Bharat Bandh 2026 : नई दिल्ली। संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) और देश की कई केंद्रीय ट्रेड यूनियनों ने भारत-अमेरिका अंतरिम ट्रेड डील, केंद्र सरकार की आर्थिक नीतियों और नए श्रम कानूनों के विरोध में 12 फरवरी को भारत बंद का आह्वान किया है। संगठनों का कहना है कि यह आंदोलन किसानों, मजदूरों और आम जनता के हितों की रक्षा के लिए किया जा रहा है। यूनियनों का दावा है कि इस हड़ताल में 30 करोड़ से अधिक कर्मचारी शामिल हो सकते हैं, जिससे देश के कई हिस्सों में कामकाज प्रभावित होने की संभावना है।
किन मांगों को लेकर प्रदर्शन?
एसकेएम ने बयान जारी कर कहा कि प्रदर्शन न्यू लेबर कोड को वापस लेने, बिजली विधेयक-2025 और बीज विधेयक-2025 को रद्द करने, विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (VB-G RAM G एक्ट-2025) को निरस्त करने, पुरानी पेंशन योजना (OPS) बहाल करने और सभी श्रमिकों के लिए न्यूनतम मजदूरी लागू करने की मांगों पर केंद्रित है। कृषि मजदूर यूनियनों का मंच और नरेगा संघर्ष मोर्चा (NSM) भी इस विरोध में शामिल हैं।
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बिजली और बीज विधेयक पर आपत्ति
किसान संगठनों का आरोप है कि प्रस्तावित बिजली विधेयक-2025 से बिजली दरें बढ़ेंगी और स्मार्ट मीटर लागू किए जाएंगे, जिससे किसानों और घरेलू उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा।
वहीं बीज विधेयक-2025 को लेकर आशंका जताई जा रही है कि इससे बहुराष्ट्रीय कंपनियों का दबदबा बढ़ेगा और बीजों की कीमतों पर नियंत्रण कमजोर होगा। किसान संगठनों ने 300 यूनिट मुफ्त बिजली और स्मार्ट मीटर योजना पर पुनर्विचार की मांग की है।
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मनरेगा बनाम VB-G RAM G
प्रदर्शनकारी VB-G RAM G अधिनियम-2025 को मनरेगा के विकल्प के रूप में देख रहे हैं। उनका कहना है कि मनरेगा ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार की कानूनी गारंटी देता है, जबकि नया कानून इस अधिकार को कमजोर कर सकता है। इसके साथ ही सभी श्रमिकों के लिए न्यूनतम वेतन और OPS बहाली की मांग भी प्रमुख है।
भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर विवाद
एसकेएम ने हालिया भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को किसानों और छोटे व्यापारियों के लिए नुकसानदेह बताया है। संगठनों का आरोप है कि सस्ते आयात से भारतीय कृषि और डेयरी क्षेत्र प्रभावित हो सकते हैं। इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री और अमेरिकी राष्ट्रपति के पुतले जलाने की अपील भी की गई है।
बंद को मिला राजनीतिक समर्थन
कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर इस बंद का समर्थन करते हुए कहा कि मजदूरों और किसानों की चिंताओं को नजरअंदाज किया जा रहा है। आम आदमी पार्टी (AAP) ने भी बंद का समर्थन किया है और कहा है कि उसके कार्यकर्ता किसानों और मजदूरों के साथ खड़े रहेंगे।
किन सेवाओं पर असर संभव?
भारत बंद के चलते कई शहरों में बाजार, सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक, सरकारी कार्यालय और सार्वजनिक परिवहन सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं। स्कूल-कॉलेजों में भी असर पड़ने की संभावना जताई गई है। हालांकि अस्पताल, एयरपोर्ट, एटीएम और अन्य जरूरी सेवाएं सामान्य रूप से संचालित रहने की उम्मीद है।
लोगों के लिए सलाह
प्रशासन और यूनियनों ने लोगों से अपील की है कि वे यात्रा या जरूरी कार्यों की योजना पहले से बना लें। बैंकिंग या सरकारी कामकाज को समय रहते निपटाने की सलाह दी गई है, ताकि संभावित असुविधा से बचा जा सके।
एसकेएम ने 2020-21 के किसान आंदोलन का जिक्र करते हुए कहा कि कई मांगें अब भी लंबित हैं, जिनमें सभी फसलों के लिए MSP की कानूनी गारंटी और कर्ज माफी शामिल है। संगठनों का कहना है कि 12 फरवरी का भारत बंद मजदूर-किसान एकता का बड़ा प्रदर्शन होगा।