Pappu Yadav Judicial Custody : पटना। पूर्णिया से निर्दलीय सांसद पप्पू यादव को 31 साल पुराने एक मामले में पटना पुलिस ने शुक्रवार देर रात गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तारी के तुरंत बाद उनकी तबीयत बिगड़ गई, जिसके चलते पहले उन्हें IGIMS अस्पताल में भर्ती कराया गया। बाद में अदालत ने बेहतर इलाज को देखते हुए उन्हें दो दिनों की न्यायिक अभिरक्षा में पीएमसीएच भेजने का आदेश दिया। इस मामले में अब अगली सुनवाई सोमवार, 9 फरवरी को होगी।
पप्पू यादव की गिरफ्तारी की खबर सामने आते ही बिहार की राजनीति में हलचल तेज हो गई। शुक्रवार रात जैसे ही पुलिस उन्हें हिरासत में लेने पहुंची, उनके समर्थकों और पुलिस के बीच तीखी नोकझोंक भी देखने को मिली। हालांकि स्थिति को नियंत्रित करते हुए पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया।
1995 का मामला, अब जाकर कार्रवाई
यह पूरा मामला वर्ष 1995 का है। आरोप है कि पप्पू यादव ने पटना के गर्दनीबाग इलाके में एक मकान किराए पर लिया था। मकान मालिक विनोद बिहारी लाल का आरोप है कि किराया लेते समय यह जानकारी नहीं दी गई कि मकान को कार्यालय के रूप में इस्तेमाल किया जाएगा। बाद में उस मकान को दफ्तर बनाकर उस पर कब्जा कर लिया गया।
इस संबंध में गर्दनीबाग थाना में एफआईआर दर्ज की गई थी। मामला अदालत में लंबित रहा। आरोप है कि कई बार समन जारी होने के बावजूद पप्पू यादव अदालत में पेश नहीं हुए। इसे गंभीरता से लेते हुए कोर्ट ने पहले गिरफ्तारी वारंट, फिर इश्तेहार और अंत में संपत्ति कुर्की का आदेश जारी किया।
आधी रात पुलिस कार्रवाई
कोर्ट के आदेश के बाद पटना पुलिस ने शुक्रवार आधी रात कार्रवाई करते हुए पप्पू यादव को गिरफ्तार किया। गिरफ्तारी के बाद उनकी मेडिकल जांच कराई गई, जहां उनकी तबीयत बिगड़ने की सूचना सामने आई। शनिवार सुबह उन्हें कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उन्हें इलाज के लिए पीएमसीएच भेज दिया गया।
गिरफ्तारी के बाद पप्पू यादव के आरोप
गिरफ्तारी के बाद पप्पू यादव ने इसे राजनीतिक साजिश बताया। उन्होंने दावा किया कि वे NEET छात्रा के मामले में आवाज उठा रहे थे, इसी वजह से उन्हें निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने बिहार सरकार और गृह मंत्री सम्राट चौधरी पर गंभीर आरोप लगाए।
पप्पू यादव ने कहा कि वे झुकने वाले नहीं हैं और सच की लड़ाई आखिरी सांस तक लड़ेंगे। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सादी वर्दी में आए पुलिसकर्मियों को देखकर उन्हें डर लगा कि कहीं गोली न चला दी जाए।
9 फरवरी को मामले में अगली सुनवाई
31 साल पुराने इस मामले में अदालत की ताजा कार्रवाई को बड़ा कानूनी मोड़ माना जा रहा है। अब सभी की निगाहें 9 फरवरी की सुनवाई पर टिकी हैं। इस गिरफ्तारी ने न सिर्फ कानूनी बल्कि सियासी तापमान भी बढ़ा दिया है।