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Vande Matram Mandatory in Madarsas: शुभेंदु अधिकारी का बड़ा फैसला, अब से बंगाल के सभी मदरसों में गूंजेगा ‘वंदे मातरम्’

suvendu adhikari statement

HIGHLIGHTS:

  • बंगाल के मदरसों में ‘वंदे मातरम्’ अनिवार्य
  • सरकारी, सहायता प्राप्त और निजी मदरसे शामिल
  • प्रार्थना सभा में राष्ट्रगीत गाना होगा जरूरी
  • विपक्ष और मुस्लिम संगठनों ने उठाए सवाल
  • सोशल मीडिया पर फैसले को लेकर तेज बहस

 

Vande Matram Mandatory in Madarsas: कोलकाता। पश्चिम बंगाल में राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ को लेकर नई राजनीतिक बहस शुरू हो गई है। राज्य सरकार ने बड़ा फैसला लेते हुए सभी मदरसों में प्रार्थना सभा के दौरान ‘वंदे मातरम्’ गाना अनिवार्य कर दिया है। इस फैसले के बाद राज्य का राजनीतिक माहौल गर्म हो गया है। बीजेपी इसे राष्ट्रभक्ति से जुड़ा कदम बता रही है, जबकि विपक्ष इसे धार्मिक संस्थानों में सरकारी हस्तक्षेप मान रहा है।

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सभी श्रेणी के मदरसों पर लागू होगा नियम

जानकारी के अनुसार यह आदेश केवल सरकारी मदरसों तक सीमित नहीं रहेगा। सहायता प्राप्त, गैर सहायता प्राप्त और मान्यता प्राप्त सभी मदरसों में इसे लागू किया जाएगा। सूत्रों के मुताबिक अल्पसंख्यक कार्य और मदरसा शिक्षा विभाग की ओर से जारी निर्देश में कहा गया है कि क्लास शुरू होने से पहले होने वाली प्रार्थना सभा में ‘वंदे मातरम्’ गाना जरूरी होगा। साथ ही पुराने नियमों और प्रक्रियाओं में बदलाव की भी बात कही गई है।

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राष्ट्रवाद की राजनीति को बढ़ावा?

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह फैसला सिर्फ शिक्षा नीति तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका सीधा असर बंगाल की राजनीति पर भी पड़ सकता है। हाल के वर्षों में बीजेपी ने राज्य में राष्ट्रवाद और सांस्कृतिक मुद्दों को प्रमुखता से उठाया है। ऐसे में मदरसों को भी इस नीति के दायरे में लाना राजनीतिक रूप से अहम कदम माना जा रहा है।

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फैसले पर मिली-जुली प्रतिक्रियाएं

इस फैसले के बाद मुस्लिम संगठनों और विपक्षी दलों की प्रतिक्रियाएं सामने आने लगी हैं। कुछ लोगों का कहना है कि राष्ट्रगीत गाने में कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए, जबकि कुछ इसे धार्मिक स्वतंत्रता से जोड़कर देख रहे हैं। वहीं सोशल मीडिया पर भी इस फैसले को लेकर बहस तेज हो गई है। कई यूजर्स शुभेंदु अधिकारी की तारीफ कर रहे हैं, जबकि कुछ लोग इसे विवादित फैसला बता रहे हैं।

 

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