MP Monsoon Session : मप्र विधानसभा में NEET पर हंगामा! CM कार्यालय के सामने धरना, केन-बेतवा-बरगी तक सरकार घिरी
MP Monsoon Session : नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्रों के प्रदर्शन और NEET परीक्षा विवाद पर सदन में स्थगन प्रस्ताव के जरिए चर्चा कराने की मांग की।
MP Monsoon Session : भोपाल। मध्यप्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र में बुधवार को NEET पेपर लीक का मुद्दा जोर-शोर से उठा। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्रों के प्रदर्शन और NEET परीक्षा विवाद पर सदन में स्थगन प्रस्ताव के जरिए चर्चा कराने की मांग की। हालांकि, संसदीय कार्य मंत्री राकेश सिंह ने कहा कि यह केंद्र सरकार से जुड़ा विषय है और इस पर राज्य विधानसभा में चर्चा नहीं कराई जा सकती। अध्यक्ष की ओर से तत्काल चर्चा की अनुमति नहीं मिलने पर कांग्रेस विधायकों ने सदन में नारेबाजी की और विरोध स्वरूप वॉकआउट कर दिया।
मुख्यमंत्री कार्यालय के सामने धरने पर बैठे कांग्रेस विधायक
सदन से बाहर आने के बाद नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार के नेतृत्व में कांग्रेस विधायक विधानसभा परिसर में मुख्यमंत्री कार्यालय के सामने धरने पर बैठ गए। उमंग सिंघार ने कहा कि छात्रों के भविष्य से जुड़े मुद्दे पर चर्चा से इनकार करना युवाओं का अपमान है।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस छात्रों की आवाज उठाती रहेगी और जब तक उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया जाएगा, तब तक विरोध जारी रहेगा। उन्होंने इसे केवल राजनीतिक मुद्दा नहीं बल्कि लाखों विद्यार्थियों के भविष्य से जुड़ा मामला बताया।
काली पट्टी बांधकर कांग्रेस ने जताया विरोध
NEET पेपर लीक मामले को लेकर कांग्रेस विधायकों ने विधानसभा पहुंचने से पहले काली पट्टी बांधी। सभी विधायक इसी प्रतीकात्मक विरोध के साथ सदन की कार्यवाही में शामिल हुए। कांग्रेस का कहना है कि यह विरोध छात्रों के साथ न्याय और परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता की मांग का प्रतीक है।
विधानसभा के बाहर मीडिया से बातचीत में उमंग सिंघार ने भारतीय जनता पार्टी पर निशाना साधते हुए कहा कि राजनीतिक टकराव के बजाय सरकार को युवाओं, किसानों और आम जनता की समस्याओं के समाधान पर ध्यान देना चाहिए।
केन-बेतवा परियोजना पर पुनर्वास और मुआवजे का मुद्दा उठा
प्रश्नकाल के दौरान केन-बेतवा परियोजना से प्रभावित परिवारों के पुनर्वास और मुआवजे का मुद्दा भी सदन में गूंजा। उमंग सिंघार ने आरोप लगाया कि कई प्रभावित परिवारों को अब तक उचित मुआवजा नहीं मिला है और परियोजना में अनियमितताएं हुई हैं। उन्होंने करोड़ों रुपये के घोटाले का आरोप भी लगाया।
जवाब में राजस्व मंत्री करण सिंह वर्मा ने बताया कि पन्ना के सात गांवों के 1,321 परिवारों का विस्थापन किया गया है। इसके अलावा आठ गांवों के 1,699 किसान भूमि अधिग्रहण से प्रभावित हुए हैं।
छतरपुर जिले के 14 गांवों सहित कुल 3,718 परिवार इस परियोजना से प्रभावित हैं। उन्होंने कहा कि यदि कोई पात्र व्यक्ति मुआवजे से वंचित रह गया है तो दावा प्रस्तुत करने पर जांच के बाद भुगतान किया जाएगा।
उमंग सिंघार की मांग पर मंत्री ने सर्वे रिपोर्ट सदन के पटल पर रखने की सहमति भी दी। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने आश्वासन दिया कि यदि किसी प्रकार की अनियमितता या मुआवजे में चूक हुई है तो एक महीने के भीतर जांच कर उसका समाधान किया जाएगा।
बरगी डैम हादसा और चंबल परियोजना पर भी सरकार घिरी
जबलपुर के बरगी डैम में क्रूज पलटने की घटना का मुद्दा भी विधानसभा में उठा। कांग्रेस विधायक लखन घनघोरिया ने आरोप लगाया कि राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) के नियमों और मौसम विभाग की चेतावनी के बावजूद लापरवाही बरती गई, जिसके कारण यह हादसा हुआ।
उन्होंने आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने और प्रशासनिक कार्रवाई की जानकारी भी मांगी। पर्यटन मंत्री धर्मेंद्र सिंह लोधी ने बताया कि 13 लोगों की मौत के मामले की न्यायिक जांच के लिए राज्य सरकार ने एक सदस्यीय जांच आयोग का गठन किया है।
इसी दौरान चंबल सूक्ष्म सिंचाई परियोजना में कथित अनियमितताओं का मुद्दा भी सदन में उठा। कांग्रेस विधायक बाबू जंडेल ने आरोप लगाया कि परियोजना के नाम पर बड़ा घोटाला हुआ है और सिंचाई के दावों पर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि यदि परियोजना के दावे सही साबित हुए तो वह अपने पद से इस्तीफा देने को तैयार हैं।
मंत्री कृष्णा गौर ने सभी आरोपों से इनकार करते हुए कहा कि परियोजना के तहत संबंधित कंपनी को पांच वर्षों तक रखरखाव का दायित्व सौंपा गया है। विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने पूरे मामले की विभागीय जांच कराने के निर्देश दिए।