Hindu Nav Varsh 2026 : नई दिल्ली। भारतीय परंपरा में गुड़ी पड़वा और उगादी के साथ हिंदू नववर्ष की शुरुआत बेहद खास मानी जाती है। इस वर्ष 19 मार्च से नवसंवत्सर का आरंभ हो रहा है। इस दिन सुबह पूजा-अर्चना के बाद नीम की पत्तियां और मिश्री या गुड़ खाने की परंपरा सदियों से चली आ रही है, जिसका धार्मिक, दार्शनिक और वैज्ञानिक महत्व माना जाता है।
जीवन के संतुलन का प्रतीक
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार नववर्ष के पहले दिन नीम और मिश्री का सेवन जीवन के संतुलन का प्रतीक है। नीम का कड़वा स्वाद जीवन की चुनौतियों, संघर्ष और कठिनाइयों को दर्शाता है, जबकि मिश्री की मिठास सुख, सफलता और खुशियों का संकेत देती है। यह परंपरा हमें सिखाती है कि जीवन में सुख-दुख दोनों को स्वीकार करते हुए संतुलन बनाए रखना जरूरी है।
ब्रह्मा ने की थी सृष्टि की रचना
पौराणिक दृष्टि से भी इस दिन का विशेष महत्व है। मान्यता है कि ब्रह्मा ने चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि को सृष्टि की रचना की थी। इसी कारण इस दिन को नई शुरुआत और नववर्ष के रूप में मनाया जाता है। लोग इस दिन भगवान की पूजा कर सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना करते हैं।
नीम का सेवन लाभकारी
आयुर्वेद के अनुसार भी नीम का सेवन इस समय लाभकारी माना जाता है। मौसम बदलने यानी बसंत से गर्मी के बीच संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। नीम की पत्तियों में मौजूद एंटीबैक्टीरियल और एंटीवायरल गुण शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में मदद करते हैं, जबकि मिश्री शरीर को ऊर्जा देती है और कड़वाहट को संतुलित करती है।
कई जगहों पर नीम की कोमल पत्तियों को मिश्री, गुड़, इमली या कच्चे आम के साथ मिलाकर खाया जाता है। इसे नववर्ष की शुभ शुरुआत और स्वास्थ्य के लिए लाभकारी माना जाता है।
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क्या है ज्योतिष मान्यता
ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, जिस दिन नववर्ष शुरू होता है उसी दिन का ग्रह उस वर्ष का राजा माना जाता है। इस बार नववर्ष गुरुवार को पड़ रहा है, इसलिए गुरु ग्रह को वर्ष का राजा माना गया है, जबकि मंगल ग्रह मंत्री होंगे।
इसके अलावा चंद्र देव को सेनापति, मेघाधिपति और फलधिपति माना गया है। गुरु ग्रह नीरसाधिपति, धनाधिपति और सस्याधिपति भी रहेंगे, जबकि बुध धान्याधिपति और शनि रसाधिपति माने गए हैं।