Kishan Modi : भोपाल। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में प्रवर्तन निदेशालय (Enforcement Directorate) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए जयश्री गायत्री फूड प्रोडक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड के डायरेक्टर किशन मोदी को गिरफ्तार। फिलहाल जांच एजेंसी इस पूरे नेटवर्क को खंगालने में जुटी है। आरोपी को विशेष अदालत ने 18 मार्च तक ED रिमांड पर भेज दिया है।
फर्जी लैब रिपोर्ट से निर्यात का आरोप
ED की जांच में सामने आया है कि कंपनी ने डेयरी उत्पादों के निर्यात के लिए कथित तौर पर फर्जी लैब परीक्षण रिपोर्ट का सहारा लिया। इंदौर की एक निर्यात निरीक्षण एजेंसी से ये रिपोर्ट हासिल कर घी, पनीर और मक्खन जैसे उत्पाद विदेश भेजे गए। इन रिपोर्टों के आधार पर कंपनी ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में अपनी सप्लाई जारी रखी और बड़ी मात्रा में विदेशी मुद्रा अर्जित की।
₹20.59 करोड़ की कमाई पर ED का दावा
एजेंसी के मुताबिक इस पूरे तरीके से करीब ₹20.59 करोड़ की कमाई हुई, जिसे प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत ‘प्रोसीड्स ऑफ क्राइम’ माना गया है। अब ED इस रकम के स्रोत और इसके इस्तेमाल की गहराई से जांच कर रही है।
देश से लेकर विदेश तक फैला कारोबार
जांच में यह भी सामने आया है कि कंपनी का नेटवर्क काफी बड़ा था। देश के भीतर यह कई प्रमुख डेयरी ब्रांड्स से उत्पाद खरीदती थी, जबकि विदेशों में ओमान, सऊदी अरब, दुबई, मिस्र, जॉर्डन और श्रीलंका जैसे देशों में सप्लाई की जा रही थी। इससे संकेत मिलते हैं कि मामला सिर्फ स्थानीय स्तर का नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर का हो सकता है।
पुराने केस से जुड़ती कड़ियां
बता दें कि, इस मामले की जड़ें भी पुरानी हैं। 29 अगस्त 2023 को भोपाल के हबीबगंज थाने में दर्ज एफआईआर के आधार पर ED ने 22 जुलाई 2024 को मनी लॉन्ड्रिंग केस दर्ज किया था। इससे पहले भी ED कंपनी से जुड़े ठिकानों पर छापेमारी कर चुकी है। उसी दौरान यह मामला पहली बार चर्चा में आया था।
तेजी से बढ़ा कंपनी का कारोबार
दिलचस्प बात यह है कि 2013 में महज 1.75 करोड़ रुपये के टर्नओवर से शुरू हुई कंपनी ने 2023 तक करीब 600 करोड़ रुपये का कारोबार होने का दावा किया। इस तेज ग्रोथ ने भी जांच एजेंसियों का ध्यान खींचा।
अब आगे क्या?
फिलहाल ED इस मामले में जुड़े अन्य लोगों और संस्थाओं की भूमिका की जांच कर रही है। संभावना है कि आने वाले दिनों में इस केस में और खुलासे हो सकते हैं, जिससे यह मामला और बड़ा रूप ले सकता है।
भोपाल का ‘मिल्क मैजिक’ केस अब सिर्फ एक गिरफ्तारी तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह देश के डेयरी निर्यात और फूड सेफ्टी सिस्टम पर भी सवाल खड़े कर रहा है।आने वाले समय में जांच के नतीजे इस पूरे नेटवर्क की असल तस्वीर सामने ला सकते हैं।