हाइलाइट्स
- देश के 20 राज्यों के आदिवासी कलाकार हैंडलूम आर्टिस्ट पहुंचे भोपाल।
- देश के अलग अलग राज्यों की आदिवासी संस्कृति की झलक।
- भोपाल हाट में हो रहा आदि महोत्सव का आयोजन।
Bhopal Haat Aadi Mahotsav 2026 : भोपाल। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में इन दिनों देशभर की आदिवासी संस्कृति की खूबसूरत झलक देखने को मिल रही है। भोपाल हाट में आयोजित ‘आदि महोत्सव 2026’ में देश के 20 से ज्यादा राज्यों से आए आदिवासी कलाकार और हैंडलूम आर्टिस्ट अपनी कला और परंपरा को प्रदर्शित कर रहे हैं।
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कई राज्यों से आए बुनकर और शिल्पकार
इस महोत्सव में पश्चिम बंगाल, तेलंगाना, जम्मू-कश्मीर, ओडिशा, झारखंड, महाराष्ट्र, असम और नॉर्थ ईस्ट के कई राज्यों से आए बुनकर और शिल्पकार शामिल हैं। यहां हाथ से बने कपड़े, कांथा वर्क की सिल्क साड़ियां, टसर, मूगा और एरी सिल्क, बांस से बनी कलाकृतियां, बेल मेटल, पॉटरी और पारंपरिक ज्वेलरी लोगों का ध्यान आकर्षित कर रही हैं।
कढ़ाई और हस्तशिल्प आकर्षण का केंद्र
भोपाल हाट में सजी यह रंग-बिरंगी बाजार भोपालवासियों के लिए खास आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। यहां हर राज्य की अपनी अलग पहचान वाली कढ़ाई, टेक्सटाइल और हस्तशिल्प देखने को मिल रहा है।
हस्तशिल्प- ज्वेलरी लोगों तक पहुंचना
ट्राइफेड की डिप्टी जनरल मैनेजर प्रीति मैथिल ने बताया कि यह आयोजन जनजातीय कार्य मंत्रालय के अंतर्गत ट्राइफेड द्वारा किया जा रहा है। इसका उद्देश्य देशभर के आदिवासी और जनजातीय कारीगरों को एक मंच देना है, ताकि वे अपने पारंपरिक हस्तशिल्प, हैंडलूम, ज्वेलरी और संस्कृति से जुड़ी चीजों को सीधे लोगों तक पहुंचा सकें।
10 दिनों तक भोपाल में आदि महोत्सव
उन्होंने बताया कि इस महोत्सव में 20 से अधिक राज्यों के एम्पैनल्ड आदिवासी आर्टिस्ट शामिल हुए हैं, जो करीब 10 दिनों तक भोपाल में रहकर अपनी कला का प्रदर्शन और बिक्री कर रहे हैं।
नॉर्थ ईस्ट के सातों राज्यों की अलग-अलग एम्ब्रॉयडरी और टेक्सटाइल यहां खास तौर पर देखने को मिल रही है। इसके साथ ही बांस से बना सामान और पॉटरी के शौकीनों के लिए भी यहां काफी कुछ है। खास बात यह है कि यहां पॉटरी बनाना भी सिखाया जा रहा है।
आदिवासी संस्कृति को करीब से जानना
आयोजकों को उम्मीद है कि भोपाल के लोग बड़ी संख्या में यहां पहुंचेंगे और आदिवासी समुदाय द्वारा बनाए गए उत्पादों को खरीदकर उन्हें प्रोत्साहित करेंगे। आदि महोत्सव न सिर्फ खरीदारी का मौका दे रहा है, बल्कि आदिवासी संस्कृति को करीब से जानने और महसूस करने का बेहतरीन अवसर भी प्रदान कर रहा है।