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Ladakh Violence: वांगचुक पर भड़काऊ भाषण का आरोप, राज्य की मांग ने लिया उग्र रूप, लेह में कर्फ्यू और जांच शुरू

Ladakh Violence

Ladakh Violence: लद्दाख में पूर्ण राज्य और संविधान की छठी अनुसूची में शामिल करने की मांग को लेकर चल रहा शांतिपूर्ण आंदोलन अचानक हिंसक हो गया। यह आंदोलन जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के नेतृत्व में 10 सितंबर से भूख हड़ताल के रूप में शुरू हुआ था। लेकिन 25 सितंबर को प्रदर्शन ने उग्र रूप ले लिया, जिसमें 4 लोगों की मौत हो गई और 80 से अधिक घायल हुए।

गृह मंत्रालय ने हिंसा के लिए सोनम वांगचुक को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि उन्होंने अपने भाषणों में अरब स्प्रिंग और नेपाल के जन आंदोलनों का ज़िक्र कर युवाओं को भड़काया। मंत्रालय का कहना है कि सोनम वांगचुक ने भीड़ को उकसाया और हालात बिगड़ने पर खुद एम्बुलेंस से गांव लौट गए।

प्रदर्शनकारियों ने लेह में बीजेपी ऑफिस और सरकारी इमारतों पर हमला किया, पुलिस वाहनों में आग लगा दी। पुलिस को हालात संभालने के लिए लाठीचार्ज और फायरिंग करनी पड़ी।

लद्दाख की प्रमुख मांगें हैं: पूर्ण राज्य का दर्जा, छठी अनुसूची में शामिल करना, स्थानीयों के लिए नौकरियों व जमीन पर अधिकार, और अलग संसदीय सीटें। लद्दाख की 97% आबादी अनुसूचित जनजाति से है और वे अपने अधिकारों की रक्षा के लिए यह आंदोलन कर रहे हैं।

सरकार ने जांच के दायरे में वांगचुक की पाकिस्तान यात्रा को भी लिया है। फिलहाल लेह में कर्फ्यू लागू है और भारी सुरक्षा बल तैनात हैं।

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