MP Congress Infighting : भोपाल। उज्जैन में वीर भारत न्यास को कथित तौर पर एक रुपये में करीब 500 करोड़ रुपये मूल्य की जमीन आवंटित किए जाने के आरोपों को लेकर कांग्रेस के भीतर मतभेद खुलकर सामने आ गए हैं। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी द्वारा लगाए गए आरोपों के बाद पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने उज्जैन में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर इन आरोपों से असहमति जताई। इसके बाद पार्टी के अंदर बयानबाजी तेज हो गई और यह मामला अब संगठन के भीतर चर्चा का विषय बन गया है।
PTR Tiger Cubs : पन्ना टाइगर रिज़र्व में फिर गूंजी किलकारी! बाघिन ने दिया दो नन्हे शावकों को जन्म
निधि चतुर्वेदी ने दिग्विजय सिंह पर लगाए गंभीर आरोप
कांग्रेस की प्रदेश महासचिव निधि सत्यव्रत चतुर्वेदी ने सोशल मीडिया पर एक विस्तृत पोस्ट लिखकर दिग्विजय सिंह की सार्वजनिक प्रतिक्रिया पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि यदि प्रदेश अध्यक्ष के बयान से असहमति थी, तो इस मुद्दे पर पार्टी के आंतरिक मंचों पर चर्चा की जा सकती थी।
उनका कहना है कि मीडिया के सामने प्रदेश अध्यक्ष के बयान का सार्वजनिक रूप से खंडन करना पार्टी अनुशासन के अनुरूप नहीं है। उन्होंने कांग्रेस नेतृत्व से दिग्विजय सिंह के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई करने की भी मांग की।
साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि यह पूरा घटनाक्रम व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा से प्रेरित है। हालांकि, इन आरोपों पर दिग्विजय सिंह की ओर से कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
BJP ने भी कांग्रेस की अंदरूनी कलह पर साधा निशाना
मध्य प्रदेश सरकार में मंत्री विश्वास सारंग ने कांग्रेस के अंदर चल रहे विवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि पार्टी के नेता ही एक-दूसरे पर गंभीर आरोप लगा रहे हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस की गुटबाजी अब सार्वजनिक रूप से दिखाई दे रही है।
मंत्री सारंग ने यह भी कहा कि यदि कांग्रेस के अपने नेता ऐसे आरोप लगा रहे हैं, तो पार्टी नेतृत्व को इस मामले पर गंभीरता से ध्यान देना चाहिए। इस बीच राजनीतिक बयानबाजी के कारण यह मुद्दा और अधिक चर्चा में आ गया है।
क्या है पूरा उज्जैन जमीन विवाद?
पूरा विवाद उस समय शुरू हुआ जब प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने आरोप लगाया कि उज्जैन में वीर भारत न्यास को लगभग 500 करोड़ रुपये मूल्य की सरकारी जमीन मात्र एक रुपये में आवंटित की गई। इसके बाद दिग्विजय सिंह ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा कि उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर उन्हें जमीन आवंटन में किसी अनियमितता के पर्याप्त प्रमाण नहीं मिले।
उनके इस बयान के बाद कांग्रेस के भीतर मतभेद खुलकर सामने आ गए। अब निधि चतुर्वेदी की सोशल मीडिया पोस्ट ने इस विवाद को और राजनीतिक बना दिया है। फिलहाल यह मामला पार्टी के भीतर चर्चा और राजनीतिक प्रतिक्रियाओं का विषय बना हुआ है।