POK: पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (POK) में सरकार और सेना के खिलाफ लोगों का गुस्सा उबल पड़ा है। बुनियादी जरूरतों पर सब्सिडी कटौती और सेना की मनमानी के विरोध में हजारों लोग सड़कों पर उतर आए हैं। अब तक हुई झड़प में कम से कम 12 नागरिकों की मौत हो चुकी है और 200 से अधिक लोग घायल हुए हैं।
यह आंदोलन जम्मू-कश्मीर संयुक्त अवामी एक्शन कमेटी (JKJAAC) की अगुवाई में हो रहा है, जिसमें आम लोग, वकील, शिक्षक, व्यापारी और छात्र बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रहे हैं। आंदोलनकारी 38 मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं, जिनमें सबसे अहम है, पाकिस्तान में रह रहे शरणार्थियों के लिए आरक्षित 12 विधानसभा सीटों को खत्म करना, बिजली और आटे पर सब्सिडी बहाल करना, और विकास कार्य पूरे करना।
स्थिति बिगड़ने पर सरकार ने हजारों अतिरिक्त सैनिकों को तैनात किया है। बावजूद इसके, आंदोलन अब मुजफ्फराबाद से रावलकोट, कोटली, मीरपुर और नी़लम घाटी तक फैल चुका है।
प्रदर्शन के दौरान 25 सैनिकों को बंधक बनाए जाने की खबर है। आंदोलनकारियों का आरोप है कि खुफिया एजेंसियां आंदोलन को तोड़ने के लिए साजिशें कर रही हैं।
29 सितंबर से बाजार, दुकानें, मोबाइल और इंटरनेट सेवाएं बंद हैं। सोशल मीडिया पर लोग “कश्मीर हमारा है”, और “POK मांगे आज़ादी” जैसे नारे लगा रहे हैं।
पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शाहबाज शरीफ ने वार्ता की पेशकश की है, लेकिन हालात अब सरकार और सेना दोनों के लिए बड़ी चुनौती बन गए हैं।
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