Mamata Banerjee vs ECI : नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी आज सुप्रीम कोर्ट में एक अहम सुनवाई में शामिल हो सकती हैं। यह सुनवाई राज्य में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के खिलाफ दायर याचिकाओं पर हो रही है। ममता ने सुप्रीम कोर्ट से अनुरोध किया है कि वे खुद अदालत में पेश होकर दलील रख सकें।
सूत्रों के अनुसार उनके लिए कोर्ट में प्रवेश पास भी जारी हो चुका है। ममता ने अंतरिम आवेदन दाखिल कर याचिकाकर्ता के रूप में मौजूद रहने और तथ्य पेश करने की अनुमति मांगी है।
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ममता ने LLB डिग्री ली है। लेकिन वे प्रैक्टिसिंग एडवोकेट नहीं हैं। इसलिए सवाल उठ रहा है कि क्या वे जज के सामने खुद कानूनी बहस कर सकती हैं। कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि सिर्फ LLB डिग्री से कोर्ट में वकालत का अधिकार नहीं मिलता।
यह अधिकार Advocates Act, 1961 और Bar Council of India के नियमों से मिलता है। फिर भी, याचिकाकर्ता के तौर पर ममता कोर्ट में मौजूद रह सकती हैं। वे अपने वकीलों को निर्देश दे सकती हैं। यह मामला पश्चिम बंगाल में SIR प्रक्रिया से जुड़ा है।
ममता का आरोप है कि इससे लाखों लोगों के नाम वोटर लिस्ट से हटाए जा रहे हैं। चुनाव से पहले यह प्रक्रिया गलत है। वे कहती हैं कि पीड़ितों को बचाव का मौका नहीं दिया जा रहा। आज CJI सूर्यकांत की बेंच इस पर सुनवाई करेगी। अगर अनुमति मिली तो ममता देश की पहली मौजूदा मुख्यमंत्री बन सकती हैं जो खुद सुप्रीम कोर्ट में अपना पक्ष रखेंगी।
सुनवाई की मुख्य बातें:
सुप्रीम कोर्ट में CJI सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस विपुल पंचोली की बेंच सुनवाई करेगी। ममता की याचिका के अलावा TMC सांसदों की याचिकाएं भी शामिल हैं।
ममता ने क्या मांगा:
सीएम ममता ने ‘पार्टी इन पर्सन’ के तौर पर पेश होने की अनुमति मांगी। कहा कि वे SIR से प्रभावित लोगों की समस्याओं से भली-भांति वाकिफ हैं। कोर्ट की मर्यादा और प्रक्रिया का सम्मान करेंगी।
LLB से क्या अधिकार मिलता है:
कानूनी विशेषज्ञ डॉ. प्रशांत मिश्रा के अनुसार, LLB डिग्री से कोर्ट में बहस का हक नहीं मिलता। State Bar Council में एनरोलमेंट, AIBE पास और Certificate of Practice जरूरी है।
Advocates Act 1961 क्या कहता है:
कानून के अनुसार, कोर्ट में दलील देने का अधिकार सिर्फ एनरोल्ड एडवोकेट को है। बिना इस प्रक्रिया के बहस गैरकानूनी है।
ममता की कानूनी स्थिति:
ममता LLB होल्डर हैं। लेकिन Bar Council में एनरोलमेंट नहीं कराया। AIBE पास नहीं किया। इसलिए वे वकील नहीं मानी जातीं। याचिकाकर्ता के रूप में मौजूद रह सकती हैं।