India US Trade Deal : नई दिल्ली। व्हाइट हाउस ने शनिवार देर रात जानकारी दी कि भारत और अमेरिका ने आपसी और दोनों देशों के लिए फायदेमंद व्यापार को लेकर एक अंतरिम समझौते के फ्रेमवर्क को अंतिम रूप दे दिया है। यह सहमति दोनों देशों के बीच करीब एक साल से चल रही बातचीत के बाद बनी है। इस फ्रेमवर्क को औपचारिक रूप से बड़ी कूटनीतिक और आर्थिक सफलता माना जा रहा है।
इंडियन एक्सपोर्टर के लिए खुला 30 ट्रिलियन डॉलर का बाजार
केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने सोशल मीडिया पर भारत-अमेरिका के संयुक्त बयान को साझा करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में यह फ्रेमवर्क तैयार किया गया है।
उन्होंने बताया कि इस समझौते से भारतीय निर्यातकों के लिए करीब 30 ट्रिलियन डॉलर का अमेरिकी बाजार खुल सकता है, जिससे भारत की एक्सपोर्ट क्षमता को बड़ा फायदा मिलेगा।
अमेरिका से डिस्टिल्ड ग्रेन सॉल्युबल का सीमित आयात
पीयूष गोयल ने स्पष्ट किया कि भारत अमेरिका से उन्हीं उत्पादों का आयात बढ़ाएगा, जिन पर वह पहले से निर्भर है। उन्होंने कहा कि पोल्ट्री और पशुपालन सेक्टर की जरूरतों को देखते हुए डिस्टिल्ड ग्रेन सॉल्युबल का सीमित आयात किया जाएगा। इसके अलावा कुछ वाइन और स्पिरिट को न्यूनतम आयात मूल्य के साथ मंजूरी दी गई है, ताकि घरेलू उद्योग को नुकसान न हो।
इन अमेरिकी उत्पादों पर भारत घटाएगा टैरिफ
वाणिज्य मंत्री ने बताया कि इस फ्रेमवर्क से भारत को अत्याधुनिक तकनीक का लाभ मिलेगा। इसमें एयरक्राफ्ट, चिप्स, सेमीकंडक्टर, सेमीकंडक्टर मशीनरी, क्वांटम टेक्नोलॉजी जैसे उत्पाद शामिल हैं। उन्होंने कहा कि इससे भारतीय उद्योग को मजबूती मिलेगी और मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा मिलेगा।
भारतीय टेक्सटाइल, लेदर और खिलौना सेक्टर को फायदा
पीयूष गोयल ने कहा कि टेक्सटाइल, लेदर, खिलौने और स्पोर्ट्स गुड्स जैसे सेक्टर में टैरिफ घटने से भारतीय उत्पादों को अमेरिकी बाजार में बेहतर प्रतिस्पर्धा मिलेगी। इससे इन क्षेत्रों में काम करने वाले मजदूरों और कारीगरों को भी सीधा लाभ होगा।
किसानों और MSME सेक्टर को मिलेगी नई ताकत
गोयल के अनुसार, इस डील से किसानों, टेक्सटाइल और फुटवियर वर्कर्स, खिलौना उद्योग और स्पोर्ट्स गुड्स सेक्टर को अमेरिकी बाजार तक ज्यादा पहुंच मिलेगी। होम डेकोर, सिल्क प्रोडक्ट्स, कुशन, लैंप, मशीनरी पार्ट्स, ज्वेलरी और कपड़ों के निर्यात में भी बढ़ोतरी की संभावना है।
पड़ोसी देशों से कम टैरिफ का फायदा भारत को
पीयूष गोयल ने कहा कि भारत के निर्यात पर लगने वाला 50 प्रतिशत रेसिप्रोकल टैरिफ अब घटकर 18 प्रतिशत हो जाएगा। यह टैरिफ इंडोनेशिया, बांग्लादेश और वियतनाम जैसे देशों के मुकाबले कम होगा। इससे भारतीय उत्पाद अमेरिकी बाजार में ज्यादा प्रतिस्पर्धी बनेंगे।
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इन भारतीय उत्पादों पर जीरो ड्यूटी
वाणिज्य मंत्री ने बताया कि अमेरिका में कई भारतीय उत्पादों पर शून्य शुल्क लगेगा। इनमें फार्मास्यूटिकल्स, स्मार्टफोन, जेम और ज्वेलरी, मसाले, चाय, कॉफी, सुपारी, काजू, आम, केला, अमरूद, अनानास, मशरूम और कई सब्जियां शामिल हैं। इसके अलावा एयरक्राफ्ट पार्ट्स, कुछ ऑटो पार्ट्स और घड़ियों को भी फायदा मिलेगा।
कृषि क्षेत्र को पूरी तरह सुरक्षित रखा
पीयूष गोयल ने साफ कहा कि भारत ने अपने कृषि क्षेत्र को नहीं खोला है। डेयरी उत्पाद, गेहूं, चावल, मक्का, सोयाबीन, चीनी, ज्वार, बाजरा, रागी, दालें और फल-सब्जियों के कई उत्पादों पर कोई रियायत नहीं दी गई है। इससे भारतीय किसानों के हित पूरी तरह सुरक्षित रहेंगे।
500 अरब डॉलर के द्विपक्षीय व्यापार का लक्ष्य
पीयूष गोयल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि भारत और अमेरिका के बीच हर साल 500 अरब डॉलर के द्विपक्षीय व्यापार के लक्ष्य को लेकर फरवरी 2025 से विस्तृत व्यापार समझौते पर बातचीत शुरू हो चुकी है। यह अंतरिम फ्रेमवर्क उसी दिशा में पहला बड़ा कदम है।
उद्योग जगत ने किया समझौते का स्वागत
उद्योग संगठन FICCI और PHDCCI ने इस अंतरिम ट्रेड फ्रेमवर्क की सराहना की है। PHDCCI के सीईओ रंजीत मेहता ने कहा कि यह समझौता दोनों देशों के निर्यातकों के लिए बाजार तक पहुंच बढ़ाएगा और व्यापार संबंधों को स्थिरता देगा।
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महत्वपूर्ण खनिजों की सप्लाई में भारत
मंत्री गोयल ने कहा कि अमेरिका और भारत रणनीतिक पार्टनर और सहयोगी हैं और PAX सिलिका का भी हिस्सा हैं, साथ ही बिना रुकावट सप्लाई के लिए वैकल्पिक स्रोत विकसित करने पर भी काम कर रहे हैं।
जयशंकर बोले– मेक इन इंडिया को मिलेगा बढ़ावा
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा कि यह अंतरिम फ्रेमवर्क भारत और अमेरिका के बीच आपसी फायदे वाली ट्रेड पार्टनरशिप को मजबूत करेगा। इससे भारतीय निर्यातकों को नए अवसर मिलेंगे और ‘मेक इन इंडिया’ को और गति मिलेगी।