SC on Malda SIR Incident : नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल में एक न्यायिक अधिकारी के घेराव और उन्हें बंधक बनाए जाने की घटना पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने इस मामले में राज्य सरकार को जमकर फटकार लगाई और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए।
सुनवाई के दौरान भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने पश्चिम बंगाल में हुए विरोध प्रदर्शन से जुड़ी रिपोर्ट का संज्ञान लिया। उन्होंने कहा कि उन्हें देर रात सख्त आदेश जारी करना पड़ा, जिसके बाद ही प्रशासन सक्रिय हुआ। चीफ जस्टिस ने इस बात पर भी चिंता जताई कि जिस न्यायिक अधिकारी का घेराव किया गया, उसके घर में उस समय पांच साल का बच्चा भी मौजूद था।
सुप्रीम कोर्ट ने की निंदा
सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल को देश का “सबसे ज्यादा ध्रुवीकृत” राज्य बताते हुए इस घटना की कड़ी निंदा की। अदालत ने कहा कि यह घटना चुनावी प्रक्रिया में लगे अधिकारियों का मनोबल गिराने की एक सोची-समझी और उद्देश्यपूर्ण कोशिश है।
उपद्रव में कौन लोग शामिल थे?
सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस ने राज्य के एडवोकेट जनरल से नाराजगी जताते हुए कहा कि दुर्भाग्य से राज्य में हर मुद्दे को राजनीतिक नजरिए से देखा जाता है। उन्होंने कहा कि उन्हें पूरी जानकारी है कि उपद्रव में कौन लोग शामिल थे और वह रात 2 बजे तक स्थिति पर नजर बनाए हुए थे। उन्होंने इस पूरी घटना को बेहद दुर्भाग्यपूर्ण बताया।
बड़े अधिकारियों को जमकर फटकार
अदालत ने राज्य के शीर्ष अधिकारियों को भी कड़ी फटकार लगाई। इसमें मुख्य सचिव, गृह सचिव, पुलिस महानिदेशक (DGP) और जिला मजिस्ट्रेट शामिल हैं। कोर्ट ने सवाल किया कि जब पहले से जानकारी थी, तो न्यायिक अधिकारियों की सुरक्षित निकासी समय पर क्यों नहीं सुनिश्चित की गई।
कार्रवाई के आदेश के बाद भी नहीं उठाया ठोस कदम
सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने अपने आदेश में बताया कि न्यायिक अधिकारी का घेराव दोपहर करीब 3:30 बजे शुरू हुआ था। इसके बाद महापंजीयक ने प्रशासन को तुरंत कार्रवाई करने के लिए सूचित किया, लेकिन रात 8:30 बजे तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
बाद में गृह सचिव से संपर्क किया गया और डीजीपी ने हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के साथ बातचीत कर जल्द कार्रवाई का आश्वासन दिया, लेकिन इसके बावजूद मौके पर कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई।
कलकत्ता HC चीफ जस्टिस ने कही ये बात
इस बीच, कलकत्ता हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश ने अपने पत्र में कहा कि न तो जिला मजिस्ट्रेट और न ही पुलिस अधीक्षक घटनास्थल पर पहुंचे थे। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए उन्हें राज्य के डीजीपी और गृह सचिव को तत्काल तलब करना पड़ा।
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चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने इस घटना को अदालत के अधिकारियों को चुनौती देने की “शर्मनाक कोशिश” बताया। उन्होंने कहा कि यह न्यायिक अधिकारियों को हतोत्साहित करने और पूरी प्रक्रिया को बाधित करने के उद्देश्य से किया गया सुनियोजित कदम था।
साथ ही उन्होंने राज्य के मुख्य सचिव, डीजीपी और गृह सचिव के आचरण को पूरी तरह निंदनीय करार दिया। सुप्रीम कोर्ट के इस सख्त रुख के बाद अब इस मामले में आगे की कार्रवाई पर सभी की नजर बनी हुई है।