके अलावा भारतीय कंपनियां अमेरिका से भी गैस की आपूर्ति ले रही हैं।
ईरान को पाषाण युग में पहुंचा देंगे…
दूसरी ओर, पश्चिम एशिया में तनाव लगातार बना हुआ है। डोनाल्ड ट्रंप ने अपने हालिया संबोधन में कहा कि अमेरिकी सेना अगले 2-3 हफ्तों में ईरान पर ‘बेहद कड़ा प्रहार’ करेगी।
उन्होंने चेतावनी दी कि अमेरिका ईरान को ‘स्टोन एज’ यानी पाषाण युग में पहुंचा सकता है। इसके जवाब में अब्बास अराघची ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उस समय मध्य पूर्व में न तेल था और न ही गैस का उत्पादन होता था।
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फिलहाल, यह संघर्ष दूसरे महीने में प्रवेश कर चुका है और क्षेत्र में तनाव कम होने के संकेत नहीं दिख रहे हैं। ईरान ने युद्धविराम और 15-सूत्रीय शांति योजना से जुड़ी खबरों को खारिज करते हुए इसे एकतरफा और अव्यवहारिक बताया है।