Delhi Protest Update : CJP आंदोलन के बीच संस्थापक अभिजीत दीपके को टाइफाइड, आज सरकार से तीसरी बैठक पर टिकी निगाहें
Delhi Protest Update : सरकार और CJP के बीच शनिवार दोपहर 3:30 बजे तीसरी बैठक होने की संभावना है।
Delhi Protest Update : नई दिल्ली। पेपर लीक के खिलाफ चल रहे आंदोलन के बीच कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके की तबीयत खराब हो गई है। उन्हें टाइफाइड हो गया है। उन्होंने शनिवार को वीडियो जारी कर इसकी जानकारी दी। दूसरी ओर, सरकार और CJP के बीच शनिवार दोपहर 3:30 बजे तीसरी बैठक होने की संभावना है। इस बैठक में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे सहित कई अहम मुद्दों पर चर्चा हो सकती है।
बैठक से पहले बढ़ी सुरक्षा व्यवस्था
सरकार और CJP के बीच प्रस्तावित बैठक से पहले दिल्ली पुलिस ने शुक्रवार देर रात जंतर-मंतर के आसपास सुरक्षा बढ़ा दी और अतिरिक्त बैरिकेडिंग की। CJP ने पहले ही चेतावनी दी थी कि यदि शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा नहीं देते हैं तो 20 जुलाई की तरह फिर बड़ा आंदोलन किया जाएगा। पार्टी के प्रवक्ता आशुतोष रांका ने कहा कि मंत्री के इस्तीफे के बिना सरकार से बातचीत का कोई मतलब नहीं रहेगा।
समझौते और प्रमुख मांगों पर नजर
CJP का दावा है कि पिछली बैठक में सरकार ने आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को 1-1 करोड़ रुपये मुआवजा देने और प्रदर्शनकारियों पर दर्ज मामलों को वापस लेने पर सहमति जताई थी।
पार्टी को उम्मीद है कि इन फैसलों पर शनिवार को लिखित समझौता हो सकता है। हालांकि आंदोलन की सबसे बड़ी मांग केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे को लेकर सरकार के जवाब का अभी इंतजार है।
फास्ट-ट्रैक कोर्ट ने शुरू की सुनवाई
दिल्ली की स्पेशल फास्ट-ट्रैक कोर्ट ने NEET पेपर लीक मामले की सुनवाई शुरू कर दी है। स्पेशल जज अनु ग्रोवर बलिगा ने शनिवार को कार्यभार संभाल लिया। दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश पर गठित यह अदालत पेपर लीक और सार्वजनिक परीक्षाओं में गड़बड़ी से जुड़े मामलों की त्वरित सुनवाई करेगी। सार्वजनिक परीक्षाओं में अनुचित साधनों की रोकथाम अधिनियम, 2024 के तहत दर्ज लंबित मामलों की सुनवाई भी इसी अदालत में होगी।
NTA अधिकारियों को हटाने पर CJP ने उठाए सवाल
सरकार द्वारा NTA के 47 अधिकारियों को हटाने के फैसले पर भी CJP ने प्रतिक्रिया दी है। प्रवक्ता आशुतोष रांका ने कहा कि पहले यह स्पष्ट होना चाहिए कि किन अधिकारियों पर कार्रवाई हुई है और इसके पीछे सरकार की मंशा क्या है। उनका कहना है कि केवल अधिकारियों को हटाने से समस्या का समाधान नहीं होगा, बल्कि पूरे मामले में पारदर्शिता और जवाबदेही भी जरूरी है।