Pitta Control Ayurvedic Tips : नई दिल्ली। आज की तेज रफ्तार जिंदगी, अनियमित खानपान और ज्यादा मसालेदार भोजन के कारण शरीर में पित्त बढ़ने की समस्या तेजी से आम होती जा रही है। आयुर्वेद के अनुसार आयुर्वेद (Ayurveda) में शरीर तीन दोषों- वात, पित्त और कफ- पर आधारित होता है। इनमें पित्त अग्नि और जल तत्व का मिश्रण है। जब यह असंतुलित हो जाता है, तो पाचन खराब होना, एसिडिटी, त्वचा संबंधी समस्याएं और चिड़चिड़ापन जैसी दिक्कतें सामने आने लगती हैं।
खानपान में बदलाव करना जरूरी
विशेषज्ञों का मानना है कि पित्त को नियंत्रित करने के लिए सबसे पहले खानपान में बदलाव करना जरूरी है। ऐसे में हल्के और सुपाच्य अनाज जैसे जौ, चावल और गेहूं का सेवन करना फायदेमंद होता है। ये खाद्य पदार्थ पाचन को बेहतर बनाते हैं और शरीर की आंतरिक गर्मी को कम करने में मदद करते हैं। वहीं उड़द दाल और कुलथी जैसी गरम तासीर वाली चीजों से दूरी बनाना बेहतर होता है, क्योंकि ये पित्त को और बढ़ा सकती हैं।
ये फल देते है शरीर को ठंडक
फलों में मीठे और रसीले विकल्प पित्त संतुलन के लिए बेहद लाभकारी माने जाते हैं। सेब, नाशपाती, अंजीर और किशमिश जैसे फल शरीर को ठंडक देते हैं और पाचन सुधारते हैं। आमतौर पर खट्टे फलों से बचने की सलाह दी जाती है, लेकिन आंवला और अनार सीमित मात्रा में लिया जा सकता है, क्योंकि ये शरीर को पोषण देने के साथ पित्त को संतुलित करने में मदद करते हैं।
इन सब्जियों का सेवन फायदेमंद
सब्जियों की बात करें तो खीरा, करेला, मटर और परवल जैसी ठंडी या कड़वी तासीर वाली सब्जियां पित्त को संतुलित रखने में अहम भूमिका निभाती हैं। इसके विपरीत बैंगन, कच्चा प्याज, लहसुन और पालक जैसी गरम प्रकृति वाली सब्जियों का सेवन कम करना चाहिए, क्योंकि ये शरीर की गर्मी बढ़ा सकती हैं।
हींग और काली मिर्च बढ़ाते हैं एसिडिटी
रसोई में मौजूद कुछ मसाले भी पित्त नियंत्रण में सहायक होते हैं। सौंफ, धनिया, इलायची और केसर जैसे मसाले शरीर को ठंडक प्रदान करते हैं और पाचन तंत्र को दुरुस्त रखते हैं। वहीं हींग और काली मिर्च का अधिक सेवन जलन और एसिडिटी को बढ़ा सकता है, इसलिए इनका उपयोग सीमित मात्रा में ही करना चाहिए।
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ठंडा दूध, देसी घी और छाछ लाभकारी
डेयरी उत्पादों में ठंडा दूध, शुद्ध देसी घी और ताजी छाछ पित्त प्रकृति वाले लोगों के लिए लाभकारी माने जाते हैं। ये शरीर को ठंडक देने के साथ पाचन को भी मजबूत बनाते हैं।हालांकि केवल खानपान ही नहीं, बल्कि जीवनशैली में बदलाव भी उतना ही जरूरी है।
पित्त बढ़ने पर तेज धूप से बचना चाहिए और ठंडे वातावरण में समय बिताना फायदेमंद होता है। मानसिक शांति बनाए रखने के लिए हल्का संगीत सुनना और पानी के पास समय बिताना भी मददगार साबित हो सकता है।