Aayudh

Categories

Iran War Ceasefire : पाकिस्तान पर दबाव डालकर अमेरिका ने ईरान से कराई सीजफायर डील

Iran War Ceasefire

Iran War Ceasefire : तेहरान। मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच एक नई रिपोर्ट में बड़ा खुलासा हुआ है। फाइनेंशियल टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका ईरान के साथ सीजफायर के लिए काफी उत्सुक था और इस डील को आगे बढ़ाने के लिए उसने पाकिस्तान पर दबाव डाला। रिपोर्ट में कहा गया है कि पाकिस्तान ने भले ही खुद को एक निष्पक्ष मध्यस्थ के रूप में पेश किया, लेकिन वास्तव में वह अमेरिका के लिए एक माध्यम के तौर पर काम कर रहा था।

सीजफायर के लिए अपनाई ये रणनीति

रिपोर्ट के मुताबिक, वॉशिंगटन और इस्लामाबाद का मानना था कि अगर अमेरिका समर्थित प्रस्ताव किसी मुस्लिम-बहुल पड़ोसी देश के जरिए ईरान के सामने रखा जाएगा, तो तेहरान उसे आसानी से स्वीकार कर सकता है। इसी रणनीति के तहत पाकिस्तान को मध्यस्थ की भूमिका दी गई।

बताया गया है कि कई हफ्तों तक ट्रंप प्रशासन पाकिस्तान पर दबाव बनाता रहा, ताकि वह ईरान को युद्धविराम के लिए राजी कर सके। इस सीजफायर का उद्देश्य होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलना भी था, जो वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए बेहद अहम है।

Iran War Update : लेबनान में इजराइली हमलों से 254 की मौत, सीजफायर पर विवाद और वैश्विक संकट की चेतावनी

आसिम मुनीर के जरिये बातचीत बढ़ाया को आगे

रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि पाकिस्तान के सेना प्रमुख आसिम मुनीर के नेतृत्व में बैक-चैनल कूटनीति के जरिए बातचीत को आगे बढ़ाया गया। अंततः मंगलवार रात को अमेरिका, इजरायल और ईरान दो हफ्ते के अस्थायी सीजफायर पर सहमत हो गए।

इस घटनाक्रम से यह भी संकेत मिलता है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप सार्वजनिक तौर पर भले ही ईरान को कड़ी धमकियां दे रहे थे, लेकिन अंदरखाने वे जल्द से जल्द सीजफायर चाहते थे। रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप बढ़ती तेल कीमतों और ईरान की मजबूत स्थिति को लेकर चिंतित थे और 21 मार्च के बाद से ही युद्धविराम के लिए प्रयासरत थे।

अमेरिका और ईरान से लगातार संपर्क

घटनाक्रम की समय-सीमा पर नजर डालें तो ट्रंप की तय डेडलाइन के करीब आते ही पाकिस्तान के शीर्ष अधिकारियों ने अमेरिका और ईरान के बीच लगातार संपर्क बनाए रखा। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ (Shehbaz Sharif) ने भी इस प्रस्ताव को सार्वजनिक किया, हालांकि एक रिपोर्ट में दावा किया गया कि व्हाइट हाउस ने इस बयान को पहले ही मंजूरी दे दी थी।

US-Iran War : सीजफायर के कुछ घंटों बाद ही ईरानी ऑयल रिफाइनरी पर हमला, ईरान ने कुवैत पर किया अटैक

बातचीत के दौरान अमेरिका ने 15-सूत्रीय प्रस्ताव रखा, जबकि ईरान की ओर से 5 और 10-सूत्रीय सुझाव सामने आए। समय के साथ ईरान कुछ मुद्दों पर नरम रुख अपनाने लगा, जिसमें यूरेनियम भंडार को सीमित करने जैसे प्रस्ताव शामिल थे।

कुछ गुट थे समझौते के खिलाफ

हालांकि, ईरान के अंदर भी इस सीजफायर को लेकर मतभेद देखने को मिले। इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के भीतर युद्ध जारी रखने और बातचीत करने को लेकर दो धड़े बन गए थे। कुछ गुट इस समझौते के खिलाफ थे और अमेरिका के साथ किसी भी तरह की बातचीत को लेकर सख्त रुख अपनाए हुए थे।

इसी बीच, सऊदी अरब के जुबैल क्षेत्र पर हुए ड्रोन हमले को बातचीत को पटरी से उतारने की कोशिश माना गया। पाकिस्तान ने इस हमले पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए ईरान को स्पष्ट संकेत दिया कि ऐसे कदम शांति प्रयासों को नुकसान पहुंचा सकते हैं।

Vande Mataram Controversy : वंदे मातरम बोलेंगे तो दोजख की आग में जलेंगे… पार्षद रुबीना इकबाल का विवादित बयान

आखिरकार, बढ़ते दबाव और कूटनीतिक प्रयासों के बीच ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियान ने पाकिस्तान के साथ बातचीत के लिए अपने प्रतिनिधि भेजने पर सहमति दे दी। इस तरह कई देशों की सक्रिय भूमिका के बाद अस्थायी सीजफायर संभव हो पाया, लेकिन क्षेत्र में स्थायी शांति अब भी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *