Iran-Israel War : तेहरान। अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच जारी युद्ध का आज 20वां दिन है। हालात लगातार तनावपूर्ण बने हुए हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने ईरान को सख्त चेतावनी देते हुए कहा है कि अगर कतर पर दोबारा हमला हुआ तो अमेरिका बड़ी सैन्य कार्रवाई करेगा। उन्होंने साफ कहा कि कतर पर हमला अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
इस तनाव की शुरुआत उस समय हुई जब इज़राइल ने ईरान के पार्स गैस प्लांट पर हमला किया। इसके जवाब में ईरान ने कतर के सबसे बड़े गैस प्लांट ‘रास लफान’ पर मिसाइल हमला कर दिया। इस हमले के बाद वहां आग लग गई और काफी नुकसान हुआ।
हालांकि बाद में आग को पूरी तरह काबू में कर लिया गया और किसी के घायल होने की खबर नहीं है। इसके बाद कतर ने ईरान पर “रेड लाइन पार करने” का आरोप लगाया और ईरानी अधिकारियों को अवांछित व्यक्ति घोषित कर दिया।
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प (President Donald Trump) ने कहा कि अमेरिका को इजराइल के इस हमले की पहले से कोई जानकारी नहीं थी और कतर भी इसमें शामिल नहीं था। उनके अनुसार ईरान ने गलतफहमी में कतर को निशाना बनाया। ट्रम्प ने यह भी कहा कि वे युद्ध नहीं चाहते, लेकिन अगर कतर पर फिर हमला हुआ तो अमेरिका सख्त कदम उठाएगा।
अमेरिकी इंटेलिजेंस का दावा: ईरान ने न्यूक्लियर प्रोग्राम दोबारा शुरू नहीं किया
अमेरिका की खुफिया एजेंसी की प्रमुख तुलसी गबार्ड (Tulsi Gabbard) ने कहा है कि ईरान ने अपना न्यूक्लियर प्रोग्राम दोबारा शुरू नहीं किया है। उनके मुताबिक पिछले साल जून के हमलों के बाद ईरान की यह क्षमता लगभग खत्म हो गई थी।
उन्होंने बताया कि 2025 में अमेरिका और इजराइल के हमलों के बाद ईरान ने इसे दोबारा शुरू करने की कोई कोशिश नहीं की। यह बयान ट्रम्प के दावों से अलग माना जा रहा है। ट्रम्प पहले कह चुके हैं कि ईरान का न्यूक्लियर प्रोग्राम खतरा है और इसी वजह से हाल का युद्ध जरूरी था।
वहीं डेमोक्रेटिक नेता मार्क वार्नर ने कहा कि गबार्ड ने अपनी बात का वह हिस्सा सार्वजनिक रूप से नहीं बताया, जो ट्रम्प के दावों से अलग था। ईरान पहले से कहता आया है कि वह परमाणु हथियार नहीं बना रहा और कुछ विशेषज्ञ भी मानते हैं कि फिलहाल उससे तुरंत बड़ा खतरा नहीं है।
ईरान में तीन लोगों को फांसी
ईरान में जनवरी में हुए सरकार विरोधी प्रदर्शनों के दौरान पुलिसकर्मियों की हत्या के मामले में तीन लोगों को फांसी दे दी गई है। रिपोर्ट के मुताबिक इन लोगों को दो पुलिस अधिकारियों की हत्या का दोषी पाया गया था।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार इस साल की शुरुआत में हुए विरोध प्रदर्शनों में भारी हिंसा हुई थी और करीब 3,117 लोगों की मौत हुई थी। वहीं मानवाधिकार कार्यकर्ता समाचार एजेंसी का कहना है कि असली आंकड़ा इससे ज्यादा हो सकता है। एजेंसी के अनुसार अब तक 6,854 मौतों की पुष्टि हो चुकी है और 11,280 से ज्यादा मामलों की जांच जारी है।
लेबनान में इजराइली हमले
पिछले दो दिनों में लेबनान में इजराइल के हमलों में 45 लोगों की मौत हो गई है। वहां के स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक राजधानी बेरूत में सबसे ज्यादा नुकसान हुआ। यहां 11 लोगों की मौत हुई और 45 लोग घायल हुए, जिनमें 14 बच्चे भी शामिल हैं। इसके अलावा देश के अन्य इलाकों में भी हमले हुए, जिनमें कई लोगों की जान गई और कई घायल हुए।
कतर का कड़ा कदम
कतर ने ईरानी दूतावास के मिलिट्री और सिक्योरिटी अधिकारियों को “पर्सोना नॉन ग्राटा” यानी अवांछित व्यक्ति घोषित कर दिया है। कतर ने उनसे 24 घंटे के भीतर देश छोड़ने को कहा है।
कतर के विदेश मंत्रालय ने इस संबंध में ईरान के दूतावास को आधिकारिक नोट भी भेजा है। कतर का कहना है कि ईरान बार-बार उसके खिलाफ कार्रवाई कर रहा है और उसकी सुरक्षा तथा संप्रभुता का उल्लंघन कर रहा है।
युद्ध के लिए बड़े बजट की मांग
अमेरिकी अखबार द वाशिंगटन पोस्ट (The Washington Post) की रिपोर्ट के मुताबिक पेंटागन ने ईरान के खिलाफ युद्ध के लिए व्हाइट हाउस से 200 अरब डॉलर से ज्यादा का बजट मांगा है। रिपोर्ट में कहा गया है कि अब तक इस युद्ध की लागत 11 अरब डॉलर से ज्यादा हो चुकी है और यह प्रस्ताव अमेरिकी कांग्रेस की मंजूरी के लिए भेजा जा सकता है।
ईरान की चेतावनी
ईरान के नए सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई (Mojtaba Khamenei) ने कहा है कि सिक्योरिटी चीफ अली लारिजानी (Ali Larijani) की हत्या का बदला लिया जाएगा। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि हर खून की एक कीमत होती है।
युद्ध के बीच अंतरराष्ट्रीय हालात
इस बीच होर्मुज स्ट्रेट से तेल आपूर्ति रुकने के कारण दुनिया की अर्थव्यवस्था पर असर पड़ रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने अपने सहयोगी NATO देशों से इस समुद्री रास्ते को खोलने में मदद मांगी है। हालांकि नाटो देशों ने साफ कर दिया है कि वे होर्मुज स्ट्रेट में अपने युद्धपोत नहीं भेजेंगे।
युद्ध में मारे गए प्रमुख अधिकारी
इस युद्ध के दौरान ईरान के कई बड़े नेता और अधिकारी मारे गए हैं। इनमें अली खामेनेई, अली शामखानी, मोहम्मद पाकपुर, अज़ीज़ नसीरज़ादेह, अब्दोलरहीम मौसवी और घोलमरेज़ा सोलेमानी जैसे नाम शामिल हैं।