MP Monsoon Break : मानसून ब्रेक ने बढ़ाई चिंता! MP के 28 जिलों में 16% से 78% कम बारिश, फसलें सूखने से किसान परेशान
MP Monsoon Break : मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार अब तक प्रदेश में 247 मिमी बारिश दर्ज की गई है, जबकि इस समय तक 291 मिमी वर्षा होनी चाहिए थी।
MP Monsoon Break : भोपाल। मध्यप्रदेश में मानसून की धीमी रफ्तार अब किसानों के लिए बड़ी चिंता का कारण बनती जा रही है। प्रदेश के कई हिस्सों में सामान्य से कम बारिश होने के कारण खेतों में दरारें पड़ने लगी हैं और फसलें सूखने की स्थिति में पहुंच रही हैं। मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार अब तक प्रदेश में 247 मिमी बारिश दर्ज की गई है, जबकि इस समय तक 291 मिमी वर्षा होनी चाहिए थी। यानी प्रदेश में औसतन 15 प्रतिशत कम बारिश हुई है। सबसे अधिक असर पूर्वी मध्यप्रदेश के जिलों में देखा जा रहा है, जहां धान की रोपाई और खरीफ फसलों पर संकट गहराने लगा है।
कई जिलों में बिगड़े हालात
बारिश की कमी का सबसे अधिक प्रभाव पूर्वी मध्यप्रदेश में दिखाई दे रहा है। यहां सामान्य से 26 प्रतिशत कम वर्षा दर्ज की गई है, जबकि पश्चिमी मध्यप्रदेश में यह कमी करीब 5 प्रतिशत है। प्रदेश के 55 जिलों में से 28 जिलों में 16 से 78 प्रतिशत तक कम बारिश हुई है।
आलीराजपुर में सबसे अधिक लगभग 79 प्रतिशत और रीवा में करीब 63 प्रतिशत कम वर्षा रिकॉर्ड की गई है। इसके विपरीत राजधानी भोपाल में अब तक 327.4 मिमी बारिश हो चुकी है, जो सामान्य से लगभग 9 प्रतिशत अधिक है। हालांकि अधिकांश कृषि प्रधान जिलों में बारिश की कमी ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है।
धान, सोयाबीन और मक्का की फसलें सबसे ज्यादा प्रभावित
रीवा, मऊगंज, मैहर, सीधी, सिंगरौली, मंडला, शहडोल, कटनी और जबलपुर संभाग के कई इलाकों में धान की रोपाई प्रभावित हुई है। कई स्थानों पर खेत सूखने लगे हैं और किसानों को दोबारा बुवाई की आशंका सताने लगी है। आलीराजपुर में मक्का, कपास और सोयाबीन की फसलें नमी की कमी से प्रभावित हैं।
मुरैना में 11 जुलाई के बाद बारिश नहीं होने से बाजरे की फसल पर संकट बढ़ गया है। रायसेन में धान की रोपाई लक्ष्य के मुकाबले बहुत कम हुई है, जबकि जबलपुर, सतना, मैहर, दतिया और नर्मदापुरम में भी धान, सोयाबीन, उड़द और मक्का की खेती प्रभावित हो रही है। कई किसान ट्यूबवेल के सहारे फसल बचाने की कोशिश कर रहे हैं।
4 दिन और बारिश नहीं हुई तो बढ़ सकती है परेशानी
कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अगले कुछ दिनों में अच्छी बारिश नहीं हुई तो कई जिलों में दोबारा बुवाई या रोपाई करनी पड़ सकती है। रीवा जिले में धान की केवल 41 प्रतिशत बुवाई हो सकी है और खेतों में दरारें पड़ने लगी हैं।
कई इलाकों में फसलों में पीलापन दिखाई देने लगा है। लगातार बारिश नहीं होने से मिट्टी में नमी कम हो रही है, जिससे खरीफ फसलों का विकास प्रभावित हो सकता है। किसानों को अब मौसम में जल्द सुधार की उम्मीद है।
मौसम विभाग ने कुछ जिलों के लिए जारी किया अलर्ट
मौसम विभाग ने आगामी दिनों के लिए प्रदेश के कुछ हिस्सों में बारिश की संभावना जताई है। शहडोल, रीवा और जबलपुर संभाग के जिलों में यलो अलर्ट जारी किया गया है। उमरिया और डिंडोरी जिलों में कहीं-कहीं भारी बारिश हो सकती है।
वहीं भोपाल, उज्जैन, इंदौर, नर्मदापुरम, सीहोर, रायसेन और विदिशा सहित कई जिलों में हल्की से मध्यम बारिश होने का अनुमान है। किसानों को उम्मीद है कि आने वाले दिनों में मानसून सक्रिय होगा और फसलों को राहत मिलेगी।