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Chandra Grahan 2026 : चंद्रग्रहण और अंतिम होलाष्टक 3 मार्च को, राहु का घातक असर; जानिए राशियों पर क्या प्रभाव

Chandra Grahan 2026

Chandra Grahan 2026 : नई दिल्ली। साल 2026 में दो चंद्र ग्रहण लगेंगे। पहला चंद्र ग्रहण 3 मार्च 2026 को और दूसरा 28 अगस्त 2026 को होगा। 3 मार्च को लगने वाला ग्रहण खण्डग्रास चंद्र ग्रहण रहेगा। खास बात यह है कि इसी दिन होलाष्टक का अंतिम दिन और होलिका दहन भी है, जिससे इसकी धार्मिक महत्ता और बढ़ गई है।

क्या है ग्रहण का समय?

नई दिल्ली के समय के अनुसार चंद्र ग्रहण की शुरुआत दोपहर 2:16 बजे उपच्छाया से होगी। प्रच्छाया का पहला स्पर्श 3:21 बजे होगा। खग्रास ग्रहण 4:35 बजे शुरू होगा और 5:04 बजे परमग्रास की स्थिति रहेगी। 5:33 बजे खग्रास समाप्त हो जाएगा। प्रच्छाया का अंतिम स्पर्श 6:46 बजे और उपच्छाया का अंत रात 7:52 बजे होगा। भारत में चंद्रमा का उदय करीब 6:26 बजे होगा इसलिए भारत में यह ग्रहण लगभग 20 मिनट 28 सेकंड तक ही दिखाई देगा, यानी 6:26 से 6:46 बजे तक।

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सूतक काल कब से लगेगा?

चंद्र ग्रहण का सूतक काल ग्रहण शुरू होने से 9 घंटे पहले लग जाता है।
उपच्छाया के अनुसार सूतक सुबह 6:21 बजे से शुरू माना जाएगा।
प्रच्छाया के अनुसार सूतक सुबह 9:39 बजे से शुरू होगा।

सूतक और ग्रहण के दौरान क्या न करें?

सूतक लगने के बाद भारी भोजन करने से बचें। मंदिरों के पट बंद कर दिए जाते हैं और मूर्तियों को स्पर्श नहीं किया जाता। गर्भवती महिलाओं को खास सावधानी रखनी चाहिए और नुकीली वस्तुओं का उपयोग नहीं करना चाहिए। इस समय विवाद, क्रोध और नकारात्मक सोच से भी दूर रहना चाहिए।

कहां दिखाई देगा चंद्र ग्रहण?

यह चंद्र ग्रहण पूर्वी एशिया, दक्षिण-पूर्व एशिया, ऑस्ट्रेलिया, प्रशांत महासागर, उत्तर अमेरिका और दक्षिण अमेरिका के कुछ हिस्सों में साफ दिखाई देगा। भारत में नई दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, चेन्नई, बेंगलुरु, हैदराबाद, पटना, भुवनेश्वर, गुवाहाटी, इम्फाल और शिलांग समेत कई शहरों में इसे अलग-अलग अवस्थाओं में देखा जा सकेगा। पूर्वी और उत्तर-पूर्वी भारत में पूर्ण अवस्था दिख सकती है, जबकि पश्चिमी भारत में प्रच्छाया ग्रहण दिखाई देगा।

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राशियों पर प्रभाव

ज्योतिष के अनुसार मिथुन, तुला, वृश्चिक और कुंभ राशि के लिए यह ग्रहण शुभ संकेत दे सकता है। मेष, वृषभ, धनु और मकर राशि वालों को मध्यम प्रभाव रहेगा।

वहीं कर्क, सिंह, कन्या और मीन राशि के जातकों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।

अशुभ प्रभाव से बचने के उपाय

ग्रहण के बाद दूध, दही, चीनी या चावल का दान करना शुभ माना गया है। महामृत्युंजय मंत्र का जाप और भगवान शिव की पूजा लाभकारी बताई गई है। काले तिल, सरसों का तेल, लोहे की वस्तु या काले कपड़े का दान भी नकारात्मक प्रभाव को कम करने में सहायक माना जाता है।

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3 मार्च को होलाष्टक और चंद्र ग्रहण का विशेष संयोग बन रहा है। ऐसे में इस दिन मांगलिक कार्य, जमीन या वाहन खरीदना और मांस-मदिरा का सेवन करने से बचने की सलाह दी जाती है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस दिन संयम और सावधानी रखना ही सबसे बेहतर उपाय है।

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