Iran US Israel War : तेहरान। मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध के बीच ईरान ने साफ कर दिया है कि वह पीछे हटने वाला नहीं है। ईरान ने कहा है कि जब तक उसे युद्ध में हुए नुकसान का मुआवजा नहीं मिलता और उस पर लगे सभी आर्थिक प्रतिबंध नहीं हटाए जाते, तब तक संघर्ष जारी रहेगा। साथ ही ईरान ने अमेरिका से यह भी मांग की है कि भविष्य में किसी भी तरह की दखलंदाजी न करने की ठोस गारंटी दी जाए।
सैन्य नेतृत्व का बयान और सख्त शर्तें
ईरान के वरिष्ठ सैन्य सलाहकार मोहसिन रजेई ने टीवी पर दिए बयान में कहा कि देश की सेना पूरी ताकत से ऑपरेशन चला रही है और नया नेतृत्व स्थिति को मजबूती से संभाल रहा है।
उन्होंने कहा कि ईरान की शर्तें बिल्कुल स्पष्ट हैं और बिना इन्हें पूरा किए किसी भी तरह की बातचीत संभव नहीं है। वहीं ईरानी संसद के नेताओं ने भी कहा है कि देश की जनता हमलावरों को कड़ी सजा देने की मांग कर रही है।
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जंग लंबी खिंचने की वजह क्या
मोहसिन रजेई ने दावा किया कि यह युद्ध एक हफ्ते में खत्म हो सकता था, लेकिन इजराइल के रुख के कारण यह लंबा खिंच गया। उनके अनुसार अमेरिका युद्धविराम के लिए तैयार था, लेकिन इजराइल के प्रधानमंत्री के फैसलों ने संघर्ष को जारी रखा। रजेई ने यह भी कहा कि कुछ समय बाद अमेरिका को भी यह समझ आ गया कि इस युद्ध में जीत का कोई स्पष्ट रास्ता नहीं है।
इजराइल में हमले और हालात
दूसरी ओर इजराइल के दक्षिणी हिस्सों में मिसाइल हमलों की खबरें सामने आई हैं। सेना के अनुसार कई इलाकों में सर्च और रेस्क्यू टीमें तैनात की गई हैं और लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है। हालांकि कुछ जगहों पर मिसाइल खुले इलाकों में गिरने से बड़ा नुकसान टल गया है, लेकिन तनाव लगातार बना हुआ है।
तेल बाजार में हलचल
इस युद्ध के बीच वैश्विक बाजार में भी हलचल तेज हो गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति के बयान से ठीक पहले तेल बाजार में भारी ट्रेडिंग होने से इनसाइडर ट्रेडिंग की आशंका जताई जा रही है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक कुछ ही मिनटों में करोड़ों डॉलर का दांव लगाया गया, जिसके बाद तेल की कीमतों में अचानक गिरावट आई और कई निवेशकों को बड़ा मुनाफा हुआ।
वैश्विक असर और बढ़ती चिंता
इस युद्ध का असर अब दुनिया के कई देशों पर दिखाई देने लगा है। दक्षिण कोरिया ने होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव को लेकर चिंता जताई है, वहीं जापान ने तेल की संभावित किल्लत को देखते हुए अपने भंडार से सप्लाई शुरू करने का फैसला किया है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर हालात जल्द नहीं सुधरे तो इसका असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर और गहरा हो सकता है।
आगे क्या होगा
ईरान और अमेरिका-इजराइल के बीच बढ़ते टकराव ने हालात को बेहद गंभीर बना दिया है। एक तरफ जहां बातचीत की संभावना कमजोर दिख रही है, वहीं दूसरी तरफ सैन्य कार्रवाई तेज होती जा रही है। ऐसे में आने वाले दिनों में यह संघर्ष किस दिशा में जाएगा, इस पर पूरी दुनिया की नजर बनी हुई है।