HIGHLIGHTS:
- रुपया 93.71 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर बंद
- एक दिन में 1.08 रुपये की गिरावट
- महंगे क्रूड से बढ़ा इंपोर्ट बिल
- विदेशी निवेशकों की तेज बिकवाली
- RBI ने बाजार में किया हस्तक्षेप
DOLLAR VS RUPEE : नई दिल्ली। डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया ऐतिहासिक गिरावट के साथ 93.71 के स्तर पर बंद हुआ, जो अब तक का सबसे निचला स्तर मन जा रहा है। बता दें कि एक ही दिन में 1.08 रुपये की गिरावट और जनवरी से अब तक करीब 4% की कमजोरी ने बाजार में चिंता बढ़ा दी है।
ग्लोबल और जियोपॉलिटिकल असर
मिडिल ईस्ट, खासकर ईरान से जुड़े तनाव ने वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को प्रभावित किया है। इससे निवेशकों में अनिश्चितता बढ़ी है और वे सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर रुख कर रहे हैं, जिससे अमेरिकी डॉलर मजबूत हुआ है।
कच्चे तेल की कीमतों का दबाव
भारत अपनी जरूरत का लगभग 89% कच्चा तेल आयात करता है। हाल ही में ब्रेंट क्रूड की कीमत 119 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थी, जो बाद में 108 डॉलर के आसपास आ गई। महंगे तेल से देश का इंपोर्ट बिल बढ़ता है और डॉलर की मांग तेज हो जाती है, जिससे रुपये पर दबाव बढ़ता है।
मजबूत अमेरिकी डॉलर
डॉलर इंडेक्स में बढ़त यह दिखाती है कि वैश्विक स्तर पर अमेरिकी मुद्रा की मांग बढ़ रही है। इसका सीधा असर भारतीय रुपये पर पड़ा है, जिससे इसकी वैल्यू में गिरावट आई है।
विदेशी निवेशकों की बिकवाली
विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) द्वारा बड़े पैमाने पर बिकवाली भी रुपये की कमजोरी का प्रमुख कारण है। हाल ही में ₹7,558 करोड़ का नेट आउटफ्लो दर्ज किया गया, जिससे बाजार में डॉलर की मांग और बढ़ गई।
RBI का हस्तक्षेप
भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने रुपये को स्थिर रखने के लिए मार्च में 15 अरब डॉलर से ज्यादा की बिक्री की है। हालांकि यह कदम अल्पकालिक राहत दे सकता है, लेकिन वैश्विक दबाव अभी भी बने हुए हैं।
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एक्सपर्ट्स की राय
दिलीप परमार के अनुसार, विदेशी फंड आउटफ्लो और महंगे कच्चे तेल की दोहरी मार से रुपया कमजोर हुआ है। आने वाले समय में भी इसमें उतार-चढ़ाव बना रह सकता है।